नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जो 1 अगस्त से लागू होगा। इस घोषणा ने दोनों देशों के व्यापार संबंधों में एक नया मोड़ ला दिया है, जबकि भारत और अमेरिका के बीच पहले से ही व्यावसायिक संबंधों को लेकर कई मुद्दे उभरकर सामने आ रहे थे। राष्ट्रपति ट्रंप के बयान के अनुसार, अमेरिका का भारत के साथ व्यापार पिछले कई वर्षों में अपेक्षाकृत कम रहा है, और इसका एक प्रमुख कारण भारत द्वारा लगाए गए उच्च टैरिफ हैं, जिन्हें वह दुनिया में सबसे अधिक मानते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि भारतीय टैरिफ की वजह से अमेरिका को भारत के साथ व्यापार बढ़ाने में समस्या आई है। यह कदम व्यापार के लिए एक गंभीर चुनौती के रूप में देखा जा सकता है, क्योंकि 1 अगस्त से लागू होने वाला यह टैरिफ भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक आदान-प्रदान को प्रभावित करेगा। आंकड़ों के अनुसार, 2025 के अप्रैल-जून तिमाही में अमेरिका से भारत का निर्यात 22.8 प्रतिशत बढ़कर 25.51 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि भारत का आयात भी 11.68 प्रतिशत बढ़कर 12.86 अरब डॉलर हो गया। इस वृद्धि के बावजूद, व्यापार संबंधों में और सुधार की आवश्यकता बनी हुई है, जो ट्रंप के इस फैसले के बाद और अधिक जटिल हो सकती है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने केवल व्यापार पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि भारत और रूस के बीच सैन्य उपकरणों के व्यापार पर भी अपनी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत का रूस से सैन्य उपकरण खरीदने का सिलसिला सही नहीं है, खासकर जब वैश्विक स्तर पर रूस की यूक्रेन पर हमले को लेकर निंदा हो रही है। इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका भारत से अधिक से अधिक व्यापारिक सहयोग चाहता है, लेकिन कुछ मुद्दों पर दोनों देशों के दृष्टिकोण में अंतर है।
भारत सरकार ने अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के इस फैसले पर अपनी असहमति जताई है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि भारत हमेशा व्यापार के रास्ते खुला रखने और पारदर्शिता को प्राथमिकता देता है। साथ ही, भारतीय व्यापारियों का मानना है कि अमेरिका के इस कदम से दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते प्रभावित हो सकते हैं, और इससे भारतीय निर्यातकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। भारत के कई विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह कदम वैश्विक व्यापार पर नकारात्मक असर डाल सकता है, खासकर उन देशों के लिए जो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने के पक्षधर हैं। हालांकि, कुछ लोग इसे एक व्यापारिक रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं, जिसमें ट्रंप प्रशासन भारत को अपने टैरिफ में कमी करने के लिए दबाव बना रहा है।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों को सामान्य करने के लिए दोनों देशों को संयुक्त रूप से प्रयास करने होंगे। यदि भारत अपने टैरिफ को कम करने में सफल होता है, तो अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंध बेहतर हो सकते हैं। वहीं, अमेरिका को भी रूस से भारत के संबंधों को समझने और संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता होगी। अंततः, दोनों देशों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे एक दूसरे के व्यापारिक हितों को समझे और एक स्थिर एवं संतुलित व्यापार नीति को अपनाएं, ताकि वैश्विक व्यापार में बदलाव और उथल-पुथल का सामना करना पड़े। भारत और अमेरिका दोनों ही वैश्विक स्तर पर शक्तिशाली आर्थिक साथी हैं, और दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग का वातावरण महत्वपूर्ण है, ताकि व्यापारिक संबंध मजबूत बन सके और दोनों देशों के लिए लाभकारी परिणाम सामने आएं।
अन्य प्रमुख खबरें
Tariff पर Trump को सुप्रीम झटका, भारत को बड़ी राहत: 18% से घटकर 10% हुआ अमेरिकी शुल्क
RBI Report: रिकॉर्ड ऊंचाई पर भारत का विदेशी मुद्रा भंडार, 725.727 अरब डॉलर का ऐतिहासिक आंकड़ा पार
निवेशकों की आय बढ़ी, मुनाफा घटा: 13 तिमाहियों बाद Nifty 50 की कमाई में झटका
अमेरिका-ईरान तनाव से बाजारों में हलचल: सोना-चांदी चमके, डॉलर भी दमदार
Stock Market: बढ़त के साथ बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स ने लगाई लंबी छलांग, निफ्टी भी 25,800 के पार
वित्त वर्ष 2027 में ब्याज दरें स्थिर रख सकता है आरबीआई : रिपोर्ट
Gold Silver Price Today: सोना फिर हुआ धड़ाम, चांदी भी हुई सस्ती
सर्राफा बाजार में मिलाजुला रुखः सोने की कीमत 700 रुपये बढ़ी, चांदी में 2500 रुपये की गिरावट
RBI Digital Payment इंडेक्स 500 के पार, सितंबर 2025 में 516.76 पर पहुंचा डीपीआई
Indian Stock Market Crash: 800 अंक टूटा BSE Sensex, आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली