इंदौर के भागीरथपुरा पेयजल त्रासदी पर उमंग सिंघार ने उठाए सवाल, कहा, सरकार प्रभावित परिवारों के लिए क्या करने जा रही

खबर सार :-

मध्य प्रदेश में सरकार से कई मामलों पर जवाब मांगा जा रहा है। इसमे दूषित पानी से मौतों का मामला तूल पकड़ता जा रहा है।
मप्रः दूषित पानी, जहरीली शराब और बच्चों की मौतों पर जीतू पटवारी ने सरकार से मांगा जवाब

खबर विस्तार : -

इंदौरः मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में भागीरथपुरा दूषित पेयजल मामले की न्यायिक जांच रिपोर्ट को लेकर इन दिनों जवाबदेही तय किए गए लोगों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है। इस घटना में तीन दर्जन से ज्यादा मौतें हुई थीं। इस मामले में मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कई आरोप लगाए हैं।

उन्होंने शुक्रवार को रेसीडेंसी में प्रेस वार्ता भी की। जांच रिपोर्ट में कहा गया था कि पेयजल व्यवस्था, पाइपलाइन और सीवरेज नेटवर्क के रखरखाव, निगरानी सब खराब था। ऐसी व्यवस्था सालों से यानी एक दशक से ज्यादा से चली आ रही थी। प्रेसवार्ता में कहा कि न्यायिक जांच आयोग की सिफारिशें सामने हैं। प्रभावित परिवारों को राहत देने की योजना पर सरकार अपना पत्ता खोले।  जिन स्तरों पर जिम्मेदारी बनती है, क्या उन पर कार्रवाई की जाएगी?

यदि हम रिपोर्ट की बात करें तो इसमें 20 से ज्यादा मौतें दूषित पानी से फैली बीमारी से हुई थी। यह बात रिपोर्ट में है। रिपोर्ट में पेयजल और सीवरेज नेटवर्क की योजना, रखरखाव, निगरानी और पर्यवेक्षण से जुड़ी कमियों को दोषी माना गया है। इस रिपोर्ट को आए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन पेयजल और सीवर लाइनें एक-दूसरे के करीब या क्रॉसिंग में डालने वालों के नाम उजागर नहीं किए जा रहे हैं।

दूषित पानी की जानकारी थी, फिर भी उपाय नहीं किए

सीवर लाइन से रिसाव और पेयजल पाइपलाइन में नकारात्मक दबाव की जानकारी के बाद त्वरित कार्रवाई नहीं शुरू की गई थी। सिंघार ने कहा कि महत्वपूर्ण रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में पाइपलाइन नेटवर्क की निगरानी और समस्या की पहचान में फर्क आ सकता है। नेता प्रतिपक्ष ने पाइपलाइन बदलने से जुड़ी प्रक्रिया में हुई देरी का मुद्दा भी उठाया। सवाल यह है कि जब पार्षद के जरिए दूषित पानी की जानकारी हो गई थी, तो बीमारी का इंतजार क्यों किया गया?

इसीलिए विपक्ष सवाल कर रहा है कि करीब ढाई करोड़ रुपए के काम से संबंधित टेंडर और प्रशासनिक प्रक्रिया में देरी हुई। आपात कालीन व्यवस्था कर काम कराना चाहिए था। पानी की सप्लाई क्यों नहीं रोक दी गई थी? इससे साफ प्रतीत होता है कि कान बंद कर लिए गए थे। अब सवाल यह है कि संबंधित फाइल मेयर के हस्ताक्षर के लिए 66 दिन तक लंबित रही। उन्होंने पूछा कि पीड़ितों को क्या मदद मिली और मुआवजा कितना किसको दिया गया? यह जानकारी दी जाए।

आरोप है कि जिस समय जांच चल रही थी, जांच करने वालों पर दबाव बनाया गया। सिंघार का आरोप है कि तत्कालीन महापौर पुष्यमित्र भार्गव और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की जिम्मेदारी को लेकर भी हस्तक्षेप का प्रयास हुआ। यह सिंघार का आरोप है। बता दें कि भागीरथपुरा मामले की न्यायिक जांच रिपोर्ट अगस्त में हाईकोर्ट में पेश की गई थी। बाद में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 28 सितंबर को रिपोर्ट को अदालत की वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए।

जीतू पटवारी ने प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बातचीत की

दूसरी ओर मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश में बच्चों की मौत का मामला उठाया। इस दौरान उन्होंने कई ओर मामलों पर सरकार को घेरने की कोशिश की। इसमें आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं पोषण व्यवस्था, संदिग्ध जहरीली शराब और दूषित पेयजल की घटना शामिल हैं। उन्होंने कहा कि लापरवाही बरतने वाले और साक्ष्य छिपाने वालों पर कार्रवाई हो।

जीतू पटवारी ने शुक्रवार को राजधानी भोपाल स्थित कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बातचीत की। उन्होंने मध्य प्रदेश में दूषित पानी का मामला उठाया और कहा कि आखिर अब तो रिपोर्ट सामने आ चुकी है। किसको बचाने का प्रयास चल रहा है। हवाला दिया कि जिम्मेदारी तय करने में देरी क्यों हो रही है। फाइलों का भी उन्होंने जिक्र किया। कहा कि पता चला रहा है कि सभी दस्तावेज नहीं दिए गए थे।

 केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के प्रस्तावित मध्यप्रदेश दौरे का उल्लेख भी उनके सवालों में किया गया। कहा कि केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार होने के बावजूद प्रदेश के कई गंभीर मुद्दों पर सरकार  जनता के सामने स्थिति स्पष्ट नहीं कर रही है। इसी दौरान जीतू ने  लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बालाघाट दौरे का उल्लेख कर दिया। उन्होंने सरकार से आदिवासी कल्याण के लिए आवंटित बजट के उपयोग का मदवार विवरण सार्वजनिक करने को कहा। 

छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत को लेकर कई सवाल किए

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पटवारी ने छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत को लेकर कई सवाल किए। उन्होंने कहा कि कफ सिरप और संदिग्ध जहरीली शराब का मामला गंभीर हैं। इन मामलों पर भी जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर सरकार कुछ नहीं कर रही है। सरकार को चाहिए था कि प्रभावित परिवारों को दी गई सहायता की सार्वजनिक करे। उन्होंने कहा कि कानून में सब बराबर हैं। शराब से मौत हो या पानी से, या फिर सीरफ से मौत हुई, जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

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