Quess Corp Report: भारत में रोजगार का नक्शा तेजी से बदल रहा है। सोमवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, देश की लगभग 70 प्रतिशत नौकरियां अब टियर-2 और टियर-3 शहरों में उपलब्ध हैं। इनमें अकेले टियर-3 शहरों की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत है, जबकि टियर-2 शहरों में 29 प्रतिशत रोजगार सृजित हो रहा है। इसके मुकाबले टियर-1 यानी बड़े महानगरों की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत रह गई है। यह बदलाव दर्शाता है कि अब आर्थिक गतिविधियां सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं रहीं।
स्टाफिंग फर्म Quess Corp की रिपोर्ट के मुताबिक, बीएफएसआई (बैंकिंग, वित्तीय सेवा और बीमा) और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर मिलकर टियर-3 शहरों में 45 प्रतिशत से अधिक कार्यबल को रोजगार दे रहे हैं। वहीं रिटेल सेक्टर की हिस्सेदारी 33 प्रतिशत है। इसके अलावा रिटेल, बीएफएसआई, ईएमपीआई/मैन्युफैक्चरिंग, टेलीकॉम, एफएमसीजी/एफएमसीडी और लॉजिस्टिक्स सेक्टर संयुक्त रूप से अधिकतर नौकरियां प्रदान कर रहे हैं। इन क्षेत्रों में स्टोर ऑपरेशंस, सेल्स, प्लांट संचालन और सप्लाई चेन से जुड़े पद प्रमुख हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि Coimbatore, Indore, Surat, Vadodara, Noida और Lucknow जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर रोजगार के बड़े केंद्र बनकर उभरे हैं। बढ़ती खपत, औद्योगिक कॉरिडोर और बुनियादी ढांचे के विस्तार ने इन शहरों के श्रम बाजार को नई दिशा दी है। कंपनियां अब लागत कम करने और स्थानीय बाजारों के करीब रहने के लिए गैर-मेट्रो शहरों को प्राथमिकता दे रही हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, 4.83 लाख कर्मचारियों पर आधारित इस अध्ययन में पाया गया कि 64 प्रतिशत कर्मचारी 30 वर्ष से कम आयु के हैं। यह संकेत देता है कि देश का युवा वर्ग तेजी से औपचारिक रोजगार में शामिल हो रहा है। साथ ही, 55 प्रतिशत कर्मचारी अपनी मौजूदा नौकरी में एक वर्ष से कम समय से कार्यरत हैं। इससे स्पष्ट है कि प्रोजेक्ट आधारित काम, मौसमी मांग और तेजी से बदलते उद्योगों के कारण नौकरी में गतिशीलता बढ़ी है।
वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में 26,000 से अधिक नए यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) बनाए गए। इससे पहले अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों को भविष्य निधि (पीएफ), ईएसआई, बीमा और अन्य वैधानिक लाभों का फायदा मिलना शुरू हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, यूएएन देशभर में बनाए जा रहे हैं, लेकिन बड़ी संख्या में कार्यबल टियर-2 और टियर-3 शहरों की ओर स्थानांतरित हो रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि गैर-मेट्रो क्षेत्रों में न केवल रोजगार बढ़ रहा है, बल्कि सामाजिक सुरक्षा का दायरा भी मजबूत हो रहा है।
Lohit Bhatia ने कहा कि रिटेल विस्तार, मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर और सेवाओं के विकेंद्रीकरण के कारण रोजगार के अवसर बड़े शहरों से बाहर फैल रहे हैं। यह बदलाव भारत के संतुलित क्षेत्रीय विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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