JPSC-JSSC आंदोलनः ‘JPSC रिफॉर्म मंच’ के एक्स अकाउंट की जांच, मांगी जानकारी
खबर सार :-
झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्र आंदोलन के बीच रांची साइबर पुलिस ने ‘JPSC रिफॉर्म मंच’ एक्स अकाउंट की जांच शुरू की और एक्स से अकाउंट संचालक की जानकारी मांगी।
खबर विस्तार : -
रांची: झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन के बीच अब सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही सामग्री भी पुलिस जांच के दायरे में आ गई है। रांची साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने ‘JPSC रिफॉर्म मंच’ के नाम से संचालित एक्स अकाउंट के संबंध में विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने के लिए X Corporation को नोटिस जारी किया है। पुलिस ने यह नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 94 के तहत जारी किया है।
साइबर पुलिस के नोटिस के अनुसार, संबंधित एक्स अकाउंट का इस्तेमाल झारखंड सरकार की कार्रवाई और छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों को लेकर कथित तौर पर गलत एवं भ्रामक सूचनाएं, वीडियो और तस्वीरें प्रसारित करने के लिए किया जा रहा है। पुलिस ने कहा है कि इस मामले में आपराधिक जांच चल रही है और अकाउंट के पीछे मौजूद व्यक्ति या व्यक्तियों की पहचान करना तथा उनकी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटाना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यह कार्रवाई रांची के कोतवाली थाना में दर्ज कांड संख्या 183/2026 से संबंधित है। यह मामला 21 अगस्त 2026 को दर्ज किया गया था। नोटिस में विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज मामले का हवाला देते हुए कहा गया है कि सोशल मीडिया के माध्यम से ऐसी सामग्री प्रसारित की जा रही है, जिससे आम लोगों में भय, भ्रम या अशांति की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है।
कई पोस्ट को बनाया जांच का आधार
साइबर पुलिस ने नोटिस में संबंधित एक्स अकाउंट की कई पोस्ट का उल्लेख करते हुए उन्हें जांच का आधार बताया है। एक पोस्ट में कथित तौर पर दावा किया गया कि ‘सरकार ने छात्रों के साथ धोखा किया है’। पुलिस के मुताबिक, इस पोस्ट के साथ साझा किए गए वीडियो में ‘जेएमएम के गुंडे छात्रों को धमका रहे हैं’ जैसी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। पुलिस ने आरोप लगाया है कि इस तरह की सामग्री जानबूझकर लोगों में भय और असंतोष पैदा कर सकती है। हालांकि, इन पोस्ट को लेकर लगाए गए आरोप पुलिस की जांच का हिस्सा हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि का उल्लेख नोटिस में नहीं है।
एक अन्य पोस्ट में पुलिस पर कथित तौर पर छात्रों के खिलाफ अत्याचार करने और सरकार की कार्रवाई को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाया गया है। साइबर पुलिस का कहना है कि ऐसी सामग्री से सरकारी अधिकारियों और आम लोगों के बीच यह धारणा बन सकती है कि राज्य सरकार छात्रों के हितों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। पुलिस ने इन डिजिटल पोस्ट को जांच के दौरान महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के तौर पर शामिल किया है।
अन्य पोस्ट की भी जांच जारी
नोटिस में एक अन्य पोस्ट का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें कथित तौर पर ‘आदिवासी राज्य में सरकार आदिवासियों को मार रही’ जैसी टिप्पणी की गई थी। साइबर पुलिस ने इस सामग्री को संवैधानिक सरकार और प्रशासन की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली कथित मानहानिकारक सामग्री के रूप में भी जांच के दायरे में रखा है। पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से कथित आपत्तिजनक सामग्री के प्रसारण और ऐसी सामग्री के जरिए सामाजिक एवं सांप्रदायिक तनाव पैदा होने की आशंका का भी उल्लेख किया है। जांच एजेंसी का कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री की प्रकृति, उसके स्रोत और उसे प्रसारित करने वाले लोगों की भूमिका का पता लगाना जरूरी है।
एक्स से मांगी गई कई अहम जानकारियां
साइबर पुलिस ने X Corporation से संबंधित अकाउंट धारक की पहचान और अकाउंट संचालन से जुड़ी तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। नोटिस में अकाउंट धारक का पूरा नाम, आवासीय पता, संपर्क नंबर और वैकल्पिक ई-मेल सहित रजिस्ट्रेशन संबंधी विवरण मांगा गया है।
इसके अलावा पुलिस ने 10 अगस्त 2026 और उससे पहले की अवधि के लॉग-इन एवं लॉग-आउट रिकॉर्ड, उनकी सटीक तारीख और समय तथा उपलब्ध IP एड्रेस की जानकारी भी मांगी है। जांच एजेंसी ने अकाउंट को संचालित करने के लिए इस्तेमाल किए गए उपकरणों से संबंधित जानकारी भी एक्स से मांगी है। पुलिस के मुताबिक, इन डिजिटल जानकारियों से अकाउंट के वास्तविक संचालक की पहचान करने, पोस्ट किए गए कंटेंट के स्रोत का पता लगाने और मामले में संबंधित व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है।
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