NEET PG विवाद पर सीजेपी का हमला, आशुतोष रांका बोले- परीक्षा व्यवस्था की संरचनात्मक खामियां दूर करे सरकार
खबर सार :-
NEET PG परीक्षा में तकनीकी समस्याओं को लेकर सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने परीक्षा केंद्रों की ऑडिटिंग, एजेंसियों की जवाबदेही और तकनीकी सुधार की मांग की।
खबर विस्तार : -
जयपुर: NEET PG परीक्षा के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित होने और तकनीकी समस्याओं को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने सरकार और परीक्षा प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि जब तक परीक्षा प्रणाली से जुड़ी संरचनात्मक समस्याओं का समाधान नहीं किया जाएगा, तब तक इस तरह की अनियमितताएं और विवाद सामने आते रहेंगे। उन्होंने परीक्षा केंद्रों की ऑडिटिंग, परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही और तकनीकी तैयारियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि सरकार परीक्षा प्रबंधन की मूल समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय दावों और प्रचार तक सीमित है। उन्होंने कहा कि परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था में बिजली, सर्वर और तकनीकी संसाधनों से जुड़ी गड़बड़ियां सीधे तौर पर अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित करती हैं। ऐसे में परीक्षा केंद्रों और संचालन एजेंसियों की जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
परीक्षा केंद्रों की ऑडिटिंग पर उठाए सवाल
सीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि परीक्षा केंद्रों की नियमित और स्वतंत्र ऑडिटिंग होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन केंद्रों पर बार-बार तकनीकी या प्रशासनिक समस्याएं सामने आती हैं, उन्हें परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी कैसे दी जा रही है। उन्होंने राजस्थान सरकार से मांग की कि जिन परीक्षा केंद्रों पर लगातार अव्यवस्थाएं सामने आ रही हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। जरूरत पड़ने पर ऐसे केंद्रों को भविष्य में परीक्षा संचालन से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। रांका ने कहा कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही भी स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में यह तय किया जा सके कि जिम्मेदारी किसकी है।
आयुष पीजी परीक्षा का भी किया जिक्र
आशुतोष रांका ने हाल ही में आयोजित आयुष पीजी परीक्षा का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि उस परीक्षा में भी इसी तरह की समस्याएं सामने आई थीं और अब NEET PG परीक्षा के दौरान भी अभ्यर्थियों को तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं परीक्षा प्रणाली की तैयारियों पर सवाल खड़े करती हैं। उनके मुताबिक, सरकार को केवल परीक्षा के सफल आयोजन के आंकड़े प्रस्तुत करने के बजाय उन अभ्यर्थियों की समस्याओं पर भी ध्यान देना चाहिए, जिन्हें तकनीकी खामियों के कारण परीक्षा देने में परेशानी होती है।
बिजली और सर्वर की समस्या पर सरकार से जवाब मांगा
सीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि परीक्षा के दौरान बिजली और सर्वर जैसी बुनियादी तकनीकी समस्याओं का सामने आना चिंता का विषय है। उन्होंने सवाल किया कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार के पास क्या प्रभावी योजना है और परीक्षा केंद्रों को तकनीकी आपात स्थिति से निपटने के लिए किस तरह तैयार किया जाता है। उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्रों पर वैकल्पिक बिजली व्यवस्था, पर्याप्त तकनीकी संसाधन और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। परीक्षा प्रक्रिया शुरू होने से पहले तकनीकी व्यवस्थाओं की जांच और मॉक टेस्ट जैसी व्यवस्था को भी अनिवार्य किया जाना चाहिए।
छात्रों की आवाज दबाने का लगाया आरोप
रांका ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की मांगों और उनकी समस्याओं को सुनने के बजाय विरोध करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने पर अधिक ध्यान दे रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि छात्रों की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं किया गया तो देशभर में आंदोलन और विरोध प्रदर्शन तेज हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों का प्रदर्शन करना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। युवाओं की समस्याएं वास्तविक हैं और सरकार का दायित्व है कि वह उनकी बात सुने और समाधान प्रस्तुत करे। उन्होंने आईआईटी दिल्ली सहित विभिन्न शिक्षण संस्थानों में छात्रों की ओर से उठाए जा रहे मुद्दों का भी उल्लेख किया।
आंदोलन बढ़ने की चेतावनी
सीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि यदि प्रशासन छात्रों की मांगों पर ध्यान नहीं देगा तो विरोध प्रदर्शन जारी रहना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि छात्रों को डराने या उनकी आवाज दबाने की कोशिश समस्या का समाधान नहीं है। सरकार को बातचीत के जरिए छात्रों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीकी सुधार सुनिश्चित किए जाने की जरूरत है। इससे न केवल अभ्यर्थियों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता भी मजबूत होगी।
रांका ने अंत में कहा कि यदि सरकार का ध्यान आंदोलन को कमजोर करने और आंदोलनकारियों को डराने-धमकाने पर रहेगा, तो ऐसे आंदोलन और बड़े हो सकते हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि परीक्षा व्यवस्था की कमियों की समीक्षा कर ठोस सुधार किए जाएं और अभ्यर्थियों को भविष्य में बिजली, सर्वर या अन्य तकनीकी समस्याओं के कारण परेशानी का सामना न करना पड़े।
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