UP Election 202: संभल जिले की चारों सीटों का पिछला चुनावी इतिहास और राजनीतिक समीकरण

खबर सार :-

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। संभल जिले की चार सीटों पर पिछले यानी 2022 के चुनाव में समाजवादी पार्टी का पलड़ा भारी रहा था, जहां उसने तीन सीटों पर कब्जा जमाया था, जबकि एक सीट पर भाजपा को जीत मिली थी।
UP Election 2027: संभल जिले की चार सीटों पर क्या थे 2022 के नतीजे

खबर विस्तार : -

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की सरगर्मियों के बीच राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीतियों पर काम करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में राज्य के संभल जिले की चुनावी स्थिति और वहां के पिछले नतीजों का विश्लेषण करना महत्वपूर्ण हो गया है। साल 2022 के पिछले विधानसभा चुनावों में इस जिले की चार सीटों पर हुए मुकाबलों के आंकड़े बताते हैं कि किस दल को कहां बढ़त मिली थी और किस पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। इन पुराने परिणामों के आधार पर ही आने वाले चुनावों के समीकरणों को समझने की कोशिश की जा रही है।

संभल जिले के अंतर्गत कुल चार विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जिनके नाम संभल, असमोली, चंदौसी और गुन्नौर हैं। पिछले चुनाव के परिणामों पर नजर डालें तो संभल जिले की इन चारों सीटों में से तीन पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों ने अपनी जीत दर्ज की थी। वहीं, केवल एक सीट ऐसी थी जहां भारतीय जनता पार्टी के खाते में जीत गई थी। इस तरह से पिछले चुनाव में यहां मुख्य मुकाबला समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच ही देखने को मिला था, जबकि बहुजन समाज पार्टी और अन्य दल तीसरे स्थान पर रहे थे।

संभल और असमोली सीट के पिछले चुनावी नतीजे

संभल विधानसभा सीट पर पिछले चुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार इकबाल महमूद ने जीत हासिल की थी। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी और भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार राजेश सिंघल को 41,697 मतों के अंतर से हराया था। इस मुकाबले में सपा प्रत्याशी इकबाल महमूद को कुल 1,07,073 वोट मिले थे, जबकि दूसरे स्थान पर रहे भाजपा उम्मीदवार राजेश सिंघल को 65,376 वोट हासिल हुए थे। इस सीट पर तीसरे स्थान पर बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार शकील अहमद कुरैशी रहे थे, जिन्हें 44,443 वोट मिले थे।

इसी तरह असमोली विधानसभा सीट पर भी समाजवादी पार्टी का दबदबा देखने को मिला था। यहां से सपा की उम्मीदवार पिंकी सिंह, जिन्हें पिंकी यादव के नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने जीत का परचम लहराया था। पिंकी सिंह ने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार हरेंद्र सिंह, जिन्हें रिंकू भी कहा जाता है, उनको 25,206 मतों के अंतर से पराजित किया था। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, सपा प्रत्याशी पिंकी सिंह को कुल 1,11,652 वोट मिले थे, जबकि भाजपा उम्मीदवार को 86,446 वोट प्राप्त हुए थे। इस सीट पर तीसरे नंबर पर बसपा के रफतउल्ला रहे थे, जिन्हें 42,512 वोट मिले थे।

चंदौसी और गुन्नौर सीट का चुनावी गणित

संभल जिले की चंदौसी विधानसभा सीट एक सुरक्षित सीट है और यह जिले की इकलौती ऐसी सीट रही थी जहां भारतीय जनता पार्टी को जीत मिली थी। इस सीट पर भाजपा की उम्मीदवार गुलाबो देवी ने समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी विमलेश कुमारी को 35,367 मतों के अंतर से हराया था। चुनाव में गुलाबो देवी को कुल 1,12,890 वोट मिले थे, जबकि सपा की विमलेश कुमारी को 77,523 मत प्राप्त हुए थे। इस निर्वाचन क्षेत्र में तीसरे स्थान पर रहने वाले बसपा उम्मीदवार रणविजय सिंह को 30,481 वोट मिले थे।

गुन्नौर सीट पर सपा की बड़ी जीत

गुन्नौर विधानसभा सीट पर भी साल 2022 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने अपना कब्जा जमाया था। यहां से सपा के उम्मीदवार राम खिलाड़ी सिंह ने भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी अजीत कुमार, जिन्हें राजू यादव भी कहा जाता है, उनको 29,529 वोटों के अंतर से हराया था। चुनाव परिणामों के अनुसार, राम खिलाड़ी सिंह को 1,23,969 वोट मिले थे, जो इस क्षेत्र में सबसे बड़ी जीत में गिने गए। वहीं, दूसरे स्थान पर रहे भाजपा प्रत्याशी अजीत कुमार को 94,440 वोट मिले थे। इस सीट पर तीसरे स्थान पर बसपा के उम्मीदवार फिरोज रहे थे, जिन्हें 15,068 वोट हासिल हुए थे।

संभल जिले का राजनीतिक ताना-बाना

संभल जिला अपने विशिष्ट सामाजिक और राजनीतिक ताने-बाने के लिए उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक विशेष स्थान रखता है। रुहेलखंड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस जिले में मुस्लिम और अन्य पिछड़े वर्गों की आबादी का अच्छा खासा प्रभाव माना जाता है, जो यहां के चुनावी परिणामों को काफी हद तक तय करते हैं। पिछले कई दशकों से इस क्षेत्र में क्षेत्रीय दलों और राष्ट्रीय दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलता रहा है। साल 2022 के विधानसभा चुनावों में भी यह प्रवृत्ति साफ तौर पर नजर आई, जब मतदाताओं ने ज्यादातर सीटों पर समाजवादी पार्टी पर भरोसा जताया, जबकि एक सीट पर भाजपा ने अपनी मजबूत पकड़ का अहसास कराया। अब जैसे-जैसे साल 2027 के चुनाव नजदीक आ रहे हैं, सभी दल इन पुराने आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए अपनी नई रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं।

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