बांग्लादेश ट्रिब्यूनल ने 7 नेताओं को सुनाई सजा-ए-मौतः अवामी लीग बोला, फैसला एकतरफा और मनगढ़ंत
खबर सार :-
बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के समय अवामी लीग के कई नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। इनमें सात के खिलाफ मौत की सजा सुनाई गई है।
खबर विस्तार : -
ढाकाः बांग्लादेश की राजनीतिक पार्टी अवामी लीग के 7 पार्टी नेताओं को इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल ने मौत की सजा सुनाई है। पार्टी ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया है। लीग ने कहा कि यह एकतरफा और पक्षपातपूर्ण फैसला है। इसमें मनगढ़ंत और बेबुनियाद आरोप लगाए गए हैं।
पार्टी ने आरोप लगाया है कि तथाकथित फैसला राजनीतिक विरोधियों के दबाव में लिया गया है। उनकी साजिश में कानून-व्यवस्था बंधक बनी हुई है। न्यायपालिका को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। बांग्लादेश की स्थानीय मीडिया में छपी रिपोर्ट कहती है कि मंगलवार को अवामी लीग के महासचिव ओबैदुल कादर और पार्टी के छह अन्य नेताओं को जुलाई 2024 के दौरान हुए विद्रोह से जुड़े मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी माना गया है। यह आरोप लगाकर पार्टी के नेताओं पर ट्रिब्यूनल ने सजा ए मौत सुनाई है। अवामी लीग ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय आपराधिक कानून का बुनियादी नियम होता है कि वह आरोपी व्यक्ति को कानून सुरक्षा और मन पसंद वकील चुनने का अधिकार दे। लेकिन अदालत ने इन गारंटियों की भी अनदेखी की है।
बदले की भावना पर हो रही है कार्रवाई
मौजूदा ट्रिब्यूनल ने नियमों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। आरोप है कि ट्रिब्यूनल में न्याय प्रक्रिया पंगु बनी हुई है। इसने जल्दबाजी करते हुए अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक कानून के बुनियादी सिद्धांतों की धज्जियां उड़ा दीं। पार्टी का आरोप है कि इस तरह करके राजनीतिक बदले की भावना को बढ़ावा दिया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि 5 अगस्त 2024 के बाद से अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन किया जा रहा हैं। बता दें कि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के समय मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली पिछली अंतरिम सरकार के दौरान देश में जमकर उत्पात और हिंसा हुई थी। यह सरकार केवल अग्रिम सरकार के गठन तक एक व्यवस्था के तौर पर बनाई गई थी। यह चुनी हुई सरकार नहीं थी, लेकिन मोहम्मद यूनुस ने अपनी महत्वाकांक्षा के चलते कानून का उल्लंघन कर राज करने की कोशिश की।
दबाव में काम कर रही हैं अदालतें
अवामी लीग का कहना है कि यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम व अलोकतांत्रिक शासन था, जिसने कानून और संवैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन किया। उसने अध्यादेश के जरिए 1973 के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल एक्ट में संशोधन किया। तत्कालीन सरकार में अवामी लीग के नेताओं के खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई की गई।
बांग्लादेश में कई ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं, जिनके बारे में जानकारी दी गई है कि जिस व्यक्ति को मामले में आरोपी बनाया गया है, वह घटना के समय जेल में था। ऐसा मामला भी इस समय अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में है। अवामी लीग ने कहा है कि मोहम्मद यूनुस की सरकार ने राजनीतिक बदला लेने के लिए गैरकानूनी तरीके से अभियोजन और न्यायिक पैनल बनाए। इस पैनल में साजिश के तहत बांग्लादेश अवामी लीग के नेताओं पर बेबुनियाद और गैरकानूनी मामले दर्ज किए हैं।
बड़े पैमाने पर भड़क सकती है हिंसा
पार्टी ने इस मामले में चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि मौत की सजा से बड़े पैमाने पर हत्याओं का दो साल पुराना सिलसिला फिर भड़क सकता है। उन्होंने कहा कि मोहम्मद यूनुस की सरकार में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। पहले से ही हजारों लोग जेलों में बंद हैं। अवामी लीग ने आरोप लगाया है कि बांग्लादेशी अधिकारियों ने 2024 जुलाई-अगस्त प्रदर्शनों से जुड़ी हत्या और मौत के मामलों में दिखावटी कार्रवाई की हैं, जबकि लूट की खुली आजादी थी। यह फैसला लोकतंत्र के लिए झटका है। जो लोग पहले ही जुलाई-अगस्त की हिंसा से पीड़ित हैं, उनके लिए यह साफ संकेत है कि उनसे न्याय पाने का अधिकार पूरी तरह छीना जा रहा है।
खतरनाक लोगों को जेल से निकाला गया
पार्टी ने आरोप लगाया है कि तत्कालीन यूनुस सरकार में जमीनी स्तर पर हजारों कार्यकर्ताओं के घरों और कारोबारों को लूट लिया गया। उनके घरों में तोड़फोड़ की गई। शुरुआत से ही उन पर मुकदमे थोपे गए। यही नहीं, वकीलों पर भी भीड़ द्वारा हमला किया गया। अदालतों के अंदर भी हिंसा और उपद्रव के साथ उत्पीड़न जारी रहा। आरोप है कि सैकड़ों ऐसे लोगों को जेल से बाहर कर दिया गया है, जो खतरनाक हैं और कई मामलों में दोषी भी हैं। पार्टी का कहना है कि ये लोग दुनिया के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं।
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