विपक्ष के नेता कह रहे हैं डरी हुई है सरकार, ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लेकर रहेंगे

खबर सार :-

शहर का ऐतिहासिक स्थान जंतर-मंतर अब प्रदर्शन स्थल नहीं रहा। सरकार की ओर से प्रदर्शन के लिए तीन नए स्थान घोषित किए गए हैं। इनमें ही प्रदर्शन कर सकते हैं। इसके अलावा अन्य स्थानों पर कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।
अब जंतर-मंतर पर नहीं कर पाएंगे प्रदर्शन, कांग्रेस को नहीं पसंद आया परिवर्तन

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली, करीब एक महीने से मुख्य निर्वाचन आयुक्त और एस आई आर को लेकर जंतर मंतर प्रदर्शन का स्थल बन चुका था। इस मामले में पिछले दिनों कोर्ट ने कहा था, अच्छा हो कि कहीं और धरना प्रदर्शन की जगह तय की जाए । जंतर मंतर ऐतिहासिक ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए पर्यटन स्थल है। यहां पर प्रदर्शन होने से आवागमन प्रभावित होता है। लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना अनावश्यक ही करना पड़ जाता है। यह राजनीतिक प्रदर्शन है और आए दिन होते रहते हैं।

प्रदूषण और गंदगी को दावत की व्यवस्था

इन दिनों एसआईआर और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लेकर यहां पर रोज प्रदर्शन हो रहे हैं। सरकार की ओर से धारा 163 लगाए जाने के बाद भी भीड़ इकट्ठी हो जाती है। कई बार तो पुतले जलाने की कोशिश की जाती है। प्रदूषण और गंदगी को दावत देने की पूरी व्यवस्था लेकर आते हैं। आज इस मामले पर सरकार ने निर्णय ले लिया है। गृह मंत्रालय ने जंतर मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए जगह देने से मना कर दिया है। विपक्ष का यहां पर प्रदर्शन भी होना था, लेकिन इसे प्रदर्शन स्थल के रूप में गिने जाने वाले जंतर मंतर को अब मुक्त कर दिया गया है।

यह भी पढ़ेंःसुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले, सीजेआई सूर्यकांत ने इंडिया ब्लॉक से नहीं मिलने का कारण बताया

यानी लिस्ट से इसका नाम हटा दिया गया है। विरोध प्रदर्शन के लिए सरकार की ओर से तीन नई जगह मुकर्र की गई हैं। इनमें रामलीला मैदान बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली में सीबीडी का मैदान खुला है। अब शहर के लोगों को कई मुसीबतों से मुक्ति मिल जाएगी, लेकिन इंडिया ब्लॉक के लोगों को यह व्यवस्था पसंद नहीं आई है। उनका प्रदर्शन करना है तो जंतर मंतर पर ही करना है। बुराड़ी मैदान, पूर्वी दिल्ली और रामलीला मैदान रास नहीं आ रहा है। विपक्ष के लोग कह रहे है किं सरकार ने ऐसा निर्णय लिया है, इसका मतलब है कि वह घबराए हुए हैं। विपक्ष इन दिनों लाम बंद है।

अब हिमालय की चोटी पर प्रदर्शन करेंगे

इसका मतलब है कि वह ताकतवर है? सरकार से ज्यादा शक्तिशाली है, हो सकता है! कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह कहते हैं की पार्टी जो तय करेगी, वही होगा। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि यह  दिखता है कि वह घबराए हैं। धरना और प्रदर्शन स्थान का स्थल बदल देने पर भी विपक्ष के लोग कह रहे हैं की सरकार जनता की आवाज दबाना चाहती है। हमारा आंदोलन जारी रहेगा। यद्यपि सरकार की ओर से नहीं कहा गया है कि विपक्ष और निर्धारित तीन स्थलों पर प्रदर्शन ना करें।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने जंतर मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए तय जगह की सूची से हटाने पर कहा है कि अब हिमालय की चोटी पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। वहीं इन प्रदर्शनों के बीच पिछले दिनों सीजीपी का प्रदर्शन भी होना था, लेकिन पुलिस की सक्रियता के चलते यह कामयाब नहीं हो पाए हैं। भारतीय जनता पार्टी कह चुकी है कि देश का मूड खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं पूर्व उपराष्ट्रपति ने पिछले दिन ही कहा था कि इस तरह के आंदोलन से अराजकता का माहौल उत्पन्न होगा।

लेकिन सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा है कि विरोध प्रदर्शन के लिए तय जगह है जो इतने सालों से प्रदर्शन स्थल बना रहा है। अब शहर का कोना-कोना जंतर मंतर बन जाएगा। उनकी मांग है कि ज्ञानेश कुमार जब तक इस्तीफा नहीं देंगे, तब तक आंदोलन चलता रहेगा। कांग्रेस पार्टी के लोग हमेशा कहते रहे हैं कि लोकतंत्र खतरे में है। आज जब धरना स्थल का नाम जगह बदल गया तो एक बार फिर इनका लोकतंत्र खतरे में पड़ गया है। इसीलिए कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा है कि हम लोकतंत्र को बचाने के लिए लड़ रहे हैं।

गौरव गोगोई ने कहा कि भाजपा डर चुकी

राहुल गांधी ने कहा है कि लोकतंत्र की रक्षा करने और चुनावी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि हम अपनी मांग लेकर चौराहे,चौराहे तक प्रदर्शन करेंगे। जब तक उनकी मांग नहीं पूरी हो जाती, वह बैठने वाले नहीं हैं। बिहार के नेता तेजस्वी यादव भी कहते हैं कि लोकतंत्र खतरे में है। वह कह रहे हैं कि उन्होंने पहले ही आवाज उठाई थी। एसआईआर के खिलाफ लड़ाई शुरू की थी, लेकिन अब वोट चोरी के साथ लोकतंत्र को कुचला जा रहा है। वह चुप बैठने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा है कि संविधान की रक्षा के लिए कोई भी कुर्बानी देने के लिए तैयार हैं।

कांग्रेस के नेता गौरव गोगोई ने कहा है कि भाजपा डर चुकी है। सत्ता उसके पास ज्यादा दिन नहीं रहेगी। गौरव गोगोई ने कहा लोकतंत्र खतरे में है। सारी व्यवस्था उनके कब्जे में है। राहुल गांधी ने पहली बार इंदिरा गांधी भवन में मुद्दा उठाया था। यह बात कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कही उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन तो लंबे समय से चल रहा है। बहरहाल आने वाले दिनों में यह देखना है की ज्ञानेश कुमार पर कार्रवाई होती है या वह इस्तीफा देते हैं।

यह भी पढ़ेंः यूपी कांग्रेस में पदभार ग्रहण समारोह के दौरान बवाल, समर्थकों में भिड़ंत

अन्य प्रमुख खबरें