रूस को अलग-थलग करने की कोशिश में अमेरिका, नए कानून से कम करेंगे रूसी तेल का कारोबार
खबर सार :-
अमेरिका की ओर से यह साफ कर दिया गया है कि रूस को वह यूक्रेन युद्ध विजय की घोषणा नहीं करने देेगा। इसीलिए टैरिफ के नए कानून को लागू कर रूस को आर्थिक रूप से कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
खबर विस्तार : -
वाशिंगटन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लिंडसे ओ ग्राहम सैक्शनिंग रसिया और ईरान एक्ट 2026 पर हस्ताक्षर कर एक नया टैरिफ विवाद की शुरूआत कर दी है। इस कानून के तहत अब अमेरिका भारत पर भी 100 प्रतिशत टैरिफ लगा सकता है। अभी तक डोनाल्ड ट्रंप के सामने आ रही मुश्किलें भी उन्होंने दूर कर लीं हैं। चीन भी अमेरिका के निशाने पर रहा है।
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आर्थिक रूप से रूस को कमजोर करने की कोशिश
प्रधानमंत्री नरेंद्र की कभी तारीफ करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत को नए टैरिफ कानून के दायरे में लाने की कोशिश को अंजाम दिया है। अमेरिका का यह कानून रसिया के उन देशों को दायरे में लाता है जो रूसी तेल और गैस के बड़े खरीददार हैं। इस कानून के तहत उन पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का प्रावधान है। इसी कानून के तहत ईरान के खिलाफ भी अमेरिकी प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाया या घटाया जा सकता है।
रसिया और ईरान एक्ट पर हस्ताक्षर करने के बाद व्हाइट हाउस से इसकी जानकारी दी गई। इसमें बताया गया है कि रूस पर कानूनी प्रतिबंध टैरिफ और रोक लगाने के अलावा उन्हें बढ़ाने का अधिकार भी देता है। वैसे तो अमेरिका और रूस के संबंध कभी बेहतर नहीं रहे हैं, लेकिन यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध के चलते अमेरिका सीधे प्रहार नहीं कर पा रहा है। उसने अब चीन और भारत पर भी अपनी दादागीरी दिखाने की मंशा जाहिर कर दी है।
दुनिया के पांच देशों में हो सकता है भारत
नए कानून के तहत रूस पर प्रतिबंध के संबंध में रिपब्लिकन सेनेटरी केटी ब्रिट का एक बयान सामने आया है। इस कानून में कहा गया है कि वह पांच देश जो सबसे बड़े इंपोर्ट करने वाले गैस व तेल के हैं या फिर रूस पर लगे प्रतिबंधों से बचने की कोशिश करते रहे हैं, उन पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार देता है।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार चीन और भारत पर 100 फ़ीसदी टैरिफ लगाने की धमकी देते रहे हैं, लेकिन अमेरिकी कानून के तहत उनको इस बात का अधिकार नहीं मिल पा रहा था। अभी तक अमेरिका में नए कानून में इस बात की घोषणा नहीं की गई है कि वह पांच कौन से देश हैं जिन पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी है। तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर सीधे अमेरिकी कानून अपना प्रभाव नहीं डाल पा रहा था। फिलहाल, शुक्रवार को टैरिफ की दर नहीं बताई गई है।
रूसी समर्थकों को भी दायरे में ला रहा कानून
इस कानून में नई बात यह भी है कि अमेरिका उन देशों को छूट दे सकता है जो रूस के प्राकृतिक गैस के एक्सपोर्ट का 15 फीसदी से कम खरीदने हैं। उन देशों पर इस बात का भी दबाव रहेगा कि वह अपने तेल और गैस के इंपोर्टें प्रक्रिया को कम करने की कोशिश कर रहे हों। अमेरिका के इस कानून में केवल गैस और पेट्रोलियम पदार्थ ही सीमित नहीं, बल्कि रूस के निजी सेक्टर में काम करने वाले लोग और उनकी कंपनियां भी हैं।
यानी कि सेनेटरी का बयान कहता है कि रूसी अधिकारी, बैंक, वित्तीय संस्थान, जहाजबेड़ा आदि में भी काम करने वाले विदेशी लोग जो रूस से ताल्लुक रखते हैं, उन पर यह प्रतिबंध प्राइमरी और सेकेंडरी दोनों तरह से लगाया जा सकता है। ऐसे लोग जो रूस के युद्ध में यूक्रेन का समर्थन नहीं करते हैं, प्रतिबंध के दायरे में हैं। एलबामा की रिपब्लिकन नेता ब्रिट इस कानून में हस्ताक्षर करने के समय मौजूद थी।
यूक्रेन को हर तरह से मदद करने की तैयारी
अमेरिकी राष्ट्रपति यूक्रेन को हर तरह से मदद करके और रूस को कमजोर करने की कोशिश में इस कानून को आगे बढ़ा रहे हैं। इस बात को ब्रिट ने स्पष्ट करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस और उन सभी देशों को संदेश दिया है जो रूस की युद्ध मशीन को फंड देने जैसा काम करते आए हैं। उनके इस संदेश से यह तो स्पष्ट हो गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति की मंशा क्या है? अमेरिका में इस नियम और ट्रंप के विचारों का समर्थन कांग्रेस के दोनों सदनों में किया गया है।
व्हाइट हाउस से कहा गया है कि यह कड़ी मेहनत का नतीजा है। वहीं, दूसरी ओर अमेरिका के कुछ बुद्धिजीवियों ने इसे आर्थिक प्रतिबंधों को युद्ध खत्म करने की कोशिश को आगे बढ़ने का एक जरिया बताया है। यह भी कहा गया है कि हमें इस बात का इंतजार नहीं करना है कि रूस यह दावा करे कि उसने युद्ध जीत लिया है।
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