Dimagi Naxal: पीएम मोदी के भाषण पर केजरीवाल ने साधा निशाना, पूछा-‘दिमागी नक्सली कौन है?’

खबर सार :-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि सरकार से सवाल पूछने और बेहतर सुविधाओं की मांग करने वाला नागरिक क्या दिमागी नक्सली है?
‘दिमागी नक्सली कौन है?’ PM मोदी के बयान पर केजरीवाल का हमला

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लालकिले से दिए गए भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री के इस बयान पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। केजरीवाल ने सवाल किया कि आखिर ‘दिमागी नक्सली’ कौन है? उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति सरकार से सवाल करता है, व्यवस्था में बदलाव की मांग करता है और आम जनता के लिए बेहतर सुविधाओं की आवाज उठाता है, तो क्या उसे भी ‘दिमागी नक्सली’ कहा जाएगा?

केजरीवाल ने कहा कि जो व्यक्ति देशभक्ति की बात करता है और देश की समस्याओं को लेकर अपनी आवाज बुलंद करता है, क्या वह दिमागी नक्सली है? उन्होंने कहा कि देश में जो व्यक्ति सवाल पूछता है, उसे इस तरह के नाम से संबोधित किया जा रहा है। जो व्यक्ति सड़ी-गली व्यवस्था को बदलना चाहता है और उसमें सुधार की मांग करता है, उसे भी नक्सली बताया जा रहा है।

बच्चों के लिए अच्छे स्कूल मांगना भी अपराध?

आप संयोजक ने प्रधानमंत्री के बयान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर कोई माता-पिता अपने बच्चों के लिए अच्छे सरकारी स्कूल चाहते हैं, तो क्या वे दिमागी नक्सली हैं? उन्होंने बेहतर सरकारी अस्पतालों और आम लोगों के लिए जरूरी सुविधाओं की मांग का भी मुद्दा उठाया। केजरीवाल ने कहा कि आम नागरिक अगर साफ पानी, बेहतर बिजली व्यवस्था, सीवर और ड्रेनेज जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग करता है, तो क्या वह देश विरोधी हो गया? उनका कहना था कि जनता का काम सिर्फ सरकार की बात मानना नहीं है, बल्कि लोकतंत्र में नागरिकों को अपनी समस्याओं को उठाने और सरकार से जवाब मांगने का अधिकार भी है।

उन्होंने भ्रष्टाचार के मुद्दे को भी प्रधानमंत्री के बयान से जोड़ते हुए सवाल किया कि अगर कोई व्यक्ति भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाता है और देश में ईमानदार तथा जवाबदेह शासन की मांग करता है, तो क्या उसे भी ‘दिमागी नक्सली’ कहा जाएगा?

‘सरकार से सवाल करने वाला भी दिमागी नक्सली?’

केजरीवाल ने कहा कि जो व्यक्ति प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी से डरता नहीं है तथा सरकार से सवाल करने की हिम्मत रखता है, क्या उसे भी इसी नजरिए से देखा जाएगा। उन्होंने सवालों के जरिए यह बताने की कोशिश की कि लोकतंत्र में सरकार के कामकाज पर सवाल उठाना और व्यवस्था में सुधार की मांग करना नागरिकों का अधिकार है। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति देश में मौजूद समस्याओं को लेकर आवाज उठाता है, तो उसकी बात सुनी जानी चाहिए। सवाल पूछने वाले नागरिक को किसी ऐसी विचारधारा से जोड़ना उचित नहीं है, जिसका संबंध हिंसा या देश विरोधी गतिविधियों से हो।

आंबेडकर का उदाहरण देकर साधा निशाना

केजरीवाल ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर का उदाहरण देते हुए भी प्रधानमंत्री के बयान पर सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति समानता, अधिकार और सामाजिक न्याय की बात करता है, तो क्या उसे भी ‘दिमागी नक्सली’ कहा जाएगा? उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि देश में बदलाव की मांग करना किसी अपराध की श्रेणी में नहीं आना चाहिए। उनका कहना था कि जनता बेहतर व्यवस्था, ईमानदार शासन और अपने अधिकारों की मांग करती है तो उसकी आवाज को सुना जाना चाहिए।

PM मोदी ने लालकिले से क्या कहा था?

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लालकिले से राष्ट्र को संबोधित किया था। अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा था कि देश में हथियारबंद नक्सलवाद को काफी हद तक समाप्त किया जा चुका है। हालांकि, उन्होंने ‘दिमागी नक्सलियों’ से भी सतर्क रहने की जरूरत बताई थी। प्रधानमंत्री के इसी बयान के बाद विपक्षी दलों की ओर से प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। आम आदमी पार्टी के नेताओं ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना, नागरिक सुविधाओं की मांग करना और व्यवस्था में सुधार की आवाज उठाना जनता का अधिकार है।

आप नेताओं ने प्रधानमंत्री के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि असहमति और सवालों को किसी आपराधिक या राष्ट्रविरोधी विचारधारा से जोड़ना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। पार्टी का कहना है कि सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वाले नागरिकों को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार होना चाहिए।

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