राहुल गांधी पर सुधांशु त्रिवेदी का निशाना, बोले- जनता का समर्थन मेहनत से मिलता है, घूमने-फिरने से नहीं
खबर सार :-
नई दिल्ली, भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता एवं सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें समझ लेना चाहिए कि वह पूरी तरह से नाकाम हो चुके हैं। जनता और उनके साथ के कई सांसद व विधायक उनके साथ नहीं हैं। देश को नुकसान पहुंचाने वाला आंदोलन चलाने का नतीजा उनको मिला है।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली। भाजपा के प्रवक्ता एवं सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने पिछले दिनों दिल्ली की सडकों पर किए गए प्रदर्शन को अफसोसजनक कहा है। त्रिवेदी ने कहा है कि विदेश यात्रा से लौटने के बाद राहुल गांधी भारत की अर्थव्यवस्था की बात कर रहे हैं। त्रिवेदी ने आज राहुल को सबक सीखने के लिए कहा है।
दरअसल, पिछले कई दिनों से राहुल गांधी पर विदेश जाने के मामले मे घेरा जा रहा है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने तो उनको तीस साल तक सत्ता में नहीं आने की चुनौती दी है। शाह ने तब भी दिल्ली में ही कहा था कि ईवीएम पर तो कभी चुनाव आयोग पर और कभी भाजपा को आरोपी बनाते हैं।
जनता के बीच जाकर मेहनत करने की सलाह दी
त्रिवेदी ने आज राहुल गांधी पर लंबी बात की। भारत की चुनावी प्रक्रिया पर राहुल के आरोपों को बतंगड़ तथा कांग्रेस को जनता के बीच जाकर मेहनत करने की सलाह दी। त्रिवेदी ने कहा कि देश में भ्रम और अस्थिरता पैदा करने की कोशिश करते रहे हैं। एमएलसी चुनावों के नतीजों ने कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति स्पष्ट कर दी है। बता दें कि कांग्रेस पार्टी इन एमएलसी चुनावों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में नाकाम रही है। यह चुनाव बैलेट बॉक्स और बैलेट पेपर के जरिए कराए गए थे। फिर भी कांग्रेस अपना प्रभाव नहीं दिखा पाई। अगर कांग्रेस नेताओं की भाषा में कहें तो पार्टी अपना अस्तित्व तक महसूस कराने में विफल रही है।
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राहुल गांधी की अराजकता फैलाने की उम्मीदें धराशायी
यहां प्रधानमंत्री जनता के बीच रहते हैं। इसी बात को आज त्रिवेदी ने उठाया। कहा कि राहुल गांधी करीब दो हफ्ते सैर-सपाटा और तफरीह करने के बाद अब भारत की अर्थव्यवस्था में समस्याएं पैदा करने के लिए आंदोलन की बात कर रहे हैं। लेकिन न जनता उनके साथ है, न विधायक। वह पूरी तरह नाकाम साबित हो चुके हैं। एमएलसी चुनावों का भी जिक्र किया गया। भाजपा सांसद ने राहुल गांधी की राजनीतिक सक्रियता पर कई प्रश्न उठाए साथ ही राजनीतिक ज्ञान भी दिया। कहा कि जमीनी स्तर पर काम करने और जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की जरूरत है। उनका कहना था कि प्रदर्शन करने से पूरी पार्टी को कुछ भी नहीं मिलने वाला है। निर्वाचन आयोग को घेरने से भी कुछ हासिल नहीं होगा।
इसबार तो ईवीएम भी नहीं थी
त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि उनका प्रदर्शन भी चुनाव आयोग के खिलाफ था। राहुल गांधी अक्सर चुनाव हारने के बाद ही ऐसे आरोप लगाते हैं। हर बार हंगामा खड़ा करते हैं। इसके बजाय मेहनत करना चाहते ही नहीं हैं। कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि चुनाव में जनता का विश्वास हासिल करने के लिए जमीन पर काम करना जरूरी है। भाजपा कहती है कि साफ होता है कि कांग्रेस के पास किसी भी चुनाव में जनता और मतदाताओं का समर्थन हासिल करने की क्षमता नहीं है, चाहे चुनाव ईवीएम से हों या बैलेट पेपर से। राहुल गांधी यह समझना ही नहीं चाहते हैं कि जनता और विधायक उनके करीब आ रहे हैं या दूर जा रहे हैं। राजनीतिक गतिविधियों को जनसमर्थन के बारे में भी वह सोचना ही नहीं चाहते हैं। वह भले ही विदेश मे घूमते रहें, लेकिन पीएम के जाने पर सवाल जरूर उठाते हैं।
किसी न किसी पर उतारना है नाराजगी
दरअसल वह कोई भी चुनाव नहीं होता है, जिसमें कांग्रेस और राहुल गांधी की पराजय नहीं होती है। जैसे ही चुनाव परिणाम सामने आते हैं, रिजल्ट खुल जाता है। राहुल गांधी चिल्लाना शुरू कर देते हैं। सबसे पहले वह ईवीएम खराब है, उसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने भ्रष्टाचार कर लिया, उसके बाद उनका ठीकरा चुनाव आयोग पर फूटता है। इस बार भी उनका लोकसभा चुनाव के बाद राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान से यही चल रहा है। लेकिन अभी पिछले दिनों वैलिड पेपर से चुनाव कराए गए।
एमएलसी चुनाव में भी कांग्रेस का नतीजा जनता ने देख लिया है। राहुल गांधी कोई इससे भी सबक मिलेगा या नहीं मिलेगा? यह तो वक्त ही बताएगा। बहरहाल? देश की जनता ने इनको पूरी तरह से नकार दिया है। हाल ही में किए गए प्रदर्शनों को कहीं भी तवज्जो नहीं मिला भला। इन्होंने सड़कों पर भीड़ जुटा ली, सुधांशु त्रिवेदी कहते हैं कि इनको मेहनत करना नहीं आता है। जनता इनसे दूर हो गई है।
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