Energy saving cooler tips : कम बिजली खाने वाला Cooler खरीदना है? इन 5 बातों का रखें खास ख्याल

खबर सार :-
Energy saving cooler tips : नया और कम बिजली खाने वाला Cooler खरीदना चाहते हैं? बाजार जाने से पहले ब्लोअर बनाम फैन, कॉपर वाइंडिंग और मोटर वॉट जैसी इन 5 महत्वपूर्ण बातों को जरूर जान लें ताकि कूलिंग मिले शानदार और बिजली बिल आए बिल्कुल कम।
Energy saving cooler tips : कम बिजली खाने वाला Cooler खरीदना है? इन 5 बातों का रखें खास ख्याल
खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: भीषण गर्मी का दौर शुरू होते ही बाजारों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मांग तेजी से बढ़ गई है। सूरज के तीखे तेवरों से बचने के लिए लोग पंखों, कूलरों और एसी की दुकानों पर चक्कर काट रहे हैं। मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए आज भी एयर कंडीशनर (AC) की तुलना में कूलर ही सबसे पसंदीदा और बजट अनुकूल विकल्प माना जाता है। लेकिन अक्सर लोग बाजार जाकर बिना सोचे-समझे कोई भी कूलर उठा लाते हैं और बाद में जब महीने के अंत में बिजली का भारी-भरकम बिल हाथ में आता है, तो उनके होश उड़ जाते हैं।

आमतौर पर जब हम एयर कंडीशनर खरीदने जाते हैं, तो उसकी स्टार रेटिंग (1 Star से 5 Star) पर विशेष ध्यान देते हैं। हमें पता होता है कि 5 स्टार रेटिंग वाला उपकरण बिजली की बचत करेगा। इसके विपरीत, जब बात कूलर खरीदने की आती है, तो अधिकांश उपभोक्ता केवल उसके बाहरी रंग-रूप, लोहे या प्लास्टिक की बॉडी और पानी की टंकी की क्षमता देखकर ही सौदा पक्का कर लेते हैं। यही वह अनजाने में की गई गलती है जो बाद में जेब पर भारी पड़ती है। अगर आप भी इस सीजन में अपने घर के लिए एक नया और कम बिजली खाने वाला Cooler खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो केवल दुकानदार की चिकनी-चुपड़ी बातों में न आएं। आपको कुछ बेहद महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं की गहरी समझ होनी चाहिए ताकि कूलिंग भी दमदार मिले और जेब पर बोझ भी न पड़े।

आइए उन पांच सबसे जरूरी बातों और तकनीकी पैमानों पर विस्तार से नजर डालते हैं, जिन्हें परखकर आप अपने लिए एक सर्वोत्तम और किफायती कूलर का चयन कर सकते हैं।

Energy saving cooler tips :  फैन बनाम ब्लोअर- हवा के झोंके के पीछे का विज्ञान 

बाजार में कदम रखते ही आपके सामने दो मुख्य विकल्प आएंगे। पहला पंखे (Fan) वाला कूलर और दूसरा ब्लोअर (Blower) तकनीक वाला कूलर। अक्सर लोग इन दोनों के बीच के अंतर को समझे बिना किसी को भी चुन लेते हैं, जो बाद में बिजली खपत पर सीधा असर डालता है।

पंखे वाले कूलर की कार्यप्रणाली बेहद सरल और प्रभावी होती है। इसमें लगा बड़ा पंखा कूलर के चारों तरफ लगे कूलिंग पैड्स से नमी को खींचकर हवा को पूरे कमरे में फैलाता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह हवा को किसी एक दिशा में केंद्रित करने के बजाय पूरे कमरे में समान रूप से प्रसारित करता है। बड़े कमरों या हॉल के लिए यह तकनीक सबसे बेहतर मानी जाती है। सबसे खास बात यह है कि पंखे वाले कूलर ब्लोअर की तुलना में काफी कम ऊर्जा का इस्तेमाल करते हैं।

दूसरी तरफ, ब्लोअर तकनीक वाले कूलर हवा को बहुत ही तेज दबाव (High Pressure) के साथ एक निश्चित और सीधी दिशा में फेंकते हैं। अगर आपको किसी एक विशेष कोने में तुरंत और बेहद तेज हवा चाहिए, तो ब्लोअर असरदार साबित होता है। लेकिन इस तेज दबाव को पैदा करने के लिए ब्लोअर के भीतर लगी मोटर को बहुत ज्यादा मशक्कत करनी पड़ती है, जिससे बिजली की खपत काफी बढ़ जाती है। इसलिए, यदि आपका मुख्य उद्देश्य एक कम बिजली खाने वाला Cooler खोजना है, तो बिना किसी संशय के फैन यानी पंखे वाले कूलर को प्राथमिकता दें। यह न केवल आपके कमरे को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखेगा, बल्कