Indian Navy: नौसेना को मिलेगा पहला फ्लीट सपोर्ट पोत, समुद्र में बढ़ेगी लंबे अभियानों की क्षमता
खबर सार :-
भारतीय नौसेना के पहले फ्लीट सपोर्ट पोत का 6 अक्टूबर को विशाखापत्तनम में जलावतरण होगा। 43,500 टन का पोत युद्धपोतों को ईंधन और रसद सहायता देगा। पहले पोत के जलावतरण के बाद परियोजना के अगले चरण पर भी काम तेज होने की उम्मीद है।
खबर विस्तार : -
नई दिल्लीः भारतीय नौसेना की समुद्री अभियान क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। नौसेना के बेड़े में पहला फ्लीट सपोर्ट पोत 6 अक्टूबर को शामिल किया जाएगा। करीब 43,500 टन वजन वाला यह पोत समुद्र में लंबे समय तक तैनात युद्धपोतों को ईंधन, रसद और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएगा। फ्लीट सपोर्ट पोतों को नौसेना के समुद्री अभियानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इनकी मदद से युद्धपोतों को समुद्र में ही जरूरी संसाधन मिलते रहते हैं। इसका सीधा असर उनकी ऑपरेशनल क्षमता पर पड़ता है और उन्हें ईंधन या अन्य सामान लेने के लिए बार-बार बंदरगाह पर लौटने की आवश्यकता कम हो जाती है। इस क्षमता के मजबूत होने से भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में अपने युद्धपोतों को लंबे समय तक तैनात रखने में सक्षम होगी। इससे समुद्र में लगातार निगरानी, गश्त और अन्य अभियानों को लॉजिस्टिक सहायता मिल सकेगी।
विशाखापत्तनम में होगा पहले पोत का जलावतरण
पहले फ्लीट सपोर्ट पोत का जलावतरण विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) में किया जाएगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। इसी कार्यक्रम में वह पांचवें फ्लीट सपोर्ट पोत की आधारशिला भी रखेंगे। इसके अलावा हिंदुस्तान शिपयार्ड की आधुनिक स्लिपवे-4 और 300 टन क्षमता वाली विशाल गॉलियथ क्रेन का भी उद्घाटन किया जाएगा। शिपयार्ड की इन सुविधाओं के विस्तार का उद्देश्य बड़े और जटिल समुद्री पोतों के निर्माण की क्षमता को बढ़ाना है। एक ही कार्यक्रम में पहले पोत का जलावतरण और पांचवें पोत की आधारशिला रखा जाना इस परियोजना के अगले चरण की शुरुआत को दर्शाता है। इससे फ्लीट सपोर्ट पोतों के निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
पांच फ्लीट सपोर्ट पोत बनाए जा रहे
भारतीय नौसेना के लिए कुल पांच फ्लीट सपोर्ट पोत बनाए जा रहे हैं। पहला पोत इसी श्रृंखला का हिस्सा है। इसकी एक खास उपलब्धि यह है कि स्टील कटिंग यानी निर्माण की शुरुआत के महज 18 महीने बाद इसे समुद्र में उतारा जा रहा है। निर्माण की गति के लिहाज से यह महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पहले पोत के जलावतरण के साथ ही पांचवें पोत की आधारशिला रखे जाने से यह संकेत मिलता है कि परियोजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। फ्लीट सपोर्ट पोत समुद्र में तैनात युद्धपोतों के लिए एक तरह के मोबाइल लॉजिस्टिक सेंटर के रूप में काम करते हैं। इन पोतों के जरिए युद्धपोतों को समुद्र में ही ईंधन, पानी, भोजन और अन्य आवश्यक सामान उपलब्ध कराया जा सकता है। युद्धपोतों को लंबे अभियानों के दौरान सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रसद और ईंधन की निरंतर उपलब्धता होती है। फ्लीट सपोर्ट पोत इस चुनौती को कम करने में मदद करते हैं। इससे नौसेना के प्रमुख युद्धपोत अपने मिशन क्षेत्र में अधिक समय तक सक्रिय रह सकते हैं।
हिंद महासागर में बढ़ेगी समुद्री पहुंच
भारत की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए हिंद महासागर क्षेत्र नौसेना के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में लंबे समय तक जहाजों की तैनाती बनाए रखने के लिए मजबूत लॉजिस्टिक सपोर्ट जरूरी है। फ्लीट सपोर्ट पोतों के बेड़े में शामिल होने से समुद्र में तैनात भारतीय युद्धपोतों को लगातार आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ेगी। इससे नौसेना के जहाजों को लंबी दूरी के अभियानों के दौरान तट पर लौटने की जरूरत कम हो सकती है। इस तरह फ्लीट सपोर्ट पोत सीधे तौर पर लड़ाकू भूमिका निभाने के बजाय नौसेना के युद्धपोतों की अभियान क्षमता और समुद्री सहनशक्ति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
HSL में बढ़ेगी बड़े पोत बनाने की क्षमता
हिंदुस्तान शिपयार्ड की स्लिपवे-4 को भी नई क्षमताओं के साथ विकसित किया गया है। इसकी लंबाई बढ़ाने के साथ भार उठाने की क्षमता में भी सुधार किया गया है। इसके अलावा 300 टन क्षमता वाली गॉलियथ क्रेन को भी इस बुनियादी ढांचे का हिस्सा बनाया गया है। इन सुविधाओं के मजबूत होने के बाद शिपयार्ड में 45,000 डेडवेट टन तक के पोत बनाए और समुद्र में उतारे जा सकेंगे। इससे शिपयार्ड बड़े और जटिल समुद्री प्लेटफॉर्म के निर्माण के लिए अधिक सक्षम होगा। रक्षा मंत्रालय की ओर से इस कार्यक्रम को भारत की स्वदेशी युद्धपोत निर्माण क्षमता के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। बड़े समुद्री प्लेटफॉर्म के निर्माण की क्षमता बढ़ना देश की रक्षा औद्योगिक क्षमता के लिए भी महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में कई वरिष्ठ अधिकारी होंगे मौजूद
विशाखापत्तनम में होने वाले कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन और रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान पहले फ्लीट सपोर्ट पोत का जलावतरण, पांचवें पोत की आधारशिला और हिंदुस्तान शिपयार्ड की नई निर्माण सुविधाओं का उद्घाटन एक साथ किया जाएगा। कुल मिलाकर, फ्लीट सपोर्ट पोतों का निर्माण भारतीय नौसेना की समुद्री रसद क्षमता को मजबूत करने के साथ देश में बड़े समुद्री पोतों के स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम है।
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