बाढ़ की विभीषिका के बाद नेपाल सरकार का बड़ा कदम, जलवायु कूटनीति के लिए बनाया नया विभाग

खबर सार :-

नेपाल में बाढ़ के बाद सरकार ने जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक कोशिशों को मजबूत करने के लिए ‘पर्यावरण कूटनीति विभाग’ का गठन किया है।
जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए नेपाल में बना नया विभाग

खबर विस्तार : -

काठमांडू: नेपाल के विदेश मंत्रालय ने पहली बार एक खास 'पर्यावरण कूटनीति विभाग' (Environment Diplomacy Division) बनाया है। इस कदम का मकसद जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों पर नेपाल की कूटनीतिक कोशिशों को मजबूत करना है। यह कदम देश में हाल ही में आई भयानक बाढ़ से हुई भारी तबाही के बीच उठाया गया है।

नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के मुताबिक, 26 अगस्त को आई भयानक बाढ़ में बहे 1,411 लोगों के शव बरामद कर लिए गए हैं, जबकि शनिवार शाम तक 5,875 लोग लापता थे। लापता लोगों में नेपाली और विदेशी नागरिक दोनों शामिल हैं। जानकारों का मानना ​​है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से दुनियाभर में बढ़ रहा तापमान हिमालय के पहाड़ी ढलान के ढहने की एक वजह हो सकता है, इसी घटना की वजह से नेपाल में जबरदस्त बाढ़ आई थी।

ग्लोबल वार्मिंग से पतले हो रहे ग्लेशियर

पिछले हफ्ते जारी एक रिपोर्ट में, 'वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन' (WWA) ने कहा कि इंसानों की वजह से हो रही ग्लोबल वार्मिंग से पहाड़ों में ग्लेशियर पतले हो रहे हैं और पर्माफ्रॉस्ट (वह जमीन जो लंबे समय तक जमी रहती है) पिघल रही है। रिपोर्ट बताती है कि इन बदलावों ने शायद हिमालय के पहाड़ी ढलान को कमजोर और अस्थिर कर दिया, जिससे 26 अगस्त को वह ढलान ढह गया और उसके बाद नेपाल में भयानक बाढ़ आ गई।

वैज्ञानिकों का एक अंतरराष्ट्रीय समूह है WWA

'वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन' (WWA) वैज्ञानिकों का एक अंतरराष्ट्रीय समूह है। यह पता लगाने की कोशिश करता है कि इंसानों की वजह से होने वाला जलवायु परिवर्तन, मौसम की खास और चरम घटनाओं की संभावना और गंभीरता पर किस हद तक असर डालता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ता तापमान और पर्माफ्रॉस्ट का कमजोर होना चट्टानों के तापमान को बढ़ाता है और चट्टानों की दरारों में जमी बर्फ को पिघलाता है, जिससे चट्टान की सतह कमजोर हो सकती है। चट्टानों के बीच बर्फ से बनी पकड़ खत्म होने से इन दरारों की मजबूती कम हो जाती है। वहीं, पिघली हुई बर्फ का पानी दबाव बढ़ा सकता है और पहले से मौजूद भू-वैज्ञानिक कमजोरियों को और अस्थिर कर सकता है। 

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जलवायु कूटनीति पर ध्यान देगा विभाग

रिपोर्ट में कहा गया है कि पर्माफ्रॉस्ट का कमजोर होना एक और जलवायु-संबंधी कारण हो सकता है जिसने ढलान को ढहने के प्रति ज्यादा संवेदनशील बना दिया। भयानक बाढ़ के बाद भविष्य में आपदाओं के बढ़ते जोखिम को लेकर चिंताओं के बीच, नेपाल सरकार ने विदेश मंत्रालय के भीतर एक खास विभाग बनाने का फैसला किया जो खास तौर पर जलवायु कूटनीति पर ध्यान देगा। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने कहा, "जलवायु परिवर्तन के बढ़ते असर और उनसे पैदा होने वाली नई चुनौतियों से निपटने के लिए एक अलग संस्थागत व्यवस्था की जरूरत को समझते हुए, मंत्रालय ने यह विभाग बनाने का फैसला किया है।" 

एजेंसियों के साथ बढ़ेगा तालमेल 

नेपाल जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों पर राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार हिस्सा लेता रहा है। मंत्रालय ने बताया कि बेहतर तालमेल और व्यवस्थित तरीके से इन कोशिशों को आगे बढ़ाने के लिए यह नया डिवीजन बनाया गया है। यह जलवायु और पर्यावरण से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक पहलों को आसान बनाएगा और संबंधित एजेंसियों के साथ तालमेल सुनिश्चित करेगा।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर जलवायु कूटनीति को बढ़ावा

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि नेपाल अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जलवायु कूटनीति में सक्रिय रूप से शामिल रहा है। उन्होंने इन कोशिशों को और अधिक संस्थागत रूप देने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि जलवायु कूटनीति को सिर्फ सम्मेलनों या अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में शामिल होकर आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। खनाल ने कहा कि जरूरत और काम के बोझ के आधार पर भविष्य में इस नए डिवीजन के ढांचे को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जलवायु कूटनीति को सिर्फ जलवायु परिवर्तन और आपदाओं के असर से जुड़े मुद्दों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए; इसके जरिए नेपाल को अंतरराष्ट्रीय मंच पर जलवायु से जुड़ी अपनी प्राथमिकताओं और पहलों को भी लगातार बढ़ावा देना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र में उठेगा जलवायु परिवर्तन का असर

विदेश मंत्रालय का यह कदम संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से ठीक पहले उठाया गया है। नेपाल इस बैठक के दौरान जलवायु परिवर्तन और अपने जैसे देशों पर इसके बढ़ते असर का मुद्दा उठाने की योजना बना रहा है। नेपाल सरकार ने पहले ही तय कर लिया है कि प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के 'हाई-लेवल वीक' में हिस्सा लेंगे। वह नेपाली प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के लिए 22 सितंबर को न्यूयॉर्क के लिए रवाना होंगे और 24 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा की आम बहस (जनरल डिबेट) को संबोधित करेंगे।

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