DRC में इबोला से बिगड़े हालात, समुदायों में बढ़ रही मौतें; अब तक 3,226 लोगों की जान गई
खबर सार :-
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला की स्थिति गंभीर होती जा रही है। WHO के अनुसार, संक्रमण का फैलाव एक जैसा नहीं है। वहीं, समुदायों में मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है।
खबर विस्तार : -
किन्शासा: डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला का प्रकोप तेजी से बदल रहा है और अलग-अलग जगहों पर इसके अलग-अलग रूप देखने को मिल रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, प्रभावित प्रांतों और स्वास्थ्य क्षेत्रों में संक्रमण का फैलाव एक जैसा नहीं है; जहां कुछ इलाकों में मामले कम हो रहे हैं, वहीं दूसरी जगहों पर संक्रमण बढ़ रहा है और नए इलाकों में फैल रहा है।
मंगलवार (स्थानीय समय) को जारी रिपोर्ट में कहा गया है, "हालात बताते हैं कि महामारी अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग तरह से आगे बढ़ रही है। जहां कुछ जगहों पर संक्रमण की रफ्तार धीमी हो रही है, वहीं दूसरी जगहों पर यह तेजी से बढ़ रहा है और नए इलाकों में फैल रहा है।" रिपोर्ट में एक चिंताजनक बात यह बताई गई है कि स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचने से पहले ही समुदाय के भीतर मरने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है।
समुदाय में बढ़ रही मौतों की संख्या
शिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, 31 अगस्त से 6 सितंबर के बीच, पुष्टि हुई सभी मौतों में से 75 प्रतिशत मौतें समुदाय के भीतर हुईं। यह इस अवधि के दौरान दर्ज किया गया सबसे ज्यादा साप्ताहिक अनुपात है; दो हफ्ते पहले यह आंकड़ा 56.6 प्रतिशत था। रिपोर्ट में कहा गया है, "यह अंतर चिंताजनक है क्योंकि इलाज केंद्रों पर होने वाली मौतों में लगातार कमी के बावजूद, समुदाय में होने वाली मौतों की संख्या बढ़ रही है। इससे पता चलता है कि कुल मृत्यु दर में पहले देखी गई कमी बरकरार नहीं रही है।"
जागरूकता में कमी भी मौतों की वजह
WHO ने समुदाय में होने वाली मौतों की लगातार ज्यादा संख्या के कई संभावित कारण बताए हैं। इनमें बीमारी का देर से पता चलना, मामलों की देर से सूचना मिलना, मरीजों को समय पर इलाज केंद्रों तक न पहुंचा पाना, बीमारी की गंभीरता के बारे में लोगों में समझ की कमी, दूर-दराज के इलाकों और परिवहन से जुड़ी चुनौतियां, स्थापित स्वास्थ्य केंद्रों के बजाय अनौपचारिक जगहों पर इलाज करवाना और स्वास्थ्य सेवाओं में लोगों के भरोसे की कमी शामिल हैं।
'एर्वेबो' (Ervebo) वैक्सीन पर अध्ययन
वैक्सीन के बारे में बात करें तो, जेरे इबोला वायरस के खिलाफ इस्तेमाल होने वाली लाइसेंस-प्राप्त 'एर्वेबो' (Ervebo) वैक्सीन पर अभी अध्ययन किया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या यह मौजूदा बुंडिबुग्यो (Bundibugyo) स्ट्रेन से भी सुरक्षा प्रदान कर सकती है। इस बीच, 'खास मानवीय आधार पर इस्तेमाल' (compassionate use) की व्यवस्था के तहत, जिसमें महामारी जैसी स्थिति में ऐसी वैक्सीन का इस्तेमाल किया जा सकता है जिन्हें अभी पूरी तरह मंजूरी नहीं मिली है या जिनका सीमित परीक्षण हुआ है।
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संक्रमण से 47 हेल्थ वर्करों की गई जान
