कांगो में स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा इबोला का असर, बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित, अब तक 330 मौतें
खबर सार :-
DRC में इबोला वायरस का प्रकोप बढ़ रहा है। यूनिसेफ के अनुसार, इस संक्रमण का असर अन्य स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है। बच्चों की मृत्यु दर व्यस्कों की तुलना में दोगुनी से अधिक है।
खबर विस्तार : -
किंशासा: डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला वायरस का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। देश के स्वास्थ्य अधिकारियों की ताजा जानकारी के अनुसार, अब तक 4,053 लोगों में इबोला की पुष्टि हुई है और इससे 1,850 लोगों की मौत हो चुकी है।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, अभी 694 मरीज आइसोलेशन में हैं या अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं, जबकि 793 लोग ठीक होकर घर लौट चुके हैं। हालांकि, पूर्वी DRC में स्थिति को विशेष रूप से गंभीर बताया जा रहा है।
अब तक 330 बच्चों की मौत
यूनिसेफ ने गुरुवार को बताया कि इस प्रकोप में अब तक 17 साल और उससे कम उम्र के 330 बच्चों की मौत हो चुकी है। इसके परिणामस्वरूप इतूरी प्रांत में ज़रूरी स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह बाधित हुई हैं।यूनिसेफ के अनुसार, "सभी कन्फर्म मामलों में बच्चों की हिस्सेदारी लगभग एक-चौथाई है, लेकिन मरने वालों में उनकी संख्या लगभग एक-तिहाई है। पांच साल से कम उम्र के छोटे बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं; उनकी मृत्यु दर वयस्कों की तुलना में दोगुनी से भी ज्यादा है।"
अन्य बीमारियों के इलाज पर भी पड़ रहा असर
संगठन ने बताया कि इबोला के डर और स्वास्थ्य केंद्रों में व्यवधान के कारण परिवार अस्पताल जाने से कतरा रहे हैं। इससे बच्चों के टीकाकरण, मातृ स्वास्थ्य देखभाल और अन्य जरूरी सेवाओं में भारी गिरावट आई है। DRC में यूनिसेफ के प्रतिनिधि जॉन एगबोर ने कहा, "इबोला का प्रकोप पूरी स्वास्थ्य प्रणाली को बाधित कर रहा है। इसका सीधा असर मलेरिया, दस्त और अन्य ऐसी बीमारियों के इलाज पर पड़ेगा जिनका इलाज संभव है, और जो बच्चों की मौत का मुख्य कारण हैं।"
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DRC में इबोला की स्थिति पहले से कहीं ज्यादा गंभीर
अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा संगठन 'मेडिसिन्स सैन्स फ्रंटियर्स' (डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स) ने बुधवार को चेतावनी दी कि पूर्वी DRC में इबोला की स्थिति पहले से कहीं ज्यादा गंभीर है। संगठन के अनुसार, संक्रमण अभूतपूर्व गति से फैल रहा है और इसके धीमे होने के कोई संकेत नहीं हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल के बिस्तरों की कमी, चिकित्सा कर्मचारियों पर दबाव और समुदायों में डर के कारण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है।
त्शोपो प्रांत से आ रही यात्री नाव को रोका
स्वास्थ्य अधिकारियों ने बुधवार को किंशासा के बाहर एक यात्री नाव को रोका। यह कदम एक ऐसे यात्री की मौत के बाद उठाया गया, जिसे इबोला संक्रमण होने का संदेह था। यह नाव इबोला से प्रभावित त्शोपो प्रांत से आ रही थी और इसे सेंट्रल किंशासा से लगभग 65 किलोमीटर दूर रोका गया। स्वास्थ्य मंत्री रोजर कंबा ने बताया कि मोंगाला प्रांत में उतरे एक यात्री में बुखार और दस्त जैसे लक्षण दिखने और बाद में उसकी मौत हो जाने के बाद अलर्ट जारी किया गया था। काम्बा ने कहा, "हम सावधानी बरत रहे हैं। अभी के लिए, यह सिर्फ़ एक संदिग्ध मामला है; इसकी पुष्टि नहीं हुई है।" बाद में सरकार के प्रवक्ता पैट्रिक मुयाया ने बताया कि नाव के चारों ओर सुरक्षा और स्वास्थ्य निगरानी का घेरा बना दिया गया है। साथ ही, एक मोबाइल लैब की मदद से सभी यात्रियों और क्रू सदस्यों की जांच की गई है।
भारत में विदेशी यात्रियों पर रखी जा रही नजर
भारत में संक्रमण का तत्काल खतरा कम है, फिर भी विदेशी यात्रियों पर नजर रखी जा रही है। अफ्रीकी देशों (जैसे कांगो और युगांडा) में इबोला के नए स्ट्रेन के फैलने के कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किए जाने के बाद, भारत सरकार और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने हवाई अड्डों पर निगरानी और सतर्कता बढ़ा दी है। इसके अलावा, प्रभावित अफ्रीकी देशों की यात्रा न करने की सलाह दी जा रही है।
FAQ
1. इबोला क्या है?
इबोला एक दुर्लभ, खतरनाक और जानलेवा वायरल बीमारी है जो मुख्य रूप से अफ्रीका में पाई जाती है। यह वायरस संक्रमित जानवरों या बीमार इंसानों के शरीर के तरल पदार्थों (जैसे खून, लार और पसीना) के सीधे संपर्क में आने से फैलता है।
2. क्या यह संक्रमण हवा से भी फैलता है?
नहीं, यह संक्रमण हवा के जरिए नहीं फैलता है।
3. इबोला के लक्षण क्या हैं?
इबोला वायरस के लक्षण संक्रमण के 2 से 21 दिनों के भीतर अचानक दिखाई देते हैं। शुरुआती लक्षणों में अचानक तेज़ बुखार, बहुत ज़्यादा थकान, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, सिरदर्द और गले में खराश शामिल हैं। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, उल्टी, दस्त, पेट दर्द और अंदरूनी या बाहरी ब्लीडिंग जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
4. इबोला का रोकथाम कैसे संभव है?
इबोला वायरस से बचाव के लिए संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों (खून, लार, उल्टी आदि) के सीधे संपर्क से बचना और हाथों को साफ रखना चाहिए। जंगली जानवरों के संपर्क से बचें।
5. इबोला से बचाव के लिए क्या टीकाकरण उपलब्ध है?
हां, इबोला वायरस से बचाव के लिए टीके उपलब्ध हैं, लेकिन वे इबोला की खास प्रजातियों (खासकर जैरे इबोलावायरस) के खिलाफ ही असरदार हैं।
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