नई दिल्लीः रविवार को नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की महत्वपूर्ण वार्ता हुई। बैठक में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने, वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा सहयोग, व्यापार, तकनीक और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा की गई। वार्ता के बाद आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की प्रतिबद्धता जताई।
जयशंकर ने कहा कि भारत अपनी 140 करोड़ आबादी की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसी कारण वह विभिन्न देशों से किफायती और विश्वसनीय ऊर्जा स्रोतों की खरीद का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक है और भारत इस दिशा में व्यावहारिक तथा संतुलित नीति पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत संसाधनों और बाजार हिस्सेदारी को किसी राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किए जाने के खिलाफ है।
विदेश मंत्री ने बताया कि पिछले एक वर्ष में अमेरिका से भारत के ऊर्जा आयात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने अमेरिका को भारत का एक विश्वसनीय ऊर्जा साझेदार बताया। जयशंकर ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत ‘मेक इन इंडिया’ नीति को विशेष महत्व दे रहा है ताकि रक्षा, तकनीक और विनिर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सके।
उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। वार्ता के दौरान पश्चिम एशिया, पूर्वी एशिया और खाड़ी क्षेत्र की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। जयशंकर ने दोनों देशों के बीच जल्द एक अंतरिम व्यापार समझौता करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिससे भविष्य में व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते का मार्ग प्रशस्त हो सके।
जयशंकर ने न्यूक्लियर सहयोग, दुर्लभ खनिजों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों लोकतांत्रिक देश वैश्विक नवाचार और नई तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका के बीच लोगों के आपसी संबंध इस साझेदारी की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने वैध यात्रियों और छात्रों के लिए वीजा प्रक्रिया को आसान और अधिक पारदर्शी बनाए रखने की आवश्यकता बताई। आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति दोहराते हुए जयशंकर ने 26/11 मुंबई हमले के मुख्य साजिशकर्ता के प्रत्यर्पण में अमेरिका के सहयोग की सराहना की।
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत अपने सभी वैश्विक साझेदारों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की नीति पर चलता है। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका, इजराइल, ईरान और खाड़ी देशों के साथ मजबूत संबंध रखता है और वह अंतरराष्ट्रीय संबंधों को ‘जीरो-सम गेम’ की तरह नहीं देखता। भारत का उद्देश्य सभी देशों के साथ संतुलित और सकारात्मक साझेदारी बनाए रखना है।
वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को अमेरिका का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि दोनों लोकतांत्रिक देश वैश्विक चुनौतियों से निपटने, आर्थिक सहयोग बढ़ाने और अत्याधुनिक तकनीकों के विकास के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। रुबियो ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका के किसी अन्य देश के साथ संबंध भारत के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी की कीमत पर नहीं हैं।
रुबियो ने कहा कि भारत उन्नत तकनीकी क्षमताओं वाला तेजी से उभरता हुआ साझेदार है और दोनों देशों के बीच तकनीक, रक्षा, नवाचार और डिजिटल क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने भारतीय कंपनियों द्वारा अमेरिकी अर्थव्यवस्था में किए गए 20 अरब डॉलर से अधिक निवेश की सराहना की।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान की स्थिति पर बोलते हुए रुबियो ने कहा कि पिछले 48 घंटों में खाड़ी क्षेत्र के साझेदार देशों के साथ सकारात्मक प्रगति हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही इस मुद्दे पर अच्छी खबर सामने आ सकती है। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका नहीं चाहता कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल करे। साथ ही उन्होंने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग बताते हुए व्यावसायिक जहाजों को धमकी देने को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ करार दिया।
अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए रुबियो ने कहा कि अमेरिका दुनियाभर से आए लोगों द्वारा समृद्ध बना देश है और वहां सभी समुदायों का सम्मान किया जाता है। उन्होंने माना कि हर समाज में कुछ लोग आपत्तिजनक बातें करते हैं, लेकिन अमेरिका मूल रूप से एक स्वागत करने वाला देश है।
वीजा नियमों में बदलाव पर उन्होंने कहा कि जे-1, एफ-1 और एच-1बी वीजा सुधार केवल भारत के लिए नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर लागू व्यापक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी आव्रजन प्रणाली को अधिक आधुनिक और टिकाऊ बनाने की दिशा में काम कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस बदलाव के दौरान कुछ अस्थायी कठिनाइयां सामने आ सकती हैं।
भारत और अमेरिका के बीच हुई यह उच्चस्तरीय वार्ता ऐसे समय में हुई है जब दुनिया कई भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में दोनों देशों का सहयोग वैश्विक स्थिरता, आर्थिक विकास और रणनीतिक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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