संबित पात्रा का इंडिया गठबंधन के खिलाफ मोर्चा, संवैधानिक व्यवस्थाओं को तहस-नहस करना चाह रहा इंडिया गठबंधन

खबर सार :-

भारतीय जनता पार्टी के सांसद संबित पात्रा ने आज कहा है कि राहुल गांधी को लांच करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए उन्हें कोई बहाना चाहिए। निर्वाचन आयोग के इस्तीफा की मांग कर वह जन लोकप्रिय नेता नहीं हो जाएंगे।
भाजपा का कांग्रेस पर वार, राहुल गांधी को लांच करने की तैयारी में निर्वाचन आयोग को घेरा जा रहा

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली, एक ओर निर्वाचन आयोग के खिलाफ इंडिया गठबंधन का विरोध प्रदर्शन चल रहा है, वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने भी इंडिया गठबंधन के खिलाफ मोर्चा खेल रखा है। भाजपा के सांसद संबित पात्रा ने भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और फार्म छह विवाद पर कांग्रेस के आरोपी को निराधार बताया है। कांग्रेस को घेरते हुए संबित पात्रा ने कहा है कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्थाओं को निशाना बना रहे हैं।

यह काम करके राहुल गांधी को लॉन्च करने की कोशिश कर रहे हैं। पात्रा ने कहा है कि कांग्रेस हमेशा देश का अपमान करती रही है। राहुल गांधी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गांधी देश के विरुद्ध बाहर भी देश का अपमान करते हैं। कांग्रेस हमेशा ऐसा करती रही है। संबित पात्रा ने इंडिया गठबंधन को आड़ेहाथों लेते हुए कहा की राजनीतिक जीवन में राहुल गांधी फेल हो चुके हैं। इसीलिए कांग्रेस बार-बार उनको स्थापित करने की कोशिश कर रही है।

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राजीव गांधी के समय ईवीएम का रास्ता तैयार हुआ था

पात्रा ने कहा की समय-समय पर कभी उच्चतम न्यायालय, ईवीएम, एसआईआर, हिंदुओं और अब चुनाव आयुक्त को निशाना बनाया जा रहा है। देश में भ्रम और स्थिरता का माहौल पैदा करने की कोशिश काफी दिनों से चल रही है। भाजपा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति का भी जिक्र किया। कहा कि 19 फरवरी 2025 को मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पद संभाला था। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव तो दूर 2024 का लोकसभा चुनाव भी इससे पहले हो चुका है।

पात्रा ने कहा कि 2014, 2019-2024 की लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगी दल आयोग पर आरोप लगाते रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी को लाभ पहुंचाने के लिए नए नियम बनाए हैं। उनमें से एसआईआर भी है। इसी तरह से पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी भी कहती रहीं। उनका कहना था कि लाखों मतदाताओं के वोट काट दिए गए और इसका फायदा भारतीय जनता पार्टी को मिला है।

बार-बार संबैधानिक संस्थाओं पर हमले कर रही कांग्रस

भारतीय जनता पार्टी से ज्ञानेश कुमार मिले हैं। इसलिए उनके स्तीफे की मांग की जा रही है। ममता बनर्जी के अलावा उनके सहयोगी दल यहां तक कि कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी कह चुके हैं कि राज्यों में हाल ही में हुए चुनाव गलत हुए हैं। उन सभी चुनाव को फिर से कराया जाए। संबित पात्रा ने कहा की 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान आयोग में चुनाव आयुक्त के तौर पर कार्यरत थे। उन्होंने फॉर्म छह को लेकर चल रहे विवाद पर भी पार्टी का नजरिया स्पष्ट कर दिया।

एसआईआर को लेकर कहां की तरह-तरह की भ्रांतियां पैदा की जा रही हैं। फेक न्यूज़ फैलाई जा रहे हैं। उन्होंने उच्चतम न्यायालय में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग वाली याचिका और उस पर जारी नोटिस का जिक्र किया। पात्रा ने कहा कि नोटिस जारी होना न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसका यह अर्थ नहीं कि लगाए गए आरोप सही साबित हो गए। कांग्रेस पार्टी ऐसे बार-बार प्रयास कर रही है। पात्रा ने कहा कि फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर कांग्रेस गंभीर आरोप लगा रही है।

भाजपा की जीत को चुनाव आयोग से जेड़ा जा रहा 

इस आधार का मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो मामला अदालत में है, उसके फैसले का इंतजार करना चाहिए। इससे पहले राहुल गांधी के बयान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा ज्ञानेश कुमार ने फार्म छह में कथित तौर पर गलत तरीके से बदलाव किया। अपने पद का इस्तेमाल भाजपा की मदद के लिए किया। अभी हाल ही में पिछले दिनों कांग्रेस पार्टी की ओर से आरोप लगाए जा रहे हैं कि थे की मुख्य निर्वाचन आयुक्त अपने आयुक्त को साथ में लेकर फैसला नहीं करते थे। इस मामले को कांग्रेस ने खूब हवा दिया, जबकि एक अखबार में छपे लेख को साक्ष्य मानकर यह सब हुआ।

इसके बाद मुख्य निर्वाचन आयुक्त के साथ उनके सहयोगी आयुक्तों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना नजरिया स्पष्ट कर दिया था। पात्रा ने कहा कि जब-जब चुनाव कांग्रेस पार्टी हारती रही है, कभी ईवीएम तो कभी गलत चुनाव के मामले उठाती रही है। हार की समीक्षा करने के बजाय वह भारतीय जनता पार्टी को घेरना शुरू कर देती है।

अपनी हार की भी समीक्षा नहीं करना चाहती कांग्रेस

कहा कि बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं, जबकि राजीव गांधी के कार्यकाल में 1989 में चुनाव कानून संशोधन के जरिए ईवीएम के इस्तेमाल का कानूनी रास्ता तैयार हुआ था। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों का दायित्व है कि वह चुनाव आयोग और उच्चतम न्यायालय में चल रही कार्यवाही से जुड़े तत्वों का सही ढंग से जनता के सामने रखें, जबकि कांग्रेस ऐसा नहीं कर रही है संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ आरोप लगा रहे हैं और तथ्यों में छेड़छाड़ करके पूरी कानूनी प्रक्रिया को तहस-नस करना चाहती है। 

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