तिहाड़ जेल में बंद सज्जन कुमार का कैसे हुआ निधन, सामने आई मौत की असली वजह
खबर सार :-
कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में निधन हो गया। 84 वर्षीय सज्जन कुमार को ऑल्टर्ड सेंसोरियम की समस्या के साथ भर्ती कराया गया था।
खबर विस्तार : -
Sajjan Kumar: कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का गुरुवार को 80 साल की उम्र में निधन हो गया। बताया जा रहा है कि वह मृत अवस्था में सफदरजंग अस्पताल में में लाया गया था। वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में 1984 दंगों में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। दिल्ली हाई कोर्ट ने 14 दिसंबर 2018 को उन्हें 1984 के सिख-विरोधी दंगों के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि उन्होंने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।
तिहाड़ जेल में बंद सज्जन कुमार की कैसे हुई मौत
अस्पताल के अनुसार, सज्जन कुमार पहले से ही हाई ब्लड प्रेशर और पार्किंसंस बीमारी से पीड़ित थे। इसके अलावा, उन्हें पहले भी कई बार अस्पताल में भर्ती कराया जा चुका था।सफदरजंग अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि यह एक ऐसी मेडिकल स्थिति है जिसमें व्यक्ति की होश में रहने और अपने आस-पास की चीज़ों को समझने या उन पर प्रतिक्रिया देने की क्षमता कम होने लगती है। यह स्थिति हल्की उलझन से लेकर गहरी बेहोशी या कोमा तक हो सकती है। 'ऑल्टर्ड सेंसोरियम' (altered sensorium) अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि एक मेडिकल स्थिति है जो कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के साथ हो सकती है। इसके संभावित कारणों में स्ट्रोक, गंभीर संक्रमण या शरीर में ऑक्सीजन की कमी शामिल हो सकती है; हालाँकि, सज्जन कुमार की मौत का कारण कोई एक खास मेडिकल वजह नहीं थी। कई मेडिकल स्थितियों के एक साथ होने के कारण उनकी सेहत बिगड़ गई थी।
7 साल से जेल में बंद थे सज्जन कुमार
सज्जन कुमार दिसंबर 2018 से जेल में थे। जेल में सात साल और आठ महीने बिताने के बाद आज उनका निधन हो गया। दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें 1984 के सिख-विरोधी दंगों से जुड़े एक मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। दंगों से जुड़े एक मामले में उन्हें बरी कर दिया गया था, लेकिन दो अन्य मामलों में उन्हें दोषी ठहराया गया था। सज्जन कुमार को 27 अप्रैल 2022 को दंगों से जुड़े एक मामले में जमानत मिल गई थी, लेकिन दूसरे मामले में दोषी ठहराए जाने के कारण वह जेल में ही रहे। इस साल अप्रैल में, उन्होंने अपनी बीमार पत्नी से मिलने के लिए सुप्रीम कोर्ट से जमानत मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने अनुरोध ठुकरा दिया।
सज्जन पर सिखों की हत्या का आरोप
31 अक्टूबर 1984 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद, 1 नवंबर से दिल्ली और देश के कई अन्य हिस्सों में सिख-विरोधी दंगे भड़क उठे। दिल्ली में लगभग 2,700 और पूरे देश में करीब 3,500 लोगों की जान गई। मई 2000 में जी.टी. नानावटी आयोग का गठन किया गया। इसकी सिफारिशों के आधार पर, CBI ने 24 अक्टूबर 2005 को मामला दर्ज किया। दिल्ली में दंगों के समय सज्जन कुमार सांसद थे। दंगों को भड़काने और सिखों की हत्या से जुड़े मामलों में उन्हें आरोपी बनाया गया था। 2010 में, ट्रायल कोर्ट ने सज्जन कुमार सहित कई आरोपियों को समन जारी किया।
हालांकि 2013 में सज्जन कुमार के बरी होने के बाद CBI ने हाई कोर्ट में फैसले के खिलाफ अपील की और 17 दिसंबर 2018 को, दिल्ली हाई कोर्ट ने पांच सिखों की हत्या के लिए सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई। 2005 में दंगों के 21 साल बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद में माफी मांगी और कहा कि इस घटना ने उन्हें शर्म से सिर झुकाने पर मजबूर कर दिया।
दो मामलों में सज्जन कुमार उम्रकैद
दरअसल इन मामलों के दोबारा सामने आने के बाद, SIT ने फरवरी 2015 में सज्जन कुमार और अन्य आरोपियों के खिलाफ दो FIR दर्ज कीं। पहली FIR 1 नवंबर 1984 को जनकपुरी में सरदार सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या से संबंधित थी। दूसरी FIR उस घटना के संबंध में दर्ज की गई थी जिसमें 2 नवंबर 1984 को जनकपुरी में सरदार गुरचरण सिंह को जिंदा जला दिया गया था। इन मामलों में, कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार ने 7 जुलाई 2025 को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि वह कभी भी 1984 के सिख-विरोधी दंगों में शामिल नहीं थे और उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं था। उन्होंने जांच एजेंसी पर निष्पक्ष जांच न कर पाने का भी आरोप लगाया।
सज्जन कुमार 1984 के दंगों से जुड़े एक अन्य मामले में पहले से ही उम्रकैद की सजा काट रहे थे। दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें दिल्ली कैंट और पालम कॉलोनी इलाकों में पांच सिखों की हत्या और एक गुरुद्वारे को जलाने के मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। 1 नवंबर 1984 को सरस्वती विहार में सरदार जसवंत सिंह और उनके बेटे तरनदीप सिंह की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में सज्जन कुमार को 12 फरवरी 2025 को दोषी ठहराया गया और 25 फरवरी को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई।
सज्जन कुमार का कैसे शुरू हुआ राजनीतिक सफर
राजनीति में आने से पहले सज्जन कुमार दिल्ली में बेकरी और चाय की दुकान चलाते थे। उन्होंने 1977 में दिल्ली नगर निगम के पार्षद के रूप में राजनीतिक शुरुआत की और उन्हें दिवंगत संजय गांधी का करीबी माना जाता था। कांग्रेस के पूर्व सांसद और 1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे सज्जन कुमार का 20 अगस्त 2026 को 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
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