खनन सेक्टर में राजस्थान की बड़ी छलांग, प्रधान खनिजों की नीलामी में अव्वल

खबर सार :-

खनिज संपदा में राजस्थान काफी मजबूत है। यहां पर कई कीमती और दुर्लभ खनिज पाए जाते हैं। यही कारण है कि मौका पाते ही माफिया लोग अवैध खनन करने लगते हैं। सरकार इसके लिए कई तरह से रोक लगाने की तैयारी बना रही है।
राजस्थान में हो रहा अवैध खनन, सरकार बना रही नीलामी का रिकॉर्ड

खबर विस्तार : -

जयपुर, राजस्थान में खनिजों का भंडार है। यहां पर खनिज का भंडार होने का फायदा अवैध कारोबार करने वाले भी उठा रहे हैं। सरकारें योजना बनाती रहती हैं। इस बार फिर एक नई तैयारी की जा रही है। कह रहे हैं कि पारदर्शी ई-नीलामी, व्यवस्थित खनिज अन्वेषण और नए खनन ब्लॉकों को शीघ्र परिचालन में लाया जा चुका है। सितम्बर महीने में 739 मेजर मिनरल ब्लॉकों की नीलामी की गई थी। इनमें से 141 ब्लॉकों की नीलामी राजस्थान में हुई।

समीक्षा के पीछे खान मंत्री एवं मुख्यमंत्री का हाथ रहा

इसे राजस्थान सरकार अपनी उपलब्धि बता रही है। सभी 141 ब्लाक में 102 वर्तमान सरकार के कार्यकाल की नीलामी का नतीजा है। वर्तमान सरकार का कहना है कि उसके कार्यकाल में व्यवस्थागत सुधार का नतीजा ही है कि पूर्व में इतनी नीलामी नहीं हुईं। अफसरों की ओर से बताया जा रहा है कि खान विभाग द्वारा अपनाई गई योजनाबद्ध कार्यप्रणाली और नियमित समीक्षा के पीछे खान मंत्री एवं मुख्य मंत्री का हाथ रहा है।

उनके प्रक्रियागत नवाचारों ने राजस्थान को इस क्षेत्र में सफलता दी है। राजस्थान देश के माइनिंग सेक्टर में अग्रणी प्रदेशों में शुमार हो रहा है। सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि एक्सप्लोरेशन से लेकर ऑक्शन तक की रुपरेखा के साथ ही ऑक्शन ब्लॉकों को परिचालन में लाने की कार्ययोजना, सहयोग व समन्वय का ही परिणाम है कि राजस्थान माइनिंग सेक्टर में नया इतिहास लिख रहा है। राजस्थान को माइनिंग सेक्टर में विकास की इस गति को बनाये रखना होगा।

अवैध खनन पर अंकुश नहीं लगा पा रही है सरकार

यद्यपि यह बात सही है कि राजस्थान में खनिजों के भंडार हैं। यहां पर कई दुर्लभ एवं बेशकीमती खनिज पाए जाते हैं। लेकिन अवैध खनन भी राज्य में बड़े स्तर पर चल रहा है। इसको रोक पाना कठिन हो रहा है। सरकार बार बार प्रयास करती है और योजनाएं भी लाती है, लेकिन अंकुश लगाने में सफल नहीं हो पा रही है। इस बार एक नया तरीका लाया गया है। बताया जा रहा है कि सबसे कारगर तरीका खनिज क्षेत्रों के ब्लॉक या प्लॉट तैयार करना है। सरकार की इच्छा है कि पारदर्शी तरीके से ई पोर्टल के माध्यम से नीलाम किया जाए। इससे बहुत हद तक बेशकीमती खनिजों के अवैध खनन को रोका जा सकता है। इससे खनिज क्षेत्र में वित्तीय निवेश, रोजगार के बेहतर अवसर विकसित होने के साथ ही राज्य सरकार के राजस्व में भी बढ़ोतरी संभव है।

भारत सरकार के ई-पोर्टल पर नीलामी होगी पूरी

अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस अपर्णा अरोरा का कहना है कि नियमित समीक्षा का परिणाम है कि राजस्थान को इस दिशा में सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। सवाल यह है कि समीक्षाएं कितने दिनों में हो पाती हैं। मध्यप्रदेश भी सौ की संख्या पार कर ली है। मध्यप्रदेश में 127 और ओडिसा में 84 मेजर मिनरल ब्लॉकों की नीलामी रिकॉर्ड है। ध्यान देने योग्य यह है कि राजस्थान में खनिज है। वह भी अन्य गणना वाले राज्यों से ज्यादा। इसमें अभी उस स्तर पर नहीं पहुंच सके, जहां हो सकते हैं। बहरहाल अब, भारत सरकार के ई-पोर्टल पर नीलामी तक की संपूर्ण प्रक्रिया विभागीय अधिकारियों द्वारा ही पूरी की जा रही है। देश के अन्य प्रदेशों में यह कार्य आउट सोर्सिंग के माध्यम से किसी संस्था के माध्यम से करवाया जाता है। 

अग्रणी प्रदेश बनाने की दिशा में योजनाबद्ध प्रयास किये

राज्य सरकार कह रही है कि राजस्थान के माइनिंग सेक्टर को देश के माइनिंग सेक्टर में अग्रणी प्रदेश बनाने की दिशा में योजनाबद्ध प्रयास किये जा रहे हैं। इसका नतीजा मिला रहा है कि अच्छे रिकॉर्ड नीलामी में आ रहेे हैं। मिनरल एक्सप्लोरेशन से लेकर ब्लॉकों की नीलामी तक ही सीमित नहीं रहकर नीलाम मिनरल ब्लॉकों को शीघ्र परिचालन में लाने के प्रयास किये जा रहे हैं।

यहां सवाल यह है कि पहले भी अफसरों के हाथ ऐसे अधिकार थे, किन्तु बदलाव हाल के सालों में ही क्यों? अधिकारियों का पक्ष है कि विभाग स्तर पर वरिष्ठ अधिकारी की देखरेख में पोस्ट ऑक्शन फेसिलिटेशन सेल बनाकर उसके माध्यम से नीलाम ब्लॉकों को परिचालन में लाने के लिए आवश्यक अनुमतियां दिलाने में विभाग द्वारा मार्गदर्शन व सहयोग उपलब्ध कराया जाता है। 

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