नई दिल्ली: दुनिया भर में आधुनिकता और मानसिक तनाव से निपटने के नाम पर सुलगती सिगरेट, बीड़ी का धुआं और होठों के नीचे दबी खैनी-गुटखा की पुड़िया आज भारतीय समाज के भीतर एक ऐसा धीमा जहर घोल रही हैं, जिसका अंत बेहद खौफनाक है। हर साल की तरह इस बार भी 31 मई को 'विश्व धूम्रपान निषेध दिवस' (World No Tobacco Day) पूरे जोश के साथ मनाया जा रहा है। इस विशेष दिन को वैश्विक कैलेंडर में शामिल करने के पीछे सबसे बड़ा मकसद इंसानी आबादी को तंबाकू और धूम्रपान से होने वाले जानलेवा शारीरिक नुकसानों के प्रति सचेत करना है। आज के समय में तंबाकू जनित बीमारियां पूरी दुनिया में अकाल मृत्यु का एक बहुत बड़ा और सबसे मुख्य कारण बनकर उभरी हैं। यह जानलेवा व्यसन न केवल इंसान के फेफड़ों, दिल और अन्य नाजुक आंतरिक अंगों को पूरी तरह छलनी कर देता है, बल्कि हंसते-खेलते परिवारों को पूरी तरह बर्बाद कर देता है। इस अंतरराष्ट्रीय दिवस के जरिए दुनिया भर में लोगों को तंबाकू छोड़ने, एक शुद्ध और निरोगी जीवनशैली अपनाने तथा आने वाली मासूम पीढ़ियों को इस भयावह दलदल से सुरक्षित बाहर निकालने का एक मजबूत संदेश प्रसारित किया जाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) की ओर से जारी किए गए हालिया और बेहद चौंकाने वाले आंकड़ों पर नजर डालें तो तंबाकू का अत्यधिक सेवन कैंसर (Cancer), फेफड़ों की गंभीर बीमारियों, हृदय रोग (Heart Disease) और अचानक होने वाले स्ट्रोक जैसी जानलेवा जटिलताओं का सबसे बड़ा कारण माना गया है। भारत के संदर्भ में यह स्थिति और भी अधिक भयावह हो जाती है। हमारे देश में असमय होने वाली मौतों और गंभीर बीमारियों के पीछे तंबाकू का सबसे बड़ा हाथ है। आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 13 लाख लोग तंबाकू के सेवन के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि हमारा देश पूरी दुनिया में तंबाकू का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता होने के साथ-साथ इसका दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश भी बना हुआ है। देश के गली-कूचों और छोटी-मोटी दुकानों पर विभिन्न प्रकार के जानलेवा तंबाकू उत्पाद बेहद कम और किफायती कीमतों पर आसानी से मिल जाते हैं, जो देश के युवाओं को आसानी से अपनी गिरफ्त में ले लेते हैं। यही कारण है कि देश में Tobacco Health Hazards In India को लेकर चिकित्सा विशेषज्ञ लगातार चिंता जता रहे हैं।
भारत के भीतर इस समस्या की गहराई को समझने के लिए 'ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे इंडिया' (Global Adult Tobacco Survey India) की रिपोर्ट को देखना बेहद जरूरी है। इस विस्तृत सर्वेक्षण के अनुसार, हमारे देश में लगभग 26.7 करोड़ वयस्क नागरिक किसी न किसी रूप में तंबाकू का नियमित उपभोग कर रहे हैं। भारत में तंबाकू सेवन का जो सबसे खतरनाक और प्रचलित रूप सामने आया है, वह है 'धुआं रहित तंबाकू' (Smokeless Tobacco)। आम भारतीय नागरिक बहुत बड़े पैमाने पर खैनी, चबाने वाले गुटखे, जर्दा और तंबाकू से युक्त पान का इस्तेमाल धड़ल्ले से करते हैं। इसके अलावा, धुएं वाले रूप में बीड़ी, सिगरेट और आज के दौर में युवाओं के बीच स्टेटस सिंबल बन चुका हुक्का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। ग्रामीण इलाकों में आज भी बीड़ी का चलन बहुत ज्यादा है, जो फेफड़ों को सीधे तौर पर नष्ट कर रही है।
