तमिलनाडुः करूर भगदड़ की पहली बरसी, विजय की रैली में 41 लोगों की मौत का दर्द आज भी जिंदा

खबर सार :-

तमिलनाडु के करूर में टीवीके प्रमुख विजय की रैली में 41 लोगों की मौत मामले में आज से एक साल पूरा हो गया है। पीड़ित परिवारोें के लिए एक साल बाद भी यह दिन पहले जैसा ही है।
तमिलनाडुः करूर भगदड़ की पहली बरसी, आज ही के दिन हुई थी विजय की रैली में 41 लोगों की मौत

खबर विस्तार : -

करूर, रैली के दौरान भगदड़ का सामना करने वालों को भी कुछ अंतर नहीं लग रहा है। आज हादसे की बरसी मनाई जा रही है। 41 लोगों की मौत पर वही दर्द का अहसास, वही चीख-पुकार और अपने का रुखसत हो जाना भला कैसे भुलाया जा सकता है। 27 सितंबर 2025 को विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम की रैली होनी थी। इसके लिए (टीवीके) के समर्थक सुबह से ही वेलुसामीपुरम में जमा होने लगे थे।

नेता का इंतजार चलता रहा और शाम होने लगी

राजनीति में बदलाव का इंतजार किया जा रहा था। नयापन लाने कि लिए वह रैली वाला नेता भी राजनीति में नया था। अभिनेता इनकी पहचान थी। यह अभिनेता विजय थे। इनको सामने से देखने की उम्मीद थी। इनको करीब से देखने के लिए कुछ परिवारों के साथ बच्चे भी आए थे। हजारों की भीड़ उनके आने का इंतजार कर रही थी। राजनीतिक पार्टी के गाने बज रहे थे। समय का इंतजार चलता रहा और शाम होने लगी। आखिर वह घड़ी आई, जबकि विजय इलाके में पहुंचे।

जैसे ही लोग उनकी कैंपेन गाड़ी की तरफ बढ़े, वहां भीड़ की वजह से खतरनाक हालात बन गए। धक्का-मुक्की शुरू हो गई। इसी बीच कुछ लोग नीचे गिर गए। यह सिलसिला चलता गया किसी ने हालात संभालने की एनाउंसमेंट नहीं किया। एक दूसरों के नीचे लोग दबते गए। हालात भगदड़ जैसे बन गए। काफी देर बाद पुलिस ने भीड़ से लोगों को बाहर निकाला और घायलों को अस्पताल पहुंचाया। इस रैली आयोजन में 41 लोगों की मौत हो गई। यह रैली हादसा बन चुकी थी।

100 से ज्यादा लोगों के घायल होने की जानकारी दी

इसमें 100 से ज्यादा लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई। इसमें मरने वालों में बच्चे भी शामिल थे। पीड़ित परिवारों के लिए यह बरसी का दिन यादें ताजा कर देती है। रैली की जगह पर किए गए इंतजार, भगदड़, अफरातफरी और अस्पतालों से मिली दुखद खबर आज सब नया हो गया। वर्तमान में मुख्यमंत्री उसी रैली के नायक हैं। 41 मौतों का आंकड़ा करूर के लिए उस रात की याद का एक अहम हिस्सा बन गया है। इस त्रासदी के बाद सियासत का संग्राम शुरू हुआ। कभी जगह चुनने, कभी कार्यक्रम की रूपरेखा, कभी भीड़ की संख्या और कभी सुरक्षा के उपायों पर सवाल उठते रहे। मामला काफी लंबा होता रहा।

जांच की निगरानी के लिए एक कमेटी बनाई गई

जिम्मेदारी तय करने की आई तो राजनीतिक पार्टियों के बीच मतभेद रहे। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो वहां सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) को इस घटना की जांच की जिम्मेदारी दी गई। जांच की निगरानी के लिए एक कमेटी बनाई गई। सरकार ने पीड़ितों और मृतकों के परिवारों को मुआवजा का ऐलान किया। इस हादसे को लेकर टीवीके ने भी मुआवजे का ऐलान किया।

यह वही विजय हैं, जो अब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने 10 जुलाई 2026 को करूर का दौरा किया। पीड़ितों के परिवारों से मुलाकात भी की। मरने वालों की याद में एक स्मारक बनाने की घोषणा कर कई लोगों को सरकारी नौकरी का नियुक्तिपत्र दिया। आज उसी हादसे की पहली बरसी मनाई जा रही है। इसे याद कर पीड़ितों के परिजन फफक पड़े। ​​​​​​

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FAQ ...

1.  भगदड़ होने का कारण किसे माना गया? 

इस रैली में भगदड़ के कई कारण बताए गए। इनमें सबसे बड़ा कारण यह रहा कि जब अभिनेता की गाड़ी सामने आई तो लोग नजदीक जाने के लिए आगे बढ़ने लगे और इसी दौरान हालत बिगड़ गए। एक दूसरे के ऊपर गिरते गए। चोट लगने के कारण या दब जाने के कारण मौत हुई।

2.  रैली को लेकर पुलिस की भूमिका कैसी थी?

रैली के दौरान पुलिस की भूमिका गैर जिम्मेदाराना रही। यदि पुलिस भीड़ को देखकर इंतजामों पर ध्यान देती तो इतनी बड़ी त्रासदी ना होती। पुलिस ने किसी प्रकार के बंदोबस्त नहीं किए। ना ही आयोजकों पर किसी कोई दबाव रहा।

3.  रैली में भीड़ का मानक क्या था?

प्रशासन की ओर से काफी ढिलाए की गई थी। रैली में शामिल होने वाले लोगों की संख्या और मौजूदा समय में भीड़ का आकलन नहीं किया गया। हालत बिगड़ गए और यह बड़ा हादसा का रूप बना।

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