POK में हालात तनावपूर्ण, प्रदर्शनकारियों पर आधी रात को सुरक्षा बलों ने चलाई गोलियां

खबर सार :-

पीओके में हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षा बल लगातार इलाके में गोलियां चला रहे हैं। कहा जा रहा है कि सुरक्षा बलों ने आधी रात को प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं।
POK में हालात बेकाबू, प्रदर्शन से बेनकाब हुई पाक सरकार और मुनीर सेना

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। पुलिस प्रशासन प्रदर्शनकारियों को काबू में करने में नाकाम रहा है। रविवार देर रात, सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की।

PoK से मिली खबरों के मुताबिक, सुरक्षा बलों ने आधी रात को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एक ऑपरेशन शुरू किया। स्थानीय मीडिया ने बताया कि रावलकोट में गोलीबारी हुई। इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक सूत्र ने बताया कि गोलीबारी की खबर तब सामने आई जब बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए थे। पिछले 50 दिनों से विरोध स्थलों पर महिलाएं और बच्चे मौजूद हैं और रविवार को उनकी संख्या और बढ़ गई थी।

सेना की कार्रवाई में 40 की मौत

पाकिस्तान PoK के लोगों की मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रहा है। उनकी चिंताओं को दूर करने के बजाय, वह इस इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात कर रहा है। एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक 40 लोग मारे जा चुके हैं। नाम न बताने की शर्त पर सूत्र ने कहा, "आशंका है कि हताश पाकिस्तान स्थानीय आबादी में दहशत फैलाने के लिए महिलाओं और बच्चों को निशाना बना सकता है। वे विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं, और अगर ऐसा होता है, तो इससे पैदा होने वाली मानवीय त्रासदी अकल्पनीय हो सकती है।"

चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद से बढ़े विरोध-प्रदर्शन

ये विरोध प्रदर्शन इलाके को शोषण से बचाने के लिए किए जा रहे हैं। लोग अपने इलाके की अनदेखी से बहुत नाराज हैं। PoK में चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद से विरोध प्रदर्शनों ने और ज़ोर पकड़ लिया है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, चुनावों में कथित धांधली के कारण सत्ताधारी गठबंधन के भीतर दरारें बढ़ गई हैं, जिससे पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) और पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के बीच तनाव बढ़ गया है।

PPP ने PML-N पर लगाया चुनावों में धांधली का आरोप

PPP ने PML-N पर चुनावों में धांधली करने और पाकिस्तान सेना के साथ मिलीभगत करने का आरोप लगाया है। प्रदर्शनकारियों और विपक्ष का यह भी आरोप है कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर PoK पर अपना नियंत्रण और मजबूत करने के लिए अपने पसंदीदा राजनेताओं को सत्ता में बिठाना चाहते हैं। पाक सरकार और मुनीर की सेना की पोल खुली।

इस्लामाबाद और POK के तनावपूर्ण रिश्ते उजागर

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालिया अशांति ने इस्लामाबाद और इस इलाके के बीच तनावपूर्ण रिश्तों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। PoK में हफ्तों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों, गिरफ्तारियों और पाबंदियों के बाद प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें हुईं। 

सेना के दमनकारी तरीकों से भड़का विद्रोह

सरकार ने बार-बार कम्युनिकेशन नेटवर्क काटे, प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया, प्रदर्शनों में बाधा डाली और बड़े पैमाने पर बल प्रयोग के लिए सेना को तैनात किया। पाकिस्तान सेना की इस दमनकारी नीति ने जनता के गुस्से को हवा दी और विद्रोह की आग भड़का दी। हालांकि, यह साफ है कि यह टकराव और नाराजगी किसी एक वजह से नहीं, बल्कि कई वजहों से पैदा हुई है।

बिजली की दरों और महंगाई के खिलाफ विरोध

इस आंदोलन के केंद्र में 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) है। व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और सिविल सोसाइटी समूहों से बना यह गठबंधन बिजली की दरों और खाने-पीने की चीज़ों की कीमतों से लेकर सरकारी सेवाओं और राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक के मुद्दों पर राहत की मांग के लिए एकजुट हुआ है।

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आजीविका की चिंताओं से विद्रोह तक

ध्यान देने वाली बात यह है कि यह आंदोलन कश्मीर को लेकर भारत-पाकिस्तान के पारंपरिक टकराव से पैदा नहीं हुआ; बल्कि यह रोज़मर्रा के कामकाज और संसाधनों तक पहुंच जैसे मुद्दों के इर्द-गिर्द विकसित हुआ। इस्लामाबाद का लगातार दमनकारी रवैया अब इन शिकायतों को सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के तौर पर पेश कर रहा है, जिससे राजनीतिक बातचीत की गुंजाइश और कम हो रही है।

PoK से होकर गुजरता है चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर

यह इलाका इस्लामाबाद के इंफ्रास्ट्रक्चर लक्ष्यों और चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के जरिए इस क्षेत्र में बीजिंग की आर्थिक मौजूदगी से तेज़ी से जुड़ रहा है। नतीजतन, मौजूदा अशांति एक बड़ी दुविधा को उजागर करती है: इंफ्रास्ट्रक्चर किसी क्षेत्र की आर्थिक और रणनीतिक अहमियत को बढ़ा सकता है, लेकिन अक्सर ऐसा यह तय किए बिना होता है कि उस अहमियत का इस्तेमाल कैसे किया जाए या इस प्रक्रिया में स्थानीय लोगों को कोई सार्थक भूमिका दी जाए।

झेलम नदी पाकिस्तान की ऊर्जा योजना के लिए अहम 

इस क्षेत्र से बहने वाली झेलम नदी ने पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (PoK) को पाकिस्तान की ऊर्जा रणनीति के लिए अहम बना दिया है, जबकि चीनी निवेश ने इस अहमियत में एक और आयाम जोड़ दिया है। चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के तहत, पनबिजली परियोजनाओं ने इस क्षेत्र को इस्लामाबाद और बीजिंग के बीच एक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर सहयोग से जोड़ दिया है।

FAQ

1. चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर क्या है?

चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) लगभग 60 अरब डॉलर का एक विशाल सड़क और ऊर्जा प्रोजेक्ट है जो चीन के शिनजियांग प्रांत को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से जोड़ता है। यह कॉरिडोर पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (PoK) और गिलगित-बाल्टिस्तान से होकर गुजरता है।

2. पीओके में विरोध-प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं?

बुनियादी संसाधनों के अभाव से जूझ रहे पीओके में पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। 

 

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