टिकट बंटवारे को लेकर BJP में घमासान, दो मंडल अध्यक्षों समेत कई पदाधिकारियों ने दिया इस्तीफा

खबर सार :-

अलवर में नगर निगम चुनाव के टिकट बंटवारे से नाराज दो मंडल अध्यक्षों समेत कई भाजपा पदाधिकारियों ने इस्तीफा दिया। उम्मीदवार चयन प्रक्रिया पर भी सवाल उठे। नगर निगम चुनाव से पहले अलवर भाजपा में सामने आए इन सामूहिक इस्तीफों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।
BJP में टिकट बंटवारे पर घमासान, दो मंडल अध्यक्षों ने दिया इस्तीफा

खबर विस्तार : -

अलवर: राजस्थान में प्रस्तावित नगर निगम पार्षद चुनावों के लिए टिकट वितरण को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर नाराजगी सामने आई है। अलवर में टिकट बंटवारे से असंतुष्ट दो मंडल अध्यक्षों ने अपनी-अपनी कार्यकारिणी समितियों के साथ इस्तीफा दे दिया है। दोनों मंडल अध्यक्षों ने अपने इस्तीफे भाजपा के जिला अध्यक्ष अशोक गुप्ता को सौंपे हैं। इस घटनाक्रम के बाद पार्टी संगठन में हलचल तेज हो गई है।

अलवर नगर निगम के कुल 65 वार्डों में से 33 वार्ड इन दोनों मंडलों के अंतर्गत आते हैं। श्री विवेकानंद मंडल में 17 वार्ड और श्री केशव मंडल में 16 वार्ड शामिल हैं। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले दोनों मंडलों के पदाधिकारियों का सामूहिक इस्तीफा भाजपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पूरे मामले पर प्रतिक्रिया जानने के लिए भाजपा जिला अध्यक्ष अशोक गुप्ता से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

विवेकानंद मंडल की पूरी कार्यकारिणी ने दिया इस्तीफा

श्री विवेकानंद मंडल की कार्यकारी समिति के 15 सदस्यों ने इस्तीफा सौंपा है। इनमें मंडल अध्यक्ष जितेंद्र सिंह राठौर भी शामिल हैं। राठौर ने बताया कि उन्होंने वार्ड 25 से अपनी पत्नी हुकम कंवर के लिए भाजपा का टिकट मांगा था। हालांकि, पार्टी की ओर से वार्ड 25 के लिए रमाकांत यादव को टिकट दिए जाने की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि रमाकांत यादव पहले किसी अन्य वार्ड से चुनाव लड़ चुके हैं।

जितेंद्र सिंह राठौर ने उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वार्ड 25 सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित है, इसके बावजूद पार्टी ने ओबीसी उम्मीदवार को टिकट दिया है। इस फैसले को लेकर उन्होंने नाराजगी जताते हुए संगठनात्मक पद से इस्तीफा दे दिया। राठौर के इस्तीफे के साथ मंडल कार्यकारिणी के अन्य सदस्यों का इस्तीफा भी पार्टी के लिए चिंता का विषय बन गया है। चुनावी तैयारियों के बीच एक ही मंडल से बड़ी संख्या में पदाधिकारियों के हटने से स्थानीय संगठन में असंतोष का संकेत मिल रहा है।

केशव मंडल के पदाधिकारी भी नाराज

इसी तरह श्री केशव मंडल में भी टिकट वितरण को लेकर नाराजगी देखने को मिली है। मंडल की कार्यकारी समिति के आठ पदाधिकारियों ने जिला अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। इनमें मंडल अध्यक्ष महेश निहलानी भी शामिल हैं।

इस्तीफा देने वाले पदाधिकारियों का आरोप है कि उम्मीदवारों का चयन पार्टी की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नहीं किया गया। उनका दावा है कि पार्टी की बैठकों के दौरान यह संकेत दिया गया था कि टिकट वितरण से पहले मंडल अध्यक्षों और उनकी कार्यकारिणी समितियों से सलाह-मशविरा किया जाएगा। हालांकि, पदाधिकारियों के मुताबिक अंतिम उम्मीदवार तय करते समय उनकी राय को महत्व नहीं दिया गया। इस घटनाक्रम ने भाजपा के स्थानीय संगठन में चल रही नाराजगी को सामने ला दिया है। पार्टी के भीतर असंतोष को शांत करने के लिए वरिष्ठ नेताओं की ओर से प्रयास किए जाने की भी खबर है।

देर रात तक मनाने की कोशिश

सूत्रों के अनुसार, इस्तीफा देने वाले पदाधिकारियों और नेताओं को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए भाजपा के कई वरिष्ठ नेता देर रात तक समझाने की कोशिश करते रहे। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि चुनाव से पहले संगठन में पैदा हुई नाराजगी को दूर किया जाए और सभी कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चुनावी मैदान में उतरा जाए।

इस बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता सुरेश मेहता ने भी सोशल मीडिया के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर की है। मेहता को राज्य के वन राज्य मंत्री संजय शर्मा का करीबी माना जाता है। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि पार्टी को अब अनुभवी और पुराने नेताओं की जरूरत नहीं है। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि ऐसे नेताओं को घर बैठ जाना चाहिए और उनकी जगह स्वार्थी लोगों तथा चापलूसों को ले लेनी चाहिए। मेहता की इस टिप्पणी को आगामी नगर निगम चुनावों में टिकट वितरण को लेकर चल रही नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, उन्होंने अपनी पोस्ट में नाराजगी की कोई स्पष्ट वजह नहीं बताई है।

OBC मोर्चा के जिला महासचिव ने भी छोड़ी पार्टी

टिकट वितरण और संगठन के कामकाज को लेकर नाराजगी का एक और मामला सामने आया है। भाजपा ओबीसी मोर्चा के जिला महासचिव विजेंद्र गुर्जर ने भी जिला अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। उन्होंने केवल संगठनात्मक पद से ही नहीं, बल्कि पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है। अपने इस्तीफे में विजेंद्र गुर्जर ने संगठन के मौजूदा कामकाज को लेकर कार्यकर्ताओं में बढ़ती नाराजगी का उल्लेख किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से पार्टी के लिए काम करने वाले समर्पित जमीनी कार्यकर्ताओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। गुर्जर ने कहा कि जब पार्टी के भीतर वफादार कार्यकर्ताओं की गरिमा और उनके विचारों की रक्षा नहीं की जा सकती, तो किसी संगठनात्मक पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है।

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