क्षेत्रीय दलों की हार में कांग्रेस को दिख रही नई उम्मीद, भविष्य की रणनीति तैयार करने में जुटी पार्टी
खबर सार :-
पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजे आने के बाद सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी ने टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी और डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन से बात की है, जिसके बाद केरल में कांग्रेस को मिली जीत पर जश्न मनाया गया।
खबर विस्तार : -
Indian politics: राजनीति के दो बड़े महारथी ममता बनर्जी और एमके स्टालिन को विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पडा। हालांकि महाराष्ट्र के कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा, ‘’हमें तमिलनाडु के लिए दुख है, जहां हम गठबंधन में थे, लेकिन हम पश्चिम बंगाल की हार का मातम क्यों मनाएं? वहां हम मुख्य विपक्षी दल नहीं थे, इसके बजाय, आज हम केरल की जीत का जश्न मनाएंगे। ‘’उन्होंने इस बात को ढोल- नगाड़ों की गूंज के बीच कही।‘’
कांग्रेस के लिए उम्मीद
विधानसभा चुनाव के नतीजों के घोषित होने के एक दिन पहले कांग्रेस के सीनियर नेता ने साफ-साफ कहा कि टीएमसी हारने वाली है। उनका आगे कहा, ‘’सत्ता विरोधी लहर बहुत ज्यादा है। टीएमसी भ्रष्टाचार में लिप्त रहती है और लोग उसके स्थानीय दबंगों से तंग आ चुके हैं। उसकी आतंक और धमकी का राजनीति अब खत्म होनी चाहिए। जब ममता जाएंगी और बीजेपी सत्ता में आएगी, तभी भविष्य में कांग्रेस के लिए कोई उम्मीद बचेगी।‘’
वैचारिक मतभेद
इस पर बंगाल के कांग्रेस नेता की प्रतिक्रिया कोई बड़ी हैरानी वाली बात नहीं है। कांग्रेस टीएमसी के मामले में हर बात के लिए सतर्क रही है। इस बार उसने सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला था। उनका मानना था कि क्षेत्रीय पार्टीयों के मुकाबले बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस के जीत के अवसर ज्यादा दिखाई देते हैं। क्योंकि दोनों दलों के बीच वैचारिक मतभेद बहुत ज्यादा हैं। कांग्रेस के लीडर ने कहा, आज टीएमसी पूरे एसआईआर कैंपेन को लेकर धांधली का आरोप लगा रही है, लेकिन जब राहुल गांधी हरियाणा, कर्नाटक और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर धांधली के लिए प्रेस-कॉफ्रेंस कर रहे थे, तब उनकी बात पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
वोट चोरी
विपक्ष नेता के तौर पर राहुल गांधी ने अपने सुनहरी बाग वाले घर पर विपक्षी नेताओं के लिए रात के भोजन का प्रबंध किया था, जिसमें समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव सहित कई नेता पहुंचे थे, लेकिन उनमें से बहुत कम नेता ही उनके मुद्दे पर अपनी सहमति जताई। राहुल गांधी ने पावर-प्वाइंट के प्रेजेंटेशन के माध्यम से वोट चोरी के तरीके को समझाया। मीटिंग में मौजूद एक नेता ने कहा, ‘’जैसा राहुल गांधी ने समझाया था, तेजस्वी यादव और अभिषेक बनर्जी इससे सहमत नहीं हुए। महीनों बाद तेजस्वी बिहार विधानसभा चुनाव हार गए और पश्चिम बंगाल के नतीजों से यह बात और भी पक्की होती दिख रही है कि, अगर अभिषेक बनर्जी ने राहुल गींधी की बात को ज्यादा गंभीरता से लिया होता तो शायद हालात कुछ और होते।”
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