सोनिया गांधी की किताब ‘बिलॉन्गिंग’ पर विवाद, कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा का पलटवार, कहा- सरकार जिम्मेदार नहीं
खबर सार :-
सोनिया गांधी की आत्मकथा ‘बिलॉन्गिंग’ के प्रकाशन को लेकर विवाद बढ़ा। कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा ने कहा- यह लेखक और प्रकाशक के बीच का मामला है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सोनिया गांधी या प्रकाशक की ओर से इस मामले में आगे क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है।
खबर विस्तार : -
नई दिल्लीः कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की आत्मकथा ‘बिलॉन्गिंग’ को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। किताब को प्रकाशित करने से प्रकाशक पेंगुइन इंडिया के इनकार के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया कि किताब के प्रकाशन को लेकर सरकार की ओर से दबाव बनाया गया। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे लेखक और प्रकाशक के बीच का विवाद बताया है।
लेखक और प्रकाशक के बीच का मुद्दा
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने शनिवार को इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लेखक और प्रकाशक के बीच किसी मुद्दे को लेकर अंतरविरोध हो सकता है। प्रकाशक का अपना अधिकार और लेखक का अपना दृष्टिकोण होता है। उन्होंने सवाल किया कि ऐसे मामले में भारत सरकार को बीच में लाने की जरूरत ही क्या है। शेखावत ने कहा कि अगर किसी प्रकाशक को किसी किताब के प्रकाशन को लेकर आपत्ति है, तो लेखक किसी दूसरे प्रकाशक की तलाश कर सकता है। इसे राजनीति में लाने का कोई कारण नहीं है।
भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने भी कांग्रेस के आरोपों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि कांग्रेस सरकार पर दबाव बनाने के आरोप क्यों लगा रही है। शाहदेव के मुताबिक, पेंगुइन इंडिया और रैंडम हाउस इंडिया की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह किताब उनकी प्रकाशित पुस्तक नहीं है।
उन्होंने कहा कि प्रकाशक ने अपने आधिकारिक बयान में यह स्पष्ट किया था कि किताब के कुछ हिस्सों को हटाने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन सोनिया गांधी इसके लिए सहमत नहीं थीं। शाहदेव ने कहा कि ऐसे में यह मामला साफ तौर पर लेखक और प्रकाशक के बीच का दिखाई देता है। उन्होंने सवाल किया कि इसमें सरकार की भूमिका कहां से आ गई।
विवादित अंश को सार्वजनिक करने की मांग
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि पहले भी कई मौकों पर ऐसा हुआ है, जब किसी किताब के कंटेंट को लेकर प्रकाशक ने आपत्ति जताई हो। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकाशक को लगता है कि कोई सामग्री प्रकाशित करने से विवाद या कानूनी समस्या पैदा हो सकती है, तो उसे प्रकाशन से इनकार करने का अधिकार है। भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि भाजपा का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है।
शाहदेव ने इस दौरान सोनिया गांधी से किताब में विवादित बताए जा रहे अंश को सार्वजनिक करने की मांग भी की। उन्होंने सवाल किया कि आखिर पेंगुइन ने किन हिस्सों पर आपत्ति जताई थी। क्या किताब में सोनिया गांधी ने अपनी सास से जुड़ी कोई ऐसी बात लिखी थी, जिसे प्रकाशक प्रकाशित नहीं करना चाहता था? क्या उनके देवर के बारे में कोई ऐसी बात लिखी गई थी, जिस पर आपत्ति हुई? या फिर विवाद का कोई और कारण है? उन्होंने कहा कि इन सवालों पर सोनिया गांधी की ओर से अभी तक स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
राजनीतिक रंग देने का आरोप
भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने भी कहा कि किसी किताब के प्रकाशन में लेखक और प्रकाशक दोनों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। उन्होंने कहा कि किताब में मौजूद तथ्यों और कंटेंट को लेकर लेखक के साथ-साथ प्रकाशक की भी जवाबदेही होती है। यदि किसी अंश को लेकर समस्या हो या कोई ऐसी सामग्री प्रकाशित हो जाए, जिससे विवाद अथवा कानूनी मामला खड़ा हो सकता है, तो प्रकाशक को भी उसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
आरपी सिंह ने कहा कि संभव है कि पेंगुइन को किताब की सामग्री में दिए गए तथ्यों की सत्यता को लेकर कुछ चिंताएं रही हों। इसी वजह से प्रकाशक ने किताब को प्रकाशित नहीं करने का फैसला किया हो। उन्होंने इसे सामान्य प्रकाशन प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए कहा कि इस मामले को राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है।
वहीं, बिहार सरकार में मंत्री अशोक कुमार चौधरी ने मामले पर अलग रुख अपनाते हुए कहा कि उन्हें इस विवाद की वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि सोनिया गांधी की किताब को लेकर किसने दबाव डाला, पेंगुइन ने क्या किया या क्या नहीं किया। इस मुद्दे पर चर्चा जरूर हुई है, लेकिन वास्तविक तथ्य क्या हैं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
तथ्यों को लेकर उठ रहे सवाल
भाजपा नेता टीआर श्रीनिवास ने भी किताब के प्रकाशन से जुड़े विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह सोनिया गांधी की किताब है, जिसे पेंगुइन को प्रकाशित करना था। उन्होंने पूरे घटनाक्रम के समय को राजनीतिक और गैर-साहित्यिक बताया। उनका कहना था कि जब भी कोई किताब प्रकाशित होती है, तो उसमें दिए गए तथ्यों का सही होना बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में प्रकाशक की ओर से किसी सामग्री पर आपत्ति जताना असामान्य बात नहीं है।
फिलहाल ‘बिलॉन्गिंग’ को लेकर विवाद का केंद्र यह सवाल है कि पेंगुइन इंडिया ने किताब के किन अंशों पर आपत्ति जताई और प्रकाशन से पीछे हटने के पीछे वास्तविक कारण क्या था। कांग्रेस इसे सरकार के कथित दबाव से जोड़ रही है, जबकि भाजपा इसे लेखक और प्रकाशक के बीच का निजी एवं प्रकाशन संबंधी विवाद बता रही है।
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