मुंबईः भारत की अर्थव्यस्था दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में चौथे नंबर की अर्थव्यवस्था बन चुकी है। इसका सबसे बड़ा कारण वाणिज्य और व्यापार से लेकर प्रौद्योगिकी व अन्य सेक्टर में तेजी है। भारतीय कॉरपोरेट जगत ने वित्त वर्ष 2025 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में 4-6 प्रतिशत की आय वृद्धि दर्ज की है। यह खुलासा क्रिसिल की एक नई रिपोर्ट में हुआ है, जिसमें बताया गया कि फार्मा, एयरलाइंस, कम्युनिकेशन, संगठित रिटेल और एल्युमीनियम सेक्टर ने इस वृद्धि में सबसे अहम भूमिका निभाई है।
जून तिमाही में फार्मा सेक्टर की आय में 9-11 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़त देखी गई, जो बीते 10 तिमाहियों में सबसे ऊंची है। इसका प्रमुख कारण घरेलू और निर्यात दोनों ही बाजारों में मजबूत मांग रही। अमेरिका और यूरोप से आई भारी मांग और जनरिक दवाओं की सप्लाई ने फार्मा कंपनियों को गति दी है।
देश में एयरलाइंस सेक्टर की आय में भी तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। आंकड़ों के अनुसार यात्री विमानों की उड़ान में इजाफा होने और एयरलाइंस से बेडे में नए विमानों के जुड़ने से एयरलाइंस की आय में 15 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। एयर ट्रैवल में सुधार, विशेषकर घरेलू उड़ानों की संख्या में बढ़ोत्तरी, इस सेक्टर को लगातार मजबूती दे रही है।
भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ में कम्युनिकेशन और एफएमसीजी सेक्टर का योगदान तेजी से बढ़ रहा है। महंगी सब्सक्रिप्शन योजनाओं और कम ऑपरेशनल खर्चों के चलते कम्युनिकेशन सेक्टर ने न केवल 12 प्रतिशत की आय वृद्धि दर्ज की, बल्कि 290-320 बेसिस पॉइंट्स का मार्जिन विस्तार भी हासिल किया। दूसरी ओर, ग्रामीण मांग में सुधार ने एफएमसीजी और ट्रैक्टर जैसे क्षेत्रों को 17 प्रतिशत की आय वृद्धि दिलाई।
हालांकि आईटी सेवाएं अभी भी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और टैरिफ विवादों के दबाव में हैं। परियोजनाओं में देरी से इस क्षेत्र की ग्रोथ सीमित रही। वहीं, चुनावी गतिविधियों और कम आधार प्रभाव के कारण ईपीसी क्षेत्र में भी 6 प्रतिशत की सीमित वृद्धि देखी गई। इस संबंध में क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पुशन शर्मा ने कहा कि हालांकि कुछ चुनौतियां रहीं, लेकिन ग्रामीण मांग की वापसी, बेहतर मॉनसून और निर्यात वृद्धि ने भारतीय कॉरपोरेट सेक्टर को मजबूती दी है। रिपोर्ट के अनुसार, दूसरी तिमाही में और अधिक सुधार की उम्मीद की जा रही है, विशेषकर जब वैश्विक अस्थिरताएं कम होंगी और घरेलू मांग में और तेजी आएगी।
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