महाराष्ट्र : बीएमसी चुनावों में निर्विरोध 67 पार्षद चुनने पर विवाद, मनसे ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका
खबर सार :-
महाराष्ट्र बीएमसी चुनाव में 67 पार्षदों के निर्विरोध चुने जाने का मामला चर्चा का विषय बन गया है। सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर है कि चुनाव निष्पक्ष तरीके से हुआ अथवा किसी राजनीतिक दबाव व डराने-धमकाने के चलते विपक्षी उम्मीदवारों ने अपना नाम वापस ले लिया। इस मामले में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना मनसे और कांग्रेस पार्टी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मनसे ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
खबर विस्तार : -
मुंबई : महाराष्ट्र में चल रहे नगर निगम चुनावों में 67 पार्षदों के बिना विरोध चुने जाने का मुद्दा इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है। सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर है कि क्या ये चुनाव वास्तव में निष्पक्ष तरीके से हुए हैं या किसी तरह के राजनीतिक दबाव और डराने-धमकाने की वजह से विपक्षी उम्मीदवारों ने अपना नामांकन वापस ले लिया।
मनसे और कांग्रेस पार्टी ने खटखटाया बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा
इस मामले में मनसे के नेता अविनाश जाधव और कांग्रेस पार्टी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए आरोप लगाया है कि राज्य में सत्ताधारी पार्टी ने कई जगहों पर विपक्षी उम्मीदवारों को डराने, धमकाने और पैसे बांटने जैसी हरकतों के जरिए अपना नामांकन वापस लेने के लिए मजबूर किया। मनसे का कहना है कि इस तरह चुनाव की प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष नहीं रही और लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ है।
दबाव के कारण विपक्षी उम्मीदवारों के नाम वापस लेने का आरोप
कल्याण-डोंबिवली, पिंपरी-चिंचवाड़, जलगांव और छत्रपति संभाजीनगर जैसे इलाकों में बड़े पैमाने पर निर्विरोध उम्मीदवार चुने गए। विपक्ष का आरोप है कि कई जगहों पर दबाव के कारण विपक्षी उम्मीदवारों को नाम वापस लेने पर मजबूर होना पड़ा। चुनाव आयोग से कोई ठोस राहत न मिलने पर मनसे ने आखिरकार आखिरी उपाय के तौर पर हाईकोर्ट जाने का फैसला किया।
याचिका में इलेक्शन कमीशन की पारदर्शिता पर उठाए गए सवाल
याचिका में इलेक्शन कमीशन की पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए हैं और यह दावा किया गया है कि आयोग पर राज्य सरकार का दबाव है। मनसे ने कोर्ट से मांग की है कि इस मामले की हाईकोर्ट की निगरानी में जांच की जाए और जब तक यह जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक उन 67 उम्मीदवारों के रिजल्ट घोषित न किए जाएं। साथ ही, पिटीशन में जल्द सुनवाई की भी मांग की गई है ताकि चुनाव में हुई कथित अनियमितताओं का तुरंत निपटारा किया जा सके।
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