Uttarkashi कालिंदी ट्रेक पर हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू अभियान शुरू, 25 ट्रेकर्स सुरक्षित निकाले

खबर सार :-

उत्तरकाशी के उच्च हिमालय में फंसे ट्रेकर्स का रेस्क्यू जारी है। ऑडिन कॉल क्षेत्र से पर्वतारोही सुरक्षित स्थान पर लाए गए हैं।
Uttarkashi के पहाड़ों पर फंसे  trekkers को निकालने में लगीं टीमें, पत्थरों के खिसकने का खतरा बढ़ा

खबर विस्तार : -

देहरादून, उत्तराखंड के uttarkashi जिले में कालिंदी ट्रेक क्षेत्र में एक बार फिर खराब मौसम के कारण ट्रेकर्स को मुस्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इनको यहां दुर्गम पहाड़ियों और भुस्खलन जैसी परिस्थितियों के बीच से सुरक्षित निकालने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान सोमवार को चलाया गया तो राहत भरी खबर सुनने को मिली। 

आपदा प्रबंधन की ओर से फिर संभाली गई कमान

देहरादून, पहाड़ों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने में आपदा प्रबंधन विभाग को फिर तैनात किया गया है। टीम ने अब तक 25 लोगों को सुरक्षित निकालने में सफलता हासिल की है। इस अभियान के दौरान कई दिक्कतें आईं इस वजह से चार helicopter बराबर उड़ान भर रहे हैं। बचाव अभियान के दौरान एक helicopter हर्षिल हेलीपैड पर उतरा और वहां से ऑडेन कॉल के लिए रवाना हुआ। बचाव कार्यों में एक और हेलीकॉप्टर हर्षिल पहुंच गया। इससे कई दिक्कतें दूर कर ली गई हैं।

uttarkashi और बागेश्वर जिले के उच्च हिमालयी ट्रेकिंग मार्गों में करीब 149 लोगों के फंसे होने की जानकारी दी गई थी। यह जानकारी राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से सोमवार को भेजी गई। इसके अंतर्गत  बताया कि ट्रेकर्स और सहयोगी कर्मचारियों को कुछ जानकारी दी गई थी। जानकारी के अनुसार ही उत्तरकाशी के विभिन्न ट्रेक मार्गों पर बागेश्वर के पिंडारी ग्लेशियर क्षेत्र में 43 लोगों को सुरक्षित निकालने के प्रयास किए गए थे। बचाव दल को बताया गया था कि uttarkashi में कालिंदी पास ट्रेक पर दलांडी बेस में 18 लोग हैं। इनमें पांच सदस्य और 13 सहयोगी कर्मचारी हैं।

पहाड़ों पर फंसे लोगों को सुरक्षित लाया गया

माउंट सुदर्शन के तपोवन बेस कैंप में चार विदेशी और तीन सहयोगी कर्मचारी समेत सात लोगों की जानकारी दी गई थी। माउंट शिवलिंग के तपोवन बेस कैंप में पांच लोग, जबकि माउंट सतोपंथ पर आठ लोग बताए गए। ऑडेन कॉल पास के बेस कैंप में 29 लोग हैं। इस क्षेत्र में अभी तक तेज हवाएं चल रही हैं। बागेश्वर जिले में पिंडारी ग्लेशियर क्षेत्र में 43 लोगों को सुरक्षित बताया गया है। इससे काफी ज्यादा बड़ा मामला रुद्रप्रयाग जिले के केदारनाथ यात्रा मार्ग के चीड़बासा स्लाइडिंग जोन के पास का है।

 रात भूस्खलन के कारण फंसे करीब 1500 यात्रियों को एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और डीडीआरएफ की संयुक्त टीमों ने सुरक्षित निकालकर गौरीकुंड पहुंचाया। चीड़बासा हेलीपैड के समीप पहुंचने पर रेस्क्यू टीम को मार्ग पर भूस्खलन का मलबा जमा मिला। पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने के कारण यात्रियों की आवाजाही जोखिमपूर्ण बनी हुई थी। स्थिति को देखते हुए एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और डीडीआरएफ की टीमों ने संयुक्त रूप से बचाव अभियान शुरू किया।

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रेस्क्यू टीमों ने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी और आगे बढ़ने से मना कर दिया। टीम के प्रयासों को फालो करने से ही सावधानीपूर्वक स्लाइडिंग जोन पार कराया जा सका। इस अभियान में 1500 यात्रियों को सुरक्षित दूसरी ओर पहुंचाने में कामयाबी मिल सकी। इस स्थान पर पहुंचने के बाद ही उनको गौरीकुंड के लिए भेजा गया। लगातार पत्थर गिरने और भूस्खलन के खतरे के बीच संयुक्त टीमों ने अपनी समझदारी और सहयोग के बल पर ही अभियान को पूरा किया

इधर, रुद्रप्रयाग जिले के केदारनाथ यात्रा मार्ग के चीड़बासा स्लाइडिंग जोन के पास देर रात भूस्खलन हुआ। इसमें करीब 1500 यात्रियों फंस गए। इनको एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और डीडीआरएफ की संयुक्त टीमों ने सुरक्षित निकालकर गौरीकुंड पहुंचाया। रेस्क्यू टीमों की बड़ी जिम्मेदारी यात्रियों की सुरक्षा करना है। इसको प्राथमिकता देते हुए वह सभी जरूरी नियमों का पालन कर रहे हैं। सावधानीपूर्वक स्लाइडिंग जोन पार कराने की कोशिश में वह एक दूसरे सहयोगी को निर्देश भी दे रहे हैं। अभियान के दौरान करीब 1500 यात्रियों को सुरक्षित दूसरी ओर पहुंचाया गया है।

संयुक्त टीमों ने आपसी समन्वय से अभियान पूरा किया

लगातार पत्थर गिरने और भूस्खलन के खतरे के बीच संयुक्त टीमों ने आपसी समन्वय से अभियान पूरा किया। निकाले गए यात्रियों को उनके घर भेज दिया। रेस्क्यू टीम को मार्ग पर भूस्खलन का मलबा पहले तो नहीं दिखा, लेकिन जब चीड़बासा हेलीपैड के समीप पहुंचने तो उनको यकीन हुआ। पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने के कारण यात्रियों की आवाजाही बेहद खतरनाक हालातों से घिरी थी। यद्यपि इनको जोखिमों का सामना करना पड़ा। स्थिति को देखते हुए एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और डीडीआरएफ की टीमों ने संयुक्त रूप से बचाव अभियान शुरू किया।

इस मामले में रुद्रप्रयाग जिला आपदा नियंत्रण कक्ष से 27 सितंबर की देर रात सोनप्रयाग पुलिस को सूचना मिली थी। इसमें भूस्खलन की जानकारी दी गई थी। यह स्थान गौरीकुंड से करीब तीन किलोमीटर आगे चीड़बासा क्षेत्र के पास है। सूचना में कहा गया था कि कई यात्री मार्ग के दूसरी ओर फंस गए हैं। इनको मदद की जरूरत है। इस जानकारी के तुरंत बाद एसडीआरएफ सोनप्रयाग की टीम उपनिरीक्षक आशीष डिमरी के नेतृत्व में मौके के लिए रवाना हो गए थे।

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