1984 सिख दंगों पर कोर्ट का बड़ा फैसला ! 40 साल बाद सज्जन कुमार बरी
खबर सार :-
1984 Sikh Riots Sajjan Kumar: 1984 के सिख दंगों के 40 साल बाद सज्जन कुमार को बरी कर दिया गया है। दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें जनकपुरी और विकासपुरी हिंसा मामलों में आरोपों से बरी कर दिया। जानें कोर्ट ने यह फैसला क्यों लिया और किन सबूतों की कमी थी।
खबर विस्तार : -
1984 Sikh Riots Sajjan Kumar: दिल्ली की एक अदालतों से आई एक खबर ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के जख्मों को फिर से कुरेद दिया है। दशकों पुराने इस काले अध्याय में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ आया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को जनकपुरी और विकासपुरी हिंसा मामलों में बड़ी राहत देते हुए बरी कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब पीड़ित परिवार सालों से इस उम्मीद में इंतजार कर रहे थे कि उन्हें आखिरकार पूरा न्याय मिलेगा। 78 साल के सज्जन कुमार, जिन्हें इन दंगों के पीछे मुख्य चेहरों में से एक माना जाता था, अब इस खास मामले में आरोपों से बरी हो गए हैं।
1984 Sikh Riots Sajjan Kumar: क्या है पूरा मामला
यह मामला 31 अक्टूबर, 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख बॉडीगार्ड्स द्वारा हत्या के बाद भड़के दंगों के दौरान हुई हिंसा के आरोपों से जुड़ा था। पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार पर जनकपुरी में दो सिखों, सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या और विकासपुरी में गुरचरण सिंह को जिंदा जलाने के आरोप थे। दशकों बाद, जस्टिस जीपी माथुर कमेटी की सिफारिश पर 114 मामलों को फिर से खोलने के लिए एक SIT बनाई गई थी। अगस्त 2023 में, ट्रायल कोर्ट ने औपचारिक रूप से सज्जन कुमार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए, लेकिन धारा 302 के तहत हत्या के आरोप को हटाने का फैसला किया, जिसे शुरू में SIT ने लगाया था।
सज्जन कुमार के खिलाफ नहीं मिले कोई सबूत
इस मामले में ट्रायल पिछले साल 23 सितंबर को खत्म हुआ था, जिसके बाद कोर्ट ने 22 दिसंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इससे पहले, सज्जन कुमार ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि वह निर्दोष हैं। उन्होंने कहा कि वह सपने में भी ऐसी किसी हिंसा में शामिल होने की बात नहीं सोच सकते। सज्जन कुमार ने दावा किया कि इन घटनाओं से उन्हें जोड़ने वाला कोई सबूत नहीं है और जोर देकर कहा कि वह हिंसा वाली जगहों पर मौजूद नहीं थे।
9 नवंबर, 2023 को, कोर्ट ने पीड़ित मंजीत कौर का बयान दर्ज किया, जिन्होंने कहा कि उन्होंने भीड़ के सदस्यों से सुना था कि सज्जन कुमार हिंसा के दौरान मौजूद थे, लेकिन यह भी साफ किया कि उन्होंने खुद उन्हें मौके पर नहीं देखा था। दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले एक दूसरे मामले में उनके खिलाफ एक कड़ा फैसला सुनाया था, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने "राजनीतिक संरक्षण" के कारण दशकों तक न्याय से बचने की कोशिश की और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उस सजा के खिलाफ उनकी अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
न्याय की आस में बैठे पीड़ितों को बड़ा झटका
इस फैसले के बाद सिख समुदाय और पीड़ित परिवारों में गहरी निराशा देखी जा रही है। भले ही सज्जन कुमार को इस मामले में राहत मिल गई हो, लेकिन 1984 की सड़कों की चीखें अभी भी इंसाफ का इंतजार कर रही हैं। यह फैसला भारतीय न्याय प्रणाली और जांच एजेंसियों के काम करने के तरीके पर भी कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
अन्य प्रमुख खबरें
-
जंतर-मंतर हिंसा की जांच करेगी सुप्रीम कोर्ट की हाई पावर कमेटी
2026-08-20
-
शहजाद भट्टी नेटवर्क पर एक्शन, 52 आरोपी गिरफ्तार
2026-08-20
-
भारत-जापान रक्षा संबंधों को मिली नई दिशा, इन मुद्दों पर जोर
2026-08-20
-
राजीव गांधी की जयंती पर PM मोदी और सोनिया-राहुल ने दी श्रद्धांजलि
2026-08-20
-
दिल्ली जल बोर्ड घोटाला: सत्येंद्र जैन न्यायिक हिरासत में, जमानत पर 25 अगस्त को होगी सुनवाई
2026-08-19
-
दिल्ली सीएनजी पंप हादसा: ट्रक में सिलेंडर फटने से 3 की मौत, 6 घायल
2026-08-19
-
सेना और शाह पर टिप्पणी का मामला, महुआ मोइत्रा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट
2026-08-19
-
केंद्रीय कैबिनेट ने 9450 करोड़ की रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी
2026-08-19
-
कलकत्ता हाई कोर्ट की सख्ती: शिक्षकों की जनगणना ड्यूटी पर फैसला सुरक्षित
2026-08-19
-
अमेठी: शौचालय की खुदाई में मिले 29 प्राचीन तोप के गोले, पुरातत्व विभाग ने की पुष्टि
2026-08-19
-
विनेश फोगाट ने राजनीतिक सत्ता को लेकर बृजभूषण शरण सिंह पर निशाना साधा
2026-08-19
-
बाढ़ को लेकर परेशान हैं ग्रामीण, संपर्क से कट गया भागलपुर का दिलौरी गांव
2026-08-18
-
वर्ल्ड फाटोग्राफी डे की कब से हुई शुरूआत, जानें... पूरी कहानी
2026-08-18
-
JSSC-CGL समेत परीक्षाएं रद्द, छात्रों ने खत्म की भूख हड़ताल, अब कानून की मांग
2026-08-18
-
सरकार का परियोजनाओं के क्रियान्वयन, निवेश और उत्पादन शुरू कराने पर जोर
2026-08-18