केंद्र सरकार ने 12 वर्षों में लोकतंत्र की नींव को खोखला करने का षड्यंत्र किया: मल्लिकार्जुन खड़गे

खबर सार :-

कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग और केद्र सरकार पर देश की लोकतांत्रिक परंपरा पर कब्जा जमाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि एक बार फिर देश को वोट के हक के लिए लड़ना पड़ेगा।
मताधिकार के लिए एक बार फिर लड़ने का वक्त आ गया, मल्लिकार्जुन खड़गे

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली, कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की बैठक मंगलवार को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में हुई। इसमें मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की जमकर निंदा की। वर्किंग कमेटी के सदस्यों के साथ सोनिया गांधी, लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी भी मौजूद रहे।

पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग पर कई आरोप लगाए और बताया कि जिस तरह से अंग्रेजों ने वोट डालने का अधिकार छीन रखा था, वैसे ही आज भी है। कहा कि कांग्रेस के कंधों पर अंग्रेजी राज की तरह ही भारत के लोकतंत्र और संविधान को बचाने की जिम्मेदारी है। खड़गे ने बताया कि आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों से हमने वोट का हक छीना, उसके लिए फिर लड़ना पड़ रहा है। उनका निशाना चुनाव आयोग पर था। ज्ञानेश कुमार मुख्य निर्वाचन आयुक्त हैं।

लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगा

कांग्रेस उन पर भाजपा को साथ देकर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगा रही है। खड़गे इसीलिए कहते हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त केंद्र सरकार की कठपुतली बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के संबंध और उनके कार्यकाल का जिक्र किया और कहा कि लोकतंत्र की उस नींव को केंद्र सरकार ने 12 वर्षों में षड्यंत्रकारी तरीके से खोखला कर दिया है, जिसके लिए हमारे पुरखे लड़े। 

इस दौरान उन्होंने बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर ने 15 जून 1949 को संविधान सभा में कही बात दोहराई। बाबासाहेब ने कहा था, किसी अफसर की मर्जी से नाम नहीं कटेगा। आज अफसर भाजपा और केंद्र सरकार के इशारे पर मनमर्जी से नाम काट रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने पंडित जवाहरलाल नेहरू और बाबासाहेब का कई बार नाम लिया। इनमें वोट देने के हर व्यक्ति के अधिकार का जिक्र किया। देश का वयस्क व्यक्ति वोट से वंचित न हो। ऐसा उनकी सोच थी।

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मताधिकार, लोकतंत्र की सर्वाधिक मौलिक चीज

कांग्रेस नेता ने बताया कि संविधान सभा में हुई बहस में डॉ. अंबेडकर ने मताधिकार को लोकतंत्र की सर्वाधिक मौलिक चीज कहा था। सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि रक्षक ही भक्षक बन गया है। जो कांग्रेस चाहती थी, उसका उलटा हो रहा। जनता ने जिस पर भरोसा किया वह लुटेरा बन गया। खड़गे का निशाना भाजपा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर रहा। कभी चौकीदार को चोर कहा गया, आज कांग्रेस चोर की जगह लुटेरा कह रही है। वोट डालने के अधिकार पर आज खड़गे जमकर बोले।

इसमें राजीव गांधी की सरकार का भी उल्लेख किया गया। 1988 में स्व. राजीव गांधी ने मताधिकार की उम्र 21 वर्ष से घटाकर 18 कर दी थी। भाजपा पर यह आरोप है कि उसने युवाओं को मताधिकार से बेदखल करने की योजना बना डाली। इसी योजना का हिस्सा है, चुपचाप फॉर्म 6 के नियमों में बदलाव करवा दिया। खड़गे ने इसे गैरकानूनी बताया है। भाजपा एक षड्यंत्र कर रही है। इसमें युवाओं को वोट से वंचित करने की योजना है।

राहुल ने जिन बातों को उठाया, वे सही साबित

खड़गे ने राहुल गांधी का नाम लिया और कहा कि जिन-जिन बातों को उठाया, वे सही साबित हुई हैं। उन्होंने अपनी बात सच और खरी बताने की कोशिश में राहुल गांधी के महादेवपुरा, अलंद और हरियाणा-महाराष्ट्र के मामले में दस्तावेजों के साथ मतदाता आंकड़ों के आधार पर उठाए गए मामले को उदाहरण के रूप में रखा। कई संस्थाओं के बारे में कहा कि आज वह सत्ता के आगे सिर झुकाए खड़ी हैं। उनका कहना था कि कांग्रेस ने इनको बनाया। भाजपा को आरएसएस के साथ जोड़ा। कांग्रेस की मांग भी उन्होंने गिनाईं। 

1. मतदाता सूची में होने वाले हर बड़े बदलाव का डेटा सार्वजनिक हो।

2. जिन वोटरों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें अपील का अवसर मिले।

3. राजनीतिक दलों को मतदाता सूची और उससे संबंधित आवश्यक डेटा सरल प्रारूप में उपलब्ध हो।

4. जहां गंभीर विसंगतियों के प्रमाण सामने आएं, वहां स्वतंत्र और समयबद्ध जांच हो। 

5. चुनाव प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा और निर्णयों में पारदर्शिता की मांग की गई है। 

खड़गे ने प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग की

इन मांगों के अलावा कई महत्वपूर्ण बातें की गई हैं। सरकार के नोटबंदी का फैसला की आज भी निंदा की गई। बताया कि इस फैसले ने देश की अर्थव्यवस्था को नेस्तनाबूद कर दिया था। इस फैसले को साजिश बताया गया। मल्लिकार्जुन ने कहा कि चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने खुद मुख्य चुनाव आयुक्त की गतिविधियों को मनमाना और अनुचित बताया। खड़गे ने इसी वक्तव्य के साथ प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग कर डाली। कहा कि नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए। पांच राज्यों के चुनाव का मामला अब सीधा राजनीतिक दलों से है। आने वाले समय में भाजपा को इन मांगों पर उत्तर देना है।

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