Election Commission of India News: आगामी विधानसभा चुनावों से पहले West Bengal में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अभूतपूर्व कदम उठाया गया है। Election Commission of India (ECI) ने 1 मार्च से तैनात होने वाले केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के जवानों के मूवमेंट पर जीपीएस ट्रैकिंग के जरिए नजर रखने का निर्णय लिया है। केंद्रीय पर्यवेक्षक इन वाहनों की रियल-टाइम लोकेशन मॉनिटर करेंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पहले दिन से ही बलों का प्रभावी उपयोग हो।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक, आयोग ने स्पष्ट किया है कि 1 मार्च को तैनात की जा रही 240 कंपनियों को चुनाव तिथियों की घोषणा से पहले ही राज्य में भेजा जाएगा। इनका उद्देश्य संवेदनशील इलाकों में क्षेत्रीय पकड़ बनाना और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों से परिचित होना है।

सीईओ कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आयोग के निर्देशानुसार सभी आवंटित वाहनों में जीपीएस ट्रैकर लगाए जाएंगे। इससे केंद्रीय पर्यवेक्षक यह देख सकेंगे कि किस कंपनी की तैनाती कहां है, वह कितनी सक्रिय है और क्या उसे तय दायित्वों के अनुरूप इस्तेमाल किया जा रहा है। पर्यवेक्षक दैनिक रिपोर्ट भी आयोग को सौंप सकेंगे। पिछले चुनावों में यह शिकायतें सामने आई थीं कि बड़ी संख्या में बलों की तैनाती के बावजूद मतदान के दिनों में उनका समुचित उपयोग नहीं हुआ। कुछ मामलों में ड्यूटी के दौरान जवानों के बिना स्पष्ट निर्देश घूमने-फिरने की शिकायतें भी मिली थीं। इन्हीं अनुभवों के आधार पर इस बार शुरुआत से ही निगरानी तंत्र मजबूत किया गया है।
पहले चरण में 1 मार्च को कुल 240 कंपनियां तैनात की जाएंगी। इनमें 110 कंपनियां सीएपीएफ की होंगी, जबकि 55 कंपनियां Border Security Force (BSF), 21 कंपनियां Central Industrial Security Force (CISF), 27 कंपनियां Indo-Tibetan Border Police (ITBP) और 27 कंपनियां Sashastra Seema Bal (SSB) की होंगी। दूसरे चरण में 10 मार्च को अतिरिक्त 240 कंपनियों की तैनाती की जाएगी। इस चरण में 120 कंपनियां Central Reserve Police Force (CRPF), 65 बीएसएफ, 16 सीआईएसएफ, 20 आईटीबीपी और 19 एसएसबी की कंपनियां शामिल होंगी। कुल मिलाकर 480 कंपनियों की मौजूदगी राज्य में चुनावी सुरक्षा का व्यापक ढांचा तैयार करेगी। इन कंपनियों की वापसी या पुनर्स्थापन की प्रक्रिया चुनाव आयोग की अधिसूचना के अनुसार तय समय पर की जाएगी।

भारतीय निर्वाचन आयोग पश्चिम बंगाल में एसआईआर और आगामी विधानसभा चुनाव से जुड़ी तैयारियों को लेकर पूरी तरह सक्रिय है। निर्वाचन आयोग का मानना है कि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता के लिए सुरक्षा बलों का प्रभावी उपयोग अनिवार्य है। जीपीएस निगरानी से न केवल जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि संवेदनशील बूथों और इलाकों में त्वरित कार्रवाई भी संभव होगी।
इसी बीच, मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar चुनावी तैयारियों की समीक्षा के लिए पुडुचेरी और तमिलनाडु के दौरे पर जा रहे हैं। अप्रैल-मई में Tamil Nadu, Kerala, Assam, West Bengal और केंद्र शासित प्रदेश Puducherry में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। जानकारी के अनुसार, वे पुडुचेरी में मुख्य सचिव शरथ चौहान और पुलिस महानिदेशक शालिनी सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। चर्चा का केंद्र सुरक्षा व्यवस्था, लॉजिस्टिक्स और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के उपाय होंगे।

पुडुचेरी पुलिस मुख्यालय में हाल ही में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें चुनावी सुरक्षा प्रोटोकॉल, संवेदनशील बूथों की निगरानी और आदर्श आचार संहिता के पालन जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। इसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त चेन्नई में राज्य की मुख्य निर्वाचन अधिकारी अर्चना पटनायक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। 27 फरवरी को राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ परामर्श भी प्रस्तावित है। यह दौरा चुनाव तिथियों की औपचारिक घोषणा से पहले तैयारियों का अंतिम आकलन माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार चुनावी प्रबंधन में तकनीक की भूमिका निर्णायक होगी। जीपीएस ट्रैकिंग, डिजिटल मॉनिटरिंग और दैनिक रिपोर्टिंग सिस्टम से चुनाव आयोग को जमीनी स्थिति का सटीक आकलन मिलेगा। इससे न केवल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि मतदाताओं का भरोसा भी बढ़ेगा। पश्चिम बंगाल जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में यह कदम आयोग की सख्ती और निष्पक्षता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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