राजनीतिक रंग दे रहे नेताओं के हाथ खाली, धीरेंद्र शास्त्री ने कहा गलत अर्थ निकाला गया

खबर सार :-

भगवान श्री कृष्ण के स्वरूप उनके खड़े होने और टेढ़े होने को लेकर की गई धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी को लेकर सियासी बवाल अभी थमने का नाम नहीं ले रहा है।
धीरेंद्र शास्त्री ने मांगी माफी, सियासत वालों का सहारा ‘पोस्ट’

खबर विस्तार : -

भोपाल, बाबा बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान राम और श्री कृष्ण की तुलना के समय एक बयान ऐसा दिया, जिसमें सियासी भूचाल आ गया। हालांकि, इस भूचाल के पीछे केवल सियासत ही है। धीरेंद्र शास्त्री ने माफी मांगते हुए कहा कि उनके कहने का अर्थ गलत निकाला गया। यदि किसी की भावनाओं को ठेस लगी, तो वह माफी मांगते हैं। 

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करेरा में श्री राम कथा का आयोजन चल रहा था। इस कार्यक्रम के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान श्री कृष्णा पर टिप्पणी एक टिप्पणी की। इसके मायने अलग निकाले गए। इसके बाद भी धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी बात को वापस लिया और माफी भी मांग ली। इसके बाद भी विरोध थमा नहीं। राजनीतिक दलों के लोगों ने सोशल मीडिया को माध्यम बनते हुए अलग-अलग तरीके के पोस्ट करने शुरू कर दिए हैं। 

यह भी पढ़ें :जन्मदिन से पहले बृजभूषण शरण सिंह को मिला अनोखा गिफ्ट, बेटी शालिनी ने नोएडा में बनवाया हेलीपैड

अखिलेश यादव ने की प्रतिबंध की मांग

समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने पोस्ट करते हुए लिखा है कि मानवी मूल्य के लिए तो क्षमा किया जा सकता है, ईशनिंदा के लिए कभी नहीं। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव को सभी लोग जानते हैं कि उनको यह मौका मिला है। उन्होंने पोस्ट में आगे लिखा है की ऐसे लोगों पर आजीवन प्रतिबंध लगाना ही समाज के लिए श्रेयस्कर है। यहां सवाल यह है कि ऐसे लोगों में क्या केवल धीरेंद्र शास्त्री ही हैं? समाजवादी पार्टी के नेता तमाम और मसलों पर प्रतिबंध लगाने की बात नहीं करते हैं। अखिलेश यादव ने लिखा है कि पूरे देश में उनके सभी कार्यक्रम रद्द किए जाएं। नई अनुमति नहीं दी जाए। भला धीरेंद्र शास्त्री का हो कि उन्होंने अपनी बात पर माफी भी मांगी। 

मौका नहीं गंवाना चाह रहा विपक्ष का नेता 

 आज जिस स्वामी प्रसाद मौर्य को वह इंडिया ब्लॉक में भी लेने से मना कर रहे हैं, कभी वह उनकी पार्टी में रहकर रामायण पर प्रश्न चिन्ह लगाया करते थे। उसकी चौपाइयों को तोड़मरोड़ कर उसका अर्थ बताया करते थे। दरअसल, यह मामला भाजपा के समानांतर होने का है। शिवसेना यूबीटी नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी एक पोस्ट किया है और इसमें संत सूरदास और गोस्वामी तुलसीदास के बीच का संवाद दर्शन का जिक्र किया है। प्रियंका चतुर्वेदी ने भी पार्टी के नजरिया से देखा है। उन्होंने कहा कि धीरे शास्त्री ने ब्राह्मणी और दिव्य लीलाओं को घटकर उसे सामान्य कार्य बता दिया। पवित्र त्रिभंगी मुद्रा को टेढ़ापन कहना उनकी गहन आध्यात्मिक सौंदर्य और भावनाओं दर्शाता है। तेजस्वी यादव को भी मौका मिला तो उन्होंने भी लोक एकता की कनिष्ठ अंगुली से इंद्रासन को हिला देने वाले लोकनायक धार्मिक सीमाओं से पार जन-जन के पूज्य हमारे कुलदेवता भगवान श्री कृष्णा पर सत्तापोषित एक मानसिक विक्षिप्त द्वारा की गई टिप्पणी बताया।

चुप्पी साध जाने वाले भी मांग रहे हैं सफाई

 यह तेजस्वी यादव ही है, जिनको मानसिक परीक्षण का ज्ञान है। वह राजनीति के साथ-साथ चिकित्सा जानकारी भी रखते हैं। जब  इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने रामायण और देवी देवताओं पर अशोभनीय टिप्पणी की तब खामोश रहे। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी पोस्ट किया है। उनकी भावना तो भाजपा से टकरा गई। सवाल किया है कि आपका चहेता भगवान कृष्ण के बारे में यह सब बकवास कर रहा है। अगर कोई और ऐसा कहता तो आपके गैंग के लोग हंगामा खड़ा कर दिये होते। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लिखा है कि कोई तो केमिकल लोचा होगा, उसकी जांच करवाना ठीक होगा। प्रभु श्री राम और श्री कृष्ण में फर्क अयोध्या और वृंदावन में फर्क। 

भूपेश बघेल को सता रही भगवान की चिंता

भूपेश बघेल को अब राम और श्री कृष्ण की चिंता सता रही है। यह पहली बार इस मुद्रा में आए हैं कि किसी बाबा को ढोंगी कहने की शक्ति इनमें जगी है। अभी हाल ही में जब मध्य प्रदेश के कई मंदिरों को हटाया जा रहा था, तब उनके मुंह से एक शब्द नहीं निकला। जबकि धीरेंद्र शास्त्री ने वीडियो जारी कर हाथ जोड़कर माफी भी मांग ली है। करेरा में श्री राम कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान राम और भगवान श्री कृष्ण की तुलना करते हुए श्री कृष्ण के स्वरूप को लेकर टिप्पणी की थी। अब इस मामले को लेकर सियासी तूल देने की कोशिश की जा रही है।
यह भी पढ़ें : अयोध्या में दीपोत्सव की भव्य तैयारी: सरयू तट पर 2147 अर्चक एक साथ करेंगे महाआरती, 30 लाख दीयों से सजेगी रामनगरी

अन्य प्रमुख खबरें