POK में प्रेस पर पाबंदी, इंटरनेट भी बंद, पत्रकारों की स्थिति पर मीडिया संगठन ने जताई चिंता
खबर सार :-
पीओके में तनाव चरम पर है। कहा जा रहा है कि तीन पत्रकारों को पाकिस्तानी सेना ने हिरासत में ले लिया है। प्रेस स्वतंत्रता संगठन सीपीजे ने इन घटनाओं पर चिंता जताई है।
खबर विस्तार : -
न्यूयॉर्क: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सत्ता में बैठे लोगों और सुरक्षा बलों की बर्बरता का शिकार लगातार लोग हो रहे हैं। अभी तनाव चरम पर है। इसी बीच, स्वतंत्र पत्रकारों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक संगठन ने इस कब्जे वाले इलाके में मीडियाकर्मियों के लिए बिगड़ते हालात पर गहरी चिंता जताई है। बता दें कि पीओके में बिगड़ते हालातों पर भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से स्वतंत्र जांच की मांग की है।
संगठन ने इंटरनेट बंद करने, टेलीकम्युनिकेशन सेवाओं पर रोक, रिपोर्टिंग पर पाबंदी और पत्रकारों को हिरासत में लेने या अगवा करने जैसी घटनाओं का जिक्र किया है। प्रेस की आजादी पर नजर रखने वाली संस्था 'कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स' (CPJ) ने मांग की है कि पाकिस्तानी अधिकारी पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई तुरंत रोकें, जानकारी तक पहुंच बहाल करें और PoK में स्वतंत्र रिपोर्टिंग की इजाजत दें।
तीन कश्मीरी पत्रकार हिरासत में
PoK में पत्रकारों के खिलाफ जारी कार्रवाई का जिक्र करते हुए CPJ ने कहा, "स्वतंत्र कश्मीरी पत्रकार सैयद फरहाद अली शाह विरोध प्रदर्शनों की कवरेज के कारण हिरासत में हैं। 28 जुलाई को बाग जिले में भूख हड़ताल शुरू करने के बाद से उनकी हालत के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें तुरंत मेडिकल मदद मिले और उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।" CPJ ने आगे कहा, "पत्रकार राजी ताहिर और मुहम्मद सैफ 1 अगस्त से लापता हैं, जब उन्हें कथित तौर पर पुलिस की वर्दी पहने लोगों द्वारा ले जाया गया था। अगर वे सरकारी हिरासत में हैं, तो पाकिस्तानी अधिकारियों को यह जानकारी देनी चाहिए, कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए और उन्हें तुरंत रिहा करना चाहिए।"
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PoK से रिपोर्टिंग के बाद कुछ वेबसाइट्स ब्लॉक
CPJ ने कई सोशल मीडिया यूजर्स के दावों का भी जिक्र किया कि 1 अगस्त को PoK से रिपोर्टिंग के बाद पाकिस्तान में कुछ अंतरराष्ट्रीय ब्रॉडकास्टर्स की वेबसाइट्स को ब्लॉक कर दिया गया है। संगठन ने प्रेस की आजादी, इंटरनेट पर पाबंदियों और स्वतंत्र जानकारी तक जनता की पहुंच के अधिकार पर लगी रोक को लेकर चिंता जताई है। पाकिस्तान में कई यूजर्स ने बताया है कि वे अल जजीरा को एक्सेस नहीं कर पा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 5 जून से PoK में "आंशिक इंटरनेट ब्लैकआउट और टेलीकम्युनिकेशन पर पाबंदियां" लागू हैं।
सेना की कार्रवाई में 50 से ज्यादा लोगों की मौत
PoK में अशांति का माहौल है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि पिछले कुछ दिनों में पाकिस्तानी बलों की बर्बर कार्रवाई में 50 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं। आशंका है कि असल आँकड़ा इससे कहीं ज्यादा हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया वेबसाइट्स पर कथित पाबंदियों के साथ-साथ इंटरनेट और मीडिया कवरेज से जुड़े मुद्दों ने राजनीतिक अस्थिरता के दौर में पारदर्शिता, प्रेस की आजादी और जानकारी के आजाद प्रवाह पर बहस को और तेज कर दिया है।
5 जून से अब तक 100 से ज्यादा लोगों की मौत
कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो में PoK के कोटली इलाके में एक शांतिपूर्ण रैली के दौरान पुलिस द्वारा गोलीबारी किए जाने के बाद महिला प्रदर्शनकारियों को अपनी जान बचाने के लिए भागते हुए दिखाया गया। रावलाकोट, मीरपुर और कब्ज़े वाले इलाके के दूसरे हिस्सों समेत पूरे क्षेत्र में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई आम नागरिकों की जान गई है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। गहरी चिंता जाहिर करते हुए स्थानीय संगठनों ने कहा है कि 5 जून से अब तक 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, कई सौ लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर सैकड़ों लोगों को गायब कर दिया है।
चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद से बढ़े विरोध-प्रदर्शन
ये विरोध प्रदर्शन इलाके को शोषण से बचाने के लिए किए जा रहे हैं। लोग अपने इलाके की अनदेखी से बहुत नाराज हैं। PoK में चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद से विरोध प्रदर्शनों ने और जोर पकड़ लिया है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, चुनावों में कथित धांधली के कारण सत्ताधारी गठबंधन के भीतर दरारें बढ़ गई हैं, जिससे पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) और पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के बीच तनाव बढ़ गया है।
PPP ने PML-N पर लगाया चुनावों में धांधली का आरोप
PPP ने PML-N पर चुनावों में धांधली करने और पाकिस्तान सेना के साथ मिलीभगत करने का आरोप लगाया है। प्रदर्शनकारियों और विपक्ष का यह भी आरोप है कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर PoK पर अपना नियंत्रण और मजबूत करने के लिए अपने पसंदीदा राजनेताओं को सत्ता में बिठाना चाहते हैं।
बिजली की दरों और महंगाई के खिलाफ विरोध
इस आंदोलन के केंद्र में 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) है। व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और सिविल सोसाइटी समूहों से बना यह गठबंधन बिजली की दरों और खाने-पीने की चीज़ों की कीमतों से लेकर सरकारी सेवाओं और राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक के मुद्दों पर राहत की मांग के लिए एकजुट हुआ है।
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