उत्तराखंड चुनाव की तैयारी में जुटीं मायावती, मतदाता सूची से लेकर बूथ संगठन तक की समीक्षा

खबर सार :-

बसपा प्रमुख मायावती ने उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा की। एसआईआर के बाद मतदाता सूची, बूथ संगठन और उम्मीदवार चयन में तेजी के निर्देश दिए।
मायावती ने की उत्तराखंड चुनाव तैयारियों की समीक्षा, लखनऊ में जुटेंगे कार्यकर्ता

खबर विस्तार : -

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी की तैयारियों को तेज करते हुए रविवार को उत्तराखंड के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ अहम बैठक की। बसपा के केंद्रीय कैंप कार्यालय, माल एवेन्यू में हुई बैठक में उत्तराखंड में चुनावी तैयारियों के साथ-साथ मतदाता सूची, बूथ स्तर पर संगठन के पुनर्गठन और मजबूत उम्मीदवारों के चयन की प्रगति की समीक्षा की गई।

बैठक में एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के बाद उत्तराखंड की मतदाता सूची में हुए बदलावों पर भी चर्चा हुई। बसपा के मुताबिक, एसआईआर प्रक्रिया के बाद राज्य की मतदाता सूची से करीब नौ लाख नाम हटाए गए हैं। मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि गरीब, युवा, महिलाएं और कमजोर वर्गों के लोग अपने संवैधानिक मताधिकार से वंचित न रह जाएं। मायावती ने मतदाता सूची में नामों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने और जिन पात्र लोगों के नाम सूची से हट गए हैं, उनके नाम दोबारा शामिल कराने के लिए पार्टी स्तर पर प्रयास तेज करने को कहा। उन्होंने बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने और मतदाता सूची से जुड़े मामलों को समयबद्ध तरीके से सुलझाने पर जोर दिया।

बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने पर जोर

बसपा प्रमुख ने उत्तराखंड में पोलिंग बूथ स्तर तक पार्टी कमेटियों के पुनर्गठन का काम तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने संगठनात्मक ढांचे में सामने आई कमियों को चिन्हित कर उन्हें जल्द दूर करने को कहा। बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए संभावित उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों से मजबूत और जिताऊ उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा, ताकि चुनाव से पहले संगठन को पूरी तरह सक्रिय किया जा सके। बसपा की बैठक में उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश और पंजाब में होने वाले आगामी चुनावों को लेकर भी संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा की गई। पार्टी नेतृत्व ने इन राज्यों में बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और चुनावी तैयारियों को गति देने पर जोर दिया।

भाजपा सरकार पर मायावती का हमला

मायावती ने उत्तराखंड की भाजपा सरकार की कार्यशैली पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार जनहित और जनकल्याण के मुद्दों पर अपेक्षित ध्यान देने के बजाय बड़े पूंजीपतियों और धन्नासेठों के हितों को अधिक प्राथमिकता देती दिखाई देती है। बसपा प्रमुख ने चुनाव में धनबल के इस्तेमाल को भी अहम मुद्दा बताया। उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों से कहा कि बड़े पूंजीपतियों के धनबल के जरिए चुनावों को प्रभावित करने की कोशिशों समेत जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रभावी तरीके से जनता के बीच उठाया जाए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि चुनावी तैयारियों के दौरान जनता के बीच पार्टी की नीतियों और मुद्दों को मजबूती से पहुंचाया जाए तथा संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय रखा जाए।

कांशीराम की पुण्यतिथि की तैयारियों पर भी चर्चा

बैठक में बसपा संस्थापक कांशीराम की 9 अक्टूबर को होने वाली पुण्यतिथि की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से इसे पूर्व निर्देशों के अनुरूप पूरी मिशनरी भावना के साथ मनाने का आह्वान किया। मायावती ने बताया कि उत्तर प्रदेश-दिल्ली सीमा पर बसपा सरकार द्वारा स्थापित बहुजन प्रेरणा केंद्र में फिलहाल रखरखाव से संबंधित सरकारी कार्य चल रहा है। ऐसे में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने पर संभावित दुर्घटना की आशंका को देखते हुए इस वर्ष वहां कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा। इसके बजाय उत्तर प्रदेश के सभी मंडलों से बसपा कार्यकर्ता और समर्थक राजधानी लखनऊ पहुंचेंगे और विशाल गुम्बद आकार के मान्यवर कांशीराम स्मारक स्थल पर श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे। वहीं, देश के अन्य राज्यों में बसपा कार्यकर्ताओं की ओर से जोन स्तर पर खुली संगोष्ठियों का आयोजन कर कांशीराम को श्रद्धांजलि दी जाएगी।

चुनावी मोड में संगठन को सक्रिय करने की कवायद

बैठक के दौरान मायावती ने पार्टी संगठन को पूरी तरह चुनावी मोड में सक्रिय करने पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए मतदाता सूची से लेकर बूथ कमेटियों और उम्मीदवारों के चयन तक सभी स्तरों पर तैयारियों को तेज किया जाना चाहिए। बसपा नेतृत्व का फोकस अब बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने, मतदाता सूची में पात्र लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने और चुनावी मैदान के लिए मजबूत उम्मीदवार तैयार करने पर है। उत्तराखंड के साथ उत्तर प्रदेश और पंजाब में भी संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा इस बात का संकेत है कि पार्टी आगामी चुनावी मुकाबलों के लिए अपनी जमीनी तैयारी को और मजबूत करने में जुट गई है।

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