मुंबईः भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने निवेशकों को अलर्ट रहने की सलाह दी है। ऐसा सोशल मीडिया के जरिए स्टॉक मार्केट में बढ़ते फ्रॉड को ध्यान में रखकर किया गया है। इसलिए सेबी ने केवल पंजीकृत इकाइयों या ऐप के जरिए ही ट्रेडिंग करने की सलाह दी है।
सेबी ने जारी बयान में कहा कि सोशल मीडिया के बढ़ने से जानकारी शेयर करने और लोगों के साथ जुड़ने का तरीका बदल गया है। आजकल कुछ संस्थाएं सोशल मीडिया का इस्तेमाल भोले-भाले निवेशकों को लुभाने और धोखा देने के लिए कर रही हैं। ऐसी संस्थाएं निवेशकों का विश्वास जीतकर उन्हें अपने ऊपर भरोसा दिलाने के लिए रणनीतियों का उपयोग करती हैं। यह आमतौर पर संभावित ग्राहकों को व्हाट्सएप ग्रुप जैसे वीआईपी ग्रुप, फ्री ट्रेडिंग कोर्स आदि में शामिल होने के लिए लिंक के रूप में अनचाहे निमंत्रण भेजती हैं। इनके लिंक को ओपेन करना और उस पर रिस्पांस देना खतरनाक साबित हो गया है।
बाजार नियामक अनुसार सोशल मीडया पर एक्टिव ये सभी संस्थाएं अपना फर्जी प्रोफाइल बनाती हैं, जो उन्हें प्रतिभूति बाजार के विशेषज्ञ के रूप में प्रस्तुत करती है। यही नहीं, सोशल मीडिया पर कई बार ऐसी संस्थाएं सेबी में पंजीकृत बिचौलियों, प्रसिद्ध हस्तियों और स्थापित संगठनों के सीईओ या एमडी आदि का नाम इस्तेमाल करती हैं। इसके साथ ही बड़े मुनाफे का वादा करते हुए निवेशकों से पैसे अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करके फ्रॉड करती हैं। इसलिए सेबी ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे असत्यापित लोगों के ऐसे अनचाहे संदेशों पर बिल्कुल भी भरोसा न करें और ऐसे व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल होने से बचें।
बाजार नियामक ने निवेशकों को सलाह दी है कि केवल सेबी पंजीकृत बिचौलियों और ऑथेंटिक ट्रेडिंग ऐप के माध्यम से ही कारोबार करें। ट्रेडिंग करने से पहले सेबी की वेबसाइट पर जाकर इन ऐप की प्रमाणिकता की जांच अवश्य कर लें। अप्रैल के आखिर में भी सेबी ने निवेशकों को ओपिनियन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की थी, जिसमें बताया गया कि ये प्लेटफॉर्म सेबी के नियामक निरीक्षण के तहत काम नहीं करते और प्रतिभूति कानूनों के तहत निवेशकों को कोई सुरक्षा प्रदान नहीं करते हैं। यहां कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, जिन्हें 'ओपिनियन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म' के रूप में जाना जाता है, वे यूजर्स को 'हां या ना' के इवेंट के परिणामों पर ट्रेड करने की अनुमति देते हैं। इनकी बातों में आकर हम ज्योंही हां या ना में से कोई एक विकल्प चुनते हैं। उनकी गिरफ्त में आ जाते हैं।
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