वैश्विक धरातल पर देखा जाए तो तंबाकू का यह बढ़ता हुआ व्यापार और उपभोग मानव स्वास्थ्य के सामने अब तक की सबसे बड़ी और गंभीर चुनौती बन चुका है। यह केवल इंसानी जिंदगियों का ही नुकसान नहीं कर रहा, बल्कि इसके बेहद विनाशकारी सामाजिक और आर्थिक दुष्परिणाम भी सामने आ रहे हैं। एक आधिकारिक अध्ययन के मुताबिक, वर्ष 2017-18 के दौरान देश में 35 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों में तंबाकू के सेवन से पैदा होने वाली तमाम बीमारियों के इलाज और देखभाल पर कुल आर्थिक लागत लगभग 1,77,341 करोड़ रुपये यानी करीब 27.5 अरब अमेरिकी डॉलर आंकी गई थी। यह विशालकाय धनराशि देश के विकास में इस्तेमाल हो सकती थी, जो आज केवल इस जानलेवा लत के कारण स्वाहा हो रही है। इस आर्थिक नुकसान का सीधा असर आम परिवारों की जेब और देश की स्वास्थ्य प्रणालियों पर पड़ रहा है। Tobacco Health Hazards In India के कारण पैदा होने वाला यह वित्तीय संकट आम जनता की कमर तोड़ रहा है।
इतना ही नहीं, बच्चों और किशोरों पर मंडराता हुआ खतरा और भी ज्यादा डराने वाला है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) की एक रिपोर्ट में सामने आया है कि दुनिया भर में 13 से 15 साल की कोमल उम्र के लगभग 4 करोड़ से ज्यादा बच्चे अलग-अलग तरह के खतरनाक तंबाकू उत्पादों की लत का शिकार हो चुके हैं। आजकल की इस आधुनिक दुनिया में छोटे बच्चों और युवाओं के बीच ई-सिगरेट (E-Cigarette) और तरह-तरह के निकोटीन पाउच (Nicotine Pouches) का इस्तेमाल बहुत ही तेजी के साथ फैशन बनता जा रहा है। इस बेहद गंभीर स्थिति को देखते हुए ही इस बार 31 मई से ठीक पहले वैश्विक संस्था ने दुनिया भर की सरकारों और नीति-निर्माताओं से बहुत ही कड़ा आग्रह किया है कि वे अपनी नई और आने वाली पीढ़ी को तंबाकू व निकोटीन उत्पादों की इस जानलेवा लत से बचाने के लिए सख्त से सख्त कदम उठाएं। Tobacco Health Hazards In India के बढ़ते मामलों को देखते हुए अब स्कूलों और कॉलेजों के पास इन उत्पादों की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगाना अनिवार्य हो गया है।
अगर हम वैश्विक आंकड़ों की बात करें तो पूरी दुनिया में हर साल लगभग 70 लाख से अधिक लोग तंबाकू के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सेवन की वजह से तड़प-तड़प कर दम तोड़ देते हैं। सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि ये वो मौतें हैं, जिन्हें समय रहते जीवनशैली में सुधार करके आसानी से रोका जा सकता था। तंबाकू का लगातार सेवन सीधे तौर पर गंभीर हृदय रोगों, फेफड़ों की लाइलाज बीमारियों और शरीर के अलग-अलग हिस्सों में होने वाले 20 से भी अधिक घातक कैंसर के प्रकारों से जुड़ा हुआ है। इसी वजह से विश्व स्वास्थ्य संगठन दुनिया भर के लगभग 1 अरब से भी अधिक तंबाकू, सिगरेट, बीड़ी, ई-सिगरेट और निकोटीन पाउच का इस्तेमाल करने वाले लोगों को इस 31 मई के अवसर पर अपनी इस जानलेवा लत को हमेशा-हमेशा के लिए अलविदा कहने और एक स्वस्थ जीवन की तरफ कदम बढ़ाने के लिए पुरजोर तरीके से प्रेरित कर रहा है ताकि Tobacco Health Hazards In India के ग्राफ को नीचे लाया जा सके।
