बांग्लादेशः चिन्मय कृष्ण दास की मां ने त्यागे प्राण, पैरोल न मिलने से रहती थी परेशान
खबर सार :-
बांग्लादेश के हिंदू अधिकार नेता चिन्मय कृष्ण दास की मां ने गुरुवार को अंतिम सांस ली। इसी के साथ उनकी बेटे को देखने की ख्वाहिश उनके साथ ही चली गई।
खबर विस्तार : -
ढाका, बांग्लादेश के प्रमुख हिंदू अधिकार नेता चिन्मय कृष्ण दास की मां का गुरुवार को निधन हो गया। बेटे को जेल से बाहर देखने कही उनकी इच्छा उनके साथ ही चली गई। जेल प्रशासन पैरोल पर रिहा करने से इनकार करता रहा। चिन्मय कृष्ण दास की मां बेटे की सजा के कारण अंदर से टूट चुकी थी।
पुंडरीक धाम आश्रम में 71 वर्षीय संध्या रानी धर का निधन
गुरुवार सुबह चटगांव जिले के हथजारी उपजिले में स्थित श्री श्री पुंडरीक धाम आश्रम में 71 वर्षीय संध्या रानी धर का निधन हो गया। उस आश्रम में मंगलवार को खुद उन्होंने जाने की इच्छा जताई थी। जिस आश्रम में उनका बेटा लंबे समय से रह रहा था। प्रमुख हिंदू अधिकार नेता चिन्मय कृष्ण दास की मां कैंसर से पीड़ित थी। उनकी पिछले दिनों तबीयत खराब हुई थी। बीमार पड़ने पर उन्हें चटगांव के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस मामले में बांग्लादेश के बंगाली अखबार ने रिपोर्ट प्रकाशित की है। इसमें कहा गया है कि चिन्मय की मां अस्पताल में नहीं रहना चाहती थीं।
अपनी जिंदगी के आखिरी दिन अपने बेटे के आश्रम में बिताना चाहती थीं। चिन्मय के छोटे भाई ने अपनी मां के निधन की पुष्टि की है। दास के भाई अंजन कुमार धर ने रुंधे गले से बताया कि मेरी मां चली गईं। अपने आप को साहस देकर कहा कि मेरा भाई अपनी मां को जीवित रहते देख भी नहीं सका।आगे की कार्रवाई के लिए भाई रंजन कुमार धर ने कहा कि वह अब अपनी मां का शव लेकर हथजारी उपजिला हेल्थ कॉम्प्लेक्स जा रहे हैं।
अंतिम संस्कार हथजारी के पुंडरीक धाम में किया जाएगा
वह वहां से अपनी मां का मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाकर अपने भाई चिन्मय कृष्ण दास की पैरोल पर रिहाई के लिए आवेदन करने जाएंगे। उनकी मां का अंतिम संस्कार हथजारी के पुंडरीक धाम में किया जाएगा। बताया जाता है कि चिन्मय की मां बेटे की लंबी जेल की सजा के कारण मानसिक रूप से टूट गई थीं। उनको जब से बेटे की बीमारी की जानकारी हुई, वह शारीरिक दिक्कतों में घिरती चली गई। जमानत कई बार नामंजूर होना भी एक बड़ी मुसीबत बन गई। पैरोल पर नियम थोपे जा रहे थे। इस कारण जेल से बाहर आ पाना मुश्किल होता गया।
हालिया सुनवाई के बाद अपने बेटे की रिहाई की उम्मीद थी, लेकिन अदालत ने उसे भी नामंजूर कर दिया। बुधवार को भी दास के परिवार वाले चटगांव के डिप्टी कमिश्नर और जेल प्रबंधन समिति के पदेन अध्यक्ष मोहम्मद जाहिदुल इस्लाम मिया से मिले थे। उनको अपनी मां की बीमारी की जानकारी देकर आवेदन सौंपा था। इसमें बीमार मां से मिलने के लिए सशर्त पैरोल की मांग की थी। यही नहीं, चटगांव के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट सैयद महबूबुल हक ने पैरोल की मांग पर यह कहकर खारिज कर दी कि बीमारी के चलते पैरोल का कोई प्रावधान नहीं है।
25 नवंबर 2024 को ढाका में दास को गिरफ्तार किया गया था
उन्होंने किसी रिश्तेदार की मृत्यु होने पर पैरोल के प्रावधान का तर्क सुनाया। बांग्लादेशी दैनिक समकाल ने इस मसले पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। उसके अनुसार, प्रशासन ने परिवार को बताया था कि किसी बीमार रिश्तेदार से मिलने के लिए कैदी को पैरोल देने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बाद उनका परिवार काफी उदास रहा। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश सम्मिलित सनातन जागरण जोत के प्रवक्ता चिन्मय कृष्ण दास को दो मामलों में जमानत मिल गई थी।
उन पर कई मामले लगाए गए थे। इन पर दो अन्य मामलों के कारण रिहाई रुकी रही। 25 नवंबर, 2024 को ढाका में दास को गिरफ्तार किया गया था। चट्टोग्राम की अदालत से जमानत याचिका खारिज होने पर अगले दिन ही उन्हें जेल भेजा गया। यहां यह जानना जरूरी है कि अदालत में मुकदमा की पैरवी कर रहे वकील का कहना है कि जिस मामले में हत्या का आरोप है, चिन्मय हत्या के पहले से जेल में हैं।
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