नई दिल्ली : इलेक्ट्रिक बसों के बाद, सरकार अब इलेक्ट्रिक ट्रकों की खरीद पर भी सब्सिडी देगी। ई-ट्रकों की संख्या बढ़ने से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। डीजल ट्रकों की तुलना में ई-ट्रक प्रदूषण को 35 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं। हालांकि, बैटरी से चलने के कारण ई-ट्रक शून्य प्रदूषण फैलाएंगे, लेकिन बैटरी चार्ज करने के लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली के उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन होता है। इसी के अनुसार, भारी उद्योग मंत्रालय ने यह गणना की है। पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत ई-ट्रकों की खरीद पर सब्सिडी दी जाएगी और इस मद में 500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। सरकार 5600 ई-ट्रकों की खरीद पर सब्सिडी देगी। यह सब्सिडी 2.7 लाख से 9.7 लाख तक होगी।
दो साल की अवधि वाली पीएम ई-ड्राइव योजना अगले साल 31 मार्च को समाप्त हो रही है। पहले आओ पहले पाओ के आधार पर सब्सिडी दी जाएगी। भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि 5600 ट्रकों में से 1100 ई-ट्रक दिल्ली में चलाए जाएंगे और दिल्ली में पंजीकृत ई-ट्रकों के लिए 100 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने अगले दो वर्षों में अपने विभिन्न स्थानों पर 150 ई-ट्रक तैनात करने का निर्णय लिया है। इलेक्ट्रिक ट्रकों की खरीद को बढ़ावा देने के लिए पहली बार ऐसी कोई योजना लाई गई है। बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स, सीमेंट और इस्पात जैसे उद्योग इस योजना के प्रमुख लाभार्थी होंगे। इसके तहत 5600 इलेक्ट्रिक ट्रकों को सहायता देने की योजना है।
इस योजना से लगभग 5,600 इलेक्ट्रिक ट्रकों को लाभ मिलने की संभावना है। दिल्ली के लिए 1,100 ई-ट्रकों का लक्ष्य रखा गया है, ताकि राष्ट्रीय राजधानी की वायु गुणवत्ता में सुधार होगा। इस योजना से सीमेंट, बंदरगाह, इस्पात और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र लाभान्वित होंगे। वोल्वो-अशोक लीलैंड, टाटा मोटर्स और आयशर जैसी ओईएम कम्पनियां पहले से ही इलेक्ट्रिक ट्रकों का निर्माण कर रही हैं। सेल ने अगले दो वर्षों में 150 ई-ट्रक खरीदने का लक्ष्य रखा है।
साथ ही आंतरिक नीति के तहत बेड़े में शामिल वाहनों में से 15 प्रतिशत वाहनों को ईवी में बदलने की योजना बना रही है। हालांकि, पुराने प्रदूषण फैलाने वाले ट्रकों को स्क्रैप करना अनिवार्य होगा, इसके बाद ही ई-ट्रकों पर प्रोत्साहन मिलेगा। सरकार का लक्ष्य इस योजना के माध्यम से न सिर्फ परिवहन की लागत को कम करना है, बल्कि भारी वाहन क्षेत्र का रुझान स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ाना है, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार हो सके। इससे भारत के 2070 नेट-ज़ीरो लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।
इस योजना के तहत, एन2 और एन3 श्रेणी के इलेक्ट्रिक ट्रकों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। एन3 श्रेणी के ट्रैक्टर-पुलर वाहनों के लिए प्रोत्साहन का विशेष प्रावधान किया गया है। इस योजना के तहत, ट्रक निर्माताओं को वाहन-मोटर पर 5 वर्ष या 5 लाख किलोमीटर की वारंटी और 2.5 लाख किलोमीटर या 5 वर्ष की वारंटी प्रदान करनी होगी। प्रोत्साहन की राशि ट्रक के सकल भार के अनुसार तय होगी। अधिकतम प्रोत्साहन राशि 9.6 लाख रुपये तक दी जाएगी।
प्रोत्साहन राशि खाते की जगह सीधे वाहन के खरीद मूल्य में कमी के रूप में मिलेगी। योजना में दिल्ली में पंजीकृत करीब 1100 ई-ट्रकों के लिए प्रोत्साहन राशि आरक्षित की गई है। इससे राष्ट्रीय राजधानी में वायु गुणवत्ता सम्बंधी चिंताओं को दूर करने में मदद मिलेगी। इसके लिए लगभग 100 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।
इस योजना के तहत, केंद्रीय मोटर वाहन नियमों (सीएमवीआर) के तहत परिभाषित एन2 और एन3 श्रेणी (मध्यम और भारी माल ढुलाई के लिए) के इलेक्ट्रिक ट्रकों पर भी प्रोत्साहन लागू होगा। एन2 श्रेणी में 3.5 टन से अधिक और 12 टन तक के सकल वाहन भार (जीवीडब्ल्यू) वाले ट्रक शामिल हैं। वहीं एन3 श्रेणी में 12 टन से अधिक और 55 टन तक के जीवीडब्ल्यू वाले ट्रक शामिल हैं। इलेक्ट्रिक ट्रकों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए, निर्माता एक व्यापक निर्माता-समर्थित वारंटी प्रदान करेंगे। इसमें बैटरी के लिए पांच साल या पांच लाख किमी की वारंटी शामिल होगी।
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