27 अगस्त से फ्रंटलाइन हेल्थ वर्करों और जोखिम वाले लोगों का टीकाकरण शुरू हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, 6 सितंबर तक कुल 2,007 हेल्थ वर्करों और अन्य फ्रंटलाइन कर्मचारियों को टीका लगाया जा चुका था। उस तारीख तक, इबोला के 6,686 कन्फर्म मामले और 3,226 कन्फर्म मौतें दर्ज की गई थीं। कन्फर्म और संभावित मामलों को मिलाकर मृत्यु दर 48.3 प्रतिशत थी। हेल्थ वर्करों में संक्रमण भी एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है; अब तक 167 हेल्थ वर्कर संक्रमित हो चुके हैं, जिनमें से 47 की मौत हो चुकी है।
देश के इतिहास में सबसे बड़ी महामारी घोषित
WHO ने DRC के भीतर इसके और फैलने के जोखिम को 'बहुत ज्यादा' आंका है, जबकि पड़ोसी देशों के लिए जोखिम का स्तर 'ज्यादा' माना गया है। 18 अगस्त को इंटरनेशनल हेल्थ रेगुलेशंस (IHR) की इमरजेंसी कमेटी की दूसरी बैठक के दौरान, इस बात पर जोर दिया गया कि 'यह प्रकोप अभी नियंत्रण से बहुत दूर है' और यह अंतरराष्ट्रीय चिंता की पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी बना हुआ है। मई में घोषित यह प्रकोप अब देश के इतिहास में इबोला की सबसे बड़ी और सबसे घातक महामारी बन गया है। यह दुनियाभर में इबोला का दूसरा सबसे बड़ा प्रकोप भी है; इससे बड़ा एकमात्र प्रकोप 2014 और 2016 के बीच पश्चिम अफ्रीका में फैली इबोला महामारी थी।
FAQ
1. इबोला क्या है?
इबोला एक दुर्लभ, गंभीर और अक्सर जानलेवा बीमारी है जो इबोला वायरस से होती है। इसे इबोला वायरल हेमोरेजिक फीवर के नाम से भी जाना जाता है।
2. इबोला कैसे फैलता है?
इबोला वायरस मुख्य रूप से संक्रमित जानवरों से इंसानों में और उसके बाद शरीर के तरल पदार्थों के सीधे संपर्क के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है।
3. क्या यह संक्रमण हवा, पानी या मच्छरों के काटने से भी फैलता है?
नहीं, संक्रमण यह हवा, पानी या मच्छर के काटने से नहीं फैलता है।
4. कांगो में इबोला संक्रमण फैलने के क्या कारण हैं?
कांगो में हाल ही में फैला संक्रमण जूनोटिक कारणों (जानवरों से इंसानों में फैलने) और 'बुंडीबुग्यो' (Bundibugyo) नाम के एक दुर्लभ और खतरनाक स्ट्रेन की वजह से फैल रहा है।
5. इबोला संक्रमण के लिए क्या कोई वैक्सीन उपलब्ध है?
इबोला वायरस की कई अलग-अलग प्रजातियां हैं। कुछ खास तरह के वायरस के लिए वैक्सीन उपलब्ध हैं; उदाहरण के लिए, जैरे इबोलावायरस (Zaire ebolavirus) प्रजाति से बचाव के लिए 'एर्वेबो' (Ervebo) वैक्सीन उपलब्ध है और इसे मंजूरी भी मिली हुई है। लेकिन, सूडान वायरस, बुंडिबुग्यो वायरस या ताई फाॅरेस्ट वायरस जैसी अन्य प्रजातियों से होने वाले इबोला संक्रमण के लिए कोई लाइसेंस-प्राप्त वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।
6. इबोला वायरस के ये हैं प्रमुख लक्षण क्या हैं?
इबोला वायरस के लक्षण संक्रमण के 2 से 21 दिनों के भीतर अचानक दिखाई देते हैं। शुरुआती लक्षणों में उल्टी, कान, नाक या मुंह से खून आना, पेट में दर्द, शरीर में कमजोरी या फ्लू का महसूस होना, शरीर के हिस्सों में दर्द महसूस होना और शरीर के अंगों पर दानें निकल आना शामिल हैं।
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