पाकिस्तानी बच्चों में घुटन: एक साल में 15 लाख यौन शोषण या दुर्व्यवहार का शिकार!
खबर सार :-
पाकिस्तान की कलंक कथा अब दुनिया के सामने है। हर सोलह में एक बच्चा घुटन में जी रहा है। एक साल में 15 लाख यौन शोषण या दुर्व्यवहार के शिकार हुए हैं।
खबर विस्तार : -
इस्लामाबाद, पाकिस्तान में बच्चों के साथ की कलंक कथा से दुनिया को हैरानी जरूर होगी। यहां जिस तरह से 12 साल से 17 साल के बच्चों और किशोरों के साथ यौन शोषण और दुर्व्यवहार की जानकारियां सार्वजनिक हो रही हैं, वह वास्तव में चिंताजनक है। यूनिसेफ की सर्वे आधारित रिपोर्ट उन व्यक्तियों के लिए आगाह है जिनके बच्चे तनिक भी इंटरनेट की जानकारी रखते हैं।
यूनिसेफ पाकिस्तान में बच्चों के शोषण पर चिंतित
रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान में 12 से 17 साल की उम्र के लगभग 15 लाख इंटरनेट यूजर हैं, जो टेक्नोलॉजी के जरिए एक साल में यौन शोषण या दुर्व्यवहार के शिकार हुए हैं। आंकड़े बता रहे हैं कि 16 में से करीब एक बच्चे ने इस घुटन को झेला है। यूनिसेफ ने पाकिस्तान में बच्चों के ऑनलाइन शोषण को लेकर फिक्र जाहिर की है। यह नतीजे डिसरप्टिंग हार्म इन पाकिस्तान पर आधारित है। यह कोई तकनीकी शाफ्टवेयर नहीं है। यह एक शोध आधारित सर्वे है। इसमें बताया गया है कि 85 फीसदी मामलों में ब्लैकमेलिंग, एआई का इस्तेमाल करने वाले अजनबी नहीं बल्कि परिचित ही होते हैं। अपनी लाज बचाने के लिए बच्चे मुुंह भी नहीं खोलते हैं।
शोध से पाकिस्तान के बच्चों की दुर्गति उजागर हो रही हैै। रिपोर्ट ने उस दिशा की ओर ध्यान खींचा है, जिधर कड़ा कानून बनाया जाना चाहिए। उत्पीड़न करने वालों को तत्काल कठोर सजा का बंदोबस्त किया जाना चाहिए। कुछ नाम ऐसे भी सामने आए हैं जिन पर ध्यान दिया जाना चाहिए। पूरे पाकिस्तान की हालत यही है। बदनामी के डर से 75 फीसदी बच्चों ने किसी को बताया भी नहीं। यूनिसेफ ने पाकिस्तान में बच्चों के ऑनलाइन शोषण को कहा कि आंकड़ों के मुताबिक 16 में से करीब एक बच्चे ने इस ज्यादती को झेला है। तथय एविडेंस ऑन टेक्नोलॉजी-फैसिलिटेटेड चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लॉइटेशन नाम की हालिया रिपोर्ट से मिले हैं।
अपनी लाज बचाने के लिए बच्चे मुंह नहीं खोलते
इसे यूनिसेफ के सहयोग से परखा गया। यूनिसेफ के अनुसार, यह स्टडी 12-17 साल के बच्चों और उनके माता-पिता तथा बच्चों की देखभाल करने वालों के राष्ट्रीय स्तर पर लिए इंटरव्यू पर आधारित थी। इसमें पाकिस्तान में टेक्नोलॉजी के जरिए बच्चों के यौन शोषण पर चिंता व्यक्त की गई। यह रिसर्च कहती है कि बच्चों को खुलकर बोलने से रोेकना मुसीबत में डालने जैसा है। मदद के लिए मुश्किलें और कठिन प्रक्रिया के साथ भावनात्मक लगाव आदि पर चिंता करते हुए व्यवस्थाएं बदलनी पड़ेंगी।
लड़के और लड़कियों का बराबर होता है शोषण
ईसीपीएटी इंटरनेशनल के जस्टिस एंड चाइल्ड राइट्स की प्रोग्राम हेड एंड्रिया वरेला का कहना था कि पाकिस्तान में लड़कियों और लड़कों, दोनों का ही टेक्नोलॉजी के जरिए यौन शोषण और दुर्व्यवहार होता है। रिपोर्ट के अनुसार, उनके अनुभव अलग हो सकते हैं, लेकिन उत्पीड़न समान होता है। जो मामले दर्ज किए गए हैं, उनमें अनुचित आचरण के तरीके हैं। उनमें अनचाही यौन तस्वीरें और बातचीत करने का दबाव दिया जाता है। उनसे निजी अंगों की तस्वीरें शेयर करने की मांग की जाती और उनकी मर्जी के बिना उनकी तस्वीरें शेयर कर दी जाती हैं।
वीडियो, ब्लैकमेलिंग एवं तकनीकी इस्तेमाल की
वीडियो, ब्लैकमेलिंग एवं तकनीकी सुविधाएं भी इस्तेमाल की जाती हैं। पाकिस्तान में यूनिसेफ की प्रतिनिधि पर्निले आयरनसाइड ने कहा कहा है कि डिजिटल दुनिया में बच्चों को सुरक्षित जगह मिलनी चाहिए। उनका कहना था कि हम सिर्फ बच्चों को सिर्फ जोखिमों से बचने के लिए कहते रहते हैं, जबकि एक मजबूत सिस्टम बनाने की जरूरत है। ऐसा सिस्टम बने जो दुर्व्यवहार को रोके और दोषियों व डिजिटल प्लेटफॉर्म को जवाबदेह ठहराएं। रिपोर्ट में इस बात पर हैरानी की गई कि पाकिस्तान में टेक्नोलॉजी के जरिए यौन शोषण और दुर्व्यवहार का शिकार हुए बच्चों में आधे से ज्यादा ने किसी को नहीं बताया। सर्वे में शामिल किया गया बच्चा हेल्पलाइन, सोशल वर्कर और पुलिस जैसे औपचारिक माध्यमों को भी अपनी पीड़ा नहीं बताई।
पाकिस्तान की पुलिस पर नहीं करते भरोसा
इसका कारण रहा समुदाय का कलंक। ज्यादातर मामलों में पीड़ित को दोषी ठहराना और पुलिस पर भरोसे की कमी इसके लिए जिम्मेदार हैं। इन बाधाओं के कारण ही बच्चों और उनके परिवारों को खुलकर बात करने की इजाजत नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पूरे पाकिस्तान में बच्चों के लिए मदद और सहायता पाने के सुरक्षित, गोपनीय और सुलभ माध्यमों की जरूरत है। यूनिसेफ ने मांग की है कि पाकिस्तान में बच्चों के लिए ऑनलाइन और असल जिंदगी में सुरक्षित माहौल बनाने के लिए सरकार को कानून बनाने की जरूरत है। ऐसे अपराध रोकथाम, सुरक्षा व प्रतिक्रिया को मजबूत करने के लिए सरकार, कानून लाए और एजेंसियों के जरिए उनको कड़ाई से लागू कराए। न्याय और सामाजिक सेवाओं के साथ-साथ समुदायों, स्कूलों, परिवारों और डिजिटल प्लेटफॉर्म को एक साथा आना होगा।
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