चौंकाने वाली रिपोर्ट! कुपोषण कम हुआ, लेकिन बच्चों में बढ़ी मोटापे की समस्या
खबर सार :-
भारत में जहां एक ओर कुपोषण पर काबू पा लिया गया है, वहीं एक नई बीमारी ने अपना पैर तेजी से पसार लिया है। जिसकी चपेट में ज्यादातर बच्चे आ रहे हैं।
खबर विस्तार : -
Child Obesity: भारत में कुपोषण पर बड़े स्तर पर काबू पा लिया गया है, लेकिन हाल ही में आई एक रिपोर्ट ने हर किसी को चिंता में डाल दिया है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें ज्यादातर कम उम्र बच्चे इसकी चपेट में आ रहे हैं। रिसर्च में यह भी दावा किया जा रहा है कि जो बच्चे पहले दुबले-पतले हुआ करते थे, वो कुछ ही सालों में मोटापे का शिकार होते जा रहे हैं।
रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
भारत में कुपोषण पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है, लेकिन हाल की आई रिसर्च में ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने सभी को हैरान कर दिया है। रिसर्च में पता चला है कि जो बच्चे पहले दुबले पतले हुआ करते थे वो अब मोटापे का शिकार होते जा रहे हैं। क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेल्लोर और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल में हुई रिसर्च में खुलासा हुआ है कि ज्यादातर बच्चों का बॉडी मास इंडेक्स उनके जन्म के शुरुआती पांच सालों में काफी स्वस्थ थे, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ-साथ उनमें काफी बदलाव देखा गया। इस रिसर्च के मुताबिक 7 साल की उम्र तक के बच्चों में करीब 26 प्रतिशत बच्चे दुबले-पतले थे, जबकि 5.2 प्रतिशत बच्चे मोटापे का शिकार थे। 2 साल बाद उनके वजन में 3 गुना यानी करीब 14.6 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी देखी गई। यह रिसर्च द लैंसेट रीजनल हेल्थ-साउथ ईस्ट एशिया में पब्लिश की गई थी।
कुपोषण के मामले में 3 प्रतिशत तक की कमी
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बीते तीन सालों में कुपोषण में कमी देखी गई हैं। पोषण ट्रेकर द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार करीब 63 लाख बच्चों में बौनापन और कम वजन के केस में कमी दर्ज की गई। साल 2023 मई में बौनेपन के मामले में 38 प्रतिशत से घटकर 30 प्रतिशत हो गए हैं। वहीं बात करें कम वजन वाले बच्चों की तो साल 2023 में उनका आंकड़ा 18 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो घटकर 12 प्रतिशत कर दिया गया है। जबकि कुपोषण के मामले में 4 प्रतिशत तक यानी 2023 में 7 प्रतिशत से घटकर 2026 में 3 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई।
30 प्रतिशत बच्चे बौनेपन के शिकार
इसके बारे में ग्लोबल न्यूट्रिशन रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पांच साल से कम उम्र के करीब 30 प्रतिशत बच्चे बौनेपन के शिकार हैं, जबकि 17.3 प्रतिशत बच्चे लंबाई के अनुपात में कम वजन की समस्या से जुझ रहे हैं। इस रिसर्च से इस बात का पता चलता है कि देश में बच्चों के सामने खाने की परेशानी नहीं है बल्कि खाने से जुड़ी गलत आदतों को इसका बड़ा जिम्मेदार माना है। फूड्स की क्वालिटी और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के साथ कम एक्सरसाइज सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है।
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