पूर्वोत्तर रेलवे का लक्ष्य, भूटान, नेपाल व बांग्लादेश जाएगी भारतीय रेल

खबर सार :-

भारत का पूर्वोत्तर रेलवे अपने नेटवर्क को अब देश की सीमाओं से बाहर निकालने की तैयारी बना रहा है। इस लक्ष्य को पूरा होने पर देश का पर्यटन और यात्रियों की कनेक्टिविटी बढ़ जाएगी। नया लक्ष्य पड़ोसी देशों तक भारतीय रेल पहुंचाना है।
पड़ोसी देशों तक जाएगी भारतीय रेल, पूर्वोत्तर रेलवे बढ़ा रहा नेटवर्क

खबर विस्तार : -

लखनऊ/गुवाहाटी: पूर्वोत्तर में रेल नेटवर्क विस्तार बहुत तेजी के साथ किया जा रहा है। अगले कुछ वर्षों में पूरा करने के लिए एक लक्ष्य बनाया गया है। इसमें पूर्वाेत्तर की राजधानियों को जोड़ने के साथ ही पड़ोसी देशों में भी भारतीय रेल की यात्रा शामिल है। अपने मजबूत इरादों के चलते भारत की रेल आने वाले सालों में भूटान, नेपाल और बांग्लादेश का आवागमन और माल ढुलाई सरल कर देगी। आने वाले वर्षों में पूर्वोत्तर भारत अंतर्राष्ट्रीय रेल कनेक्टिविटी के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर सकता है।

2014 के बाद आया रेलवे में बड़ा बदलाव

रेलवे के अनुसार, पिछले एक दशक में पूर्वोत्तर क्षेत्र में काफी बदलाव आया है। इस अवधि में ही करीब दो हजार किलोमीटर नई रेल लाइनें बिछाई गई हैं। 2029 का लक्ष्य पूरा करने के लिए वर्ष 2014 से बाद की प्रगति सहायक हो रही है। 2014 से पहले रेल विद्युतीकरण की स्थिति बेहद सीमित थी। जल्द ही हम पूरा नेटवर्क शत-प्रतिशत विद्युतीकरण के लक्ष्य के करीब पहुंचा रहे हैं। 

अभी तक पूर्वोत्तर रेल नेटवर्क देश के दूरस्थ हिस्सों तक सीमित रहा है। लेकिन, अब इसकी सीमाएं काफी विस्तार ले रही हैं। रेल कनेक्टिविटी में अभी तक यात्रियों को देश की सीमा के अंदर पहुंचाने का लक्ष्य था, लेकिन अब भारतीय रेल पड़ोसी देशों के साथ व्यापार, पर्यटन और रणनीतिक संपर्क विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। 

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एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम के तहत दी जानकारी

सब कुछ ठीक रहा तो भूटान, नेपाल और बांग्लादेश के साथ रेल संपर्क बढ़ाया जाएगा। इस लक्ष्य को मजबूत करने के लिए कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम के तहत पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), लखनऊ की ओर से पूर्वोत्तर के भ्रमण पर उत्तर प्रदेश के कुछ पत्रकारों का दल मालीगांव स्थित पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) मुख्यालय पहुंचा था।

सोमवार को रेलवे अधिकारियों ने पूर्वोत्तर में चल रही रेल परियोजनाओं, अंतर्राष्ट्रीय कनेक्टिविटी, यात्री सुविधाओं, सुरक्षा आदि विषय पर महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। एनएफआर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी केके शर्मा ने बताया कि भूटान के साथ बनारहाट-सामत्से और कोकराझार-गेलेफू रेल परियोजनाओं को हाल ही में मंजूरी मिली है। इस परियोजना को पूरा करने के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर काम चल रहा है। 2029 तक इनको पूरा करने का लक्ष्य है। 

भारवाहन के नए विकल्प पूरा होने की उम्मीद

नए लक्ष्य से भारत और भूटान के बीच व्यापार तथा पर्यटन क्षेत्र को ज्यादा लाभ मिलने की उम्मीद है। बांग्लादेश के साथ अगरतला-अखौरा रेल परियोजना का भौतिक निर्माण पूरा किया जा चुका है। महिषासन जीरो प्वाइंट पर भी काम अंतिम चरण में है। यहां पर करीब 170 मीटर का काम शेष बताया गया है। हमारा पड़ोसी देश नेपाल भी पर्यटन के लिहाज से और व्यापारिक दृष्टिकोण से भी रेल नेटवर्क से जुड़ने पर भविष्य की उम्मीदों को पूरा करने में मददगार हो सकता है। जोगबनी से विराटनगर के लिए कंटेनर ट्रेन चलाई जा चुकी है। इस संपर्क को आगे विस्तारित करने की दिशा में काम जारी है। इन परियोजनाओं से पूर्वोत्तर के लिए पड़ोसी देशों तक माल और यात्रियों की आवाजाही के नए रास्ते खुलने की संभावना है।

2029 तक नागालैंड भी रेल नेटवर्क में होगा

देश की सीमाओं और पूर्वात्तर राज्य में मिजोरम की राजधानी आइजोल, बैराबी-सैरांग परियोजना के जरिए पिछले वर्ष 13 सितंबर को रेल संपर्क मिला। सिक्किम, मणिपुर और नागालैंड को रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए काम चल रहा है। कई रेलवे की योजना एवं परियोजनाओं के तहत 2027 तक सिक्किम, 2028 तक मणिपुर की राजधानी इंफाल और 2029 तक नागालैंड को रेल नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य है।

रेलवे के विस्तार के साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी विकसित होगी और यह सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होगी। मौजूदा रेल परियोजनाओं और 2029 तक निर्धारित लक्ष्यों को देखते हुए कहा जा सकता है कि आने वाले वर्षों में पूर्वोत्तर के रेल नेटवर्क में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। यह देश की अर्थव्यवस्था में भी बदलाव लाने में सहायक होगा। 

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