एक आर्थिक और सामाजिक शोध के अनुसार, भारत में तंबाकू के सेवन से होने वाला भारी-भरकम आर्थिक नुकसान देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी (Gross Domestic Product) का लगभग 1.04 फीसदी बैठता है। इसके विपरीत, सरकार को पिछले वर्षों के दौरान तंबाकू उत्पादों की बिक्री से मिलने वाला कुल उत्पाद शुल्क राजस्व (Excise Revenue) इस आर्थिक नुकसान की भरपाई का केवल 12.2 प्रतिशत हिस्सा ही पूरा कर पाया था। इसका साफ मतलब यह है कि तंबाकू से होने वाली कमाई बहुत कम है और इसके कारण देश को होने वाला नुकसान कई गुना ज्यादा बड़ा है। सिर्फ इलाज पर होने वाला प्रत्यक्ष चिकित्सा खर्च ही हमारे देश के कुल स्वास्थ्य व्यय का लगभग 5.3 प्रतिशत हिस्सा खा जाता है। Tobacco Health Hazards In India की वजह से देश के सरकारी और निजी अस्पतालों पर जो भारी दबाव पड़ रहा है, वह अंततः हमारी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को पंगु बना रहा है और संपूर्ण अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ रहा है। यही वजह है कि भारत में तंबाकू नियंत्रण से जुड़े कानूनों और अभियानों को बहुत बड़े स्तर पर लागू करना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है।
सिगरेट या बीड़ी का धुआं उड़ाना या तंबाकू चबाना महज एक सामान्य बुरी आदत नहीं है, बल्कि यह एक अत्यंत जटिल और मानसिक व शारीरिक निर्भरता वाली लत है जो धीरे-धीरे इंसान के पूरे शरीर को अंदर ही अंदर दीमक की तरह चाट जाती है। तंबाकू के अंदर पाया जाने वाला 'निकोटीन' (Nicotine) नामक रसायन सीधे इंसान के मस्तिष्क पर वार करता है और उसे अपना गुलाम बना लेता है। एक बार जब कोई व्यक्ति इसका आदी हो जाता है, तो इसके धुएं के साथ शरीर के भीतर जाने वाले हजारों खतरनाक और जहरीले रसायन फेफड़ों की नलियों, दिल की धमनियों, दिमाग की नसों और शरीर के कोने-कोने को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त करने लगते हैं। चिकित्सा विज्ञान कहता है कि इसके कारण फेफड़ों का सड़ना, हार्ट अटैक आना, अचानक पैरालिसिस या स्ट्रोक होना और सांस की दमा जैसी गंभीर बीमारियां होने की आशंका कई सौ गुना तक बढ़ जाती है। Tobacco Health Hazards In India के रूप में सामने आने वाले ये शारीरिक परिणाम किसी भी हंसते-खेलते इंसान को जीते जी लाश बना सकते हैं।
इस जानलेवा आदत का सामाजिक पहलू भी बेहद दर्दनाक है। तंबाकू का अत्यधिक सेवन मध्यम और गरीब परिवारों को पूरी तरह से कंगाली की कगार पर लाकर खड़ा कर देता है। जब घर का मुखिया या कोई कमाऊ सदस्य इसकी वजह से गंभीर रूप से बीमार पड़ता है, तो परिवार की पूरी जमा-पूंजी उसके इलाज में स्वाहा हो जाती है। यह स्थिति समाज में आर्थिक और सामाजिक असमानताओं को और ज्यादा बढ़ाने का काम करती है। इसके कारण हमारा पूरा समाज और देश की अर्थव्यवस्था लगातार पीछे की तरफ धकेली जा रही है। ये तमाम नकारात्मक कारक संयुक्त राष्ट्र के 'सतत विकास लक्ष्यों' (Sustainable Development Goals) को हासिल करने की दिशा में चल रहे वैश्विक प्रयासों को बहुत बुरी तरह से बाधित करते हैं। इन वैश्विक लक्ष्यों का मुख्य उद्देश्य दुनिया को अधिक न्यायसंगत, स्वस्थ, समृद्ध और लंबे समय तक सुरक्षित रहने योग्य बनाना है। तंबाकू उद्योग से मिलने वाला राजस्व और टैक्स देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और एक टिकाऊ आर्थिक विकास की रणनीति तैयार करने के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा साबित हो रहा है। इसलिए, इस 31 मई को हम सभी को मिलकर यह कड़ा संकल्प लेना होगा कि हम न केवल खुद को इस जहर से दूर रखेंगे, बल्कि अपने आस-पास के लोगों को भी Tobacco Health Hazards In India के प्रति जागरूक करेंगे ताकि एक स्वस्थ और सशक्त भारत का निर्माण किया जा सके।
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