इस्तीफा देकर दूसरी पार्टी से चुनाव लड़ने वाले विधायकों से उपचुनाव का खर्च वसूलने की तैयारी

खबर सार :-

बिना ठोस वजह के इस्तीफा देने वाले विधायकों को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में इस्तीफा देकर दूसरी पार्टी से चुनाव लड़ने वाले विधायकों से उपचुनाव का खर्च वसूलने की मांग की गई है।
बिना ठोस वजह इस्तीफा देने वाले विधायकों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: बिना किसी ठोस कारण के सीट से इस्तीफा देने वाले विधायकों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। इस संबंध में दाखिल की गई याचिका को लेकर उच्चतम न्यायालय ने जवाब मांगा है। दरअसल, कई विधायक अपने लाभ के लिए सीट से इस्तीफा दे देते हैं और उसके बाद दूसरे दल से फिर चुनाव में खड़े हो जाते हैं। ऐसे इलेक्शन का खर्च जनता पर बोझ बढ़ाता है। याचिका में इस प्रकार के इलेक्शन का खर्च इस्तीफा देने वाले विधायकों से वसूलने की मांग की गई है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की बेंच ने 27 अक्टूबर, 2026 को इस मामले पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया है। न्यायालय ने केंद्र सरकार, मुख्य चुनाव आयुक्त (ईसीआई), तमिलनाडु के मुख्य चुनाव अधिकारी और संबंधित विधायकों समेत दूसरी पार्टियों से जवाब मांगा है।

वित्तीय जवाबदेही तय करने की मांग 

यह याचिका वकील के. सुथन ने फाइल की थी। उन्होंने मद्रास हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें एमएलए के अपनी मर्ज़ी से इस्तीफ़े देने की वजह से सरकारी खर्च पर उपचुनाव कराने के लिए वित्तीय जवाबदेही की मांग करने वाली उनकी जनहित (PIL) को खारिज कर दिया गया था। याचिकाकर्ता चुनाव व्यय सुरक्षा सिस्टम शुरू करने के लिए निर्देश मांग रहे हैं, जिसके तहत अगर कोई एमएलए बिना किसी कानूनी वजह के इस्तीफा देता है, तो उसे दोबारा चुनाव लड़ने से पहले उपचुनाव के खर्च के बराबर रकम जमा करनी होगी।

ऐसे लोगों को चुनाव लड़ने से वंचित करने की मांग 

वह ऐसे एमएलए को चुनाव लड़ने से पांच साल के लिए वंचित करने की भी मांग कर रहे हैं। याचिका में कहा गया है कि 4 मई को तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के कुछ ही सप्ताह के भीतर AIADMK के छह विधायकों ने अपनी सीटों से इस्तीफ़ा दे दिया और उसके बाद सत्ताधारी दल में शामिल हो गए। इन विधायकों के इस्तीफे विश्वास प्रस्ताव के दौरान पार्टी से अलग वोट देने के लिए अयोग्यता की कार्रवाई के दौरान आए। याचिका में कहा गया है कि, इस्तीफों के चलते विधायकों को लंबित कार्रवाई से बचने और दूसरी पार्टी से चुनाव लड़ने में आसानी हुई। इसके बदले हुए इलेक्शन ने सरकारी राजस्व पर बोझ बढ़ाया। 

इस्तीफा देने वालों से लिया जाए उपचुनाव का खर्च 

इसमें आगे कहा गया है कि चुनाव आयोग ने 2004 में चुनावी सुधारों के अपने प्रस्तावों में सिफारिश की थी कि अपनी सीटों से इस्तीफा देने वाले और उपचुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को इससे जुड़े खर्च उठाने चाहिए, लेकिन यह सिफारिश अभी तक लागू नहीं हुई है। मद्रास हाई कोर्ट के राहत देने से इनकार करने के बाद याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाई कोर्ट ने कहा कि प्रस्तावित वित्तीय सुरक्षा और पांच साल की अयोग्यता चुनावी कानून में नए प्रावधान जोड़ देगी। हाई कोर्ट ने कहा कि एक नया वित्तीय और सज़ा देने वाला ढांचा बनाने के लिए राहत मांगी गई है। यह न्यायिक निर्देशों की जगह कानूनी नीति के दायरे में आता है। 24 सितंबर को, हाई कोर्ट ने कहा, "विधायी सीट से इस्तीफा देने का अधिकार अपने आप में सदन की सदस्यता को नियंत्रित करने वाली संवैधानिक योजना का एक पहलू है और यह न्यायिक आदेश द्वारा लगाई गई अतिरिक्त-कानूनी शर्तों के अधीन नहीं हो सकता है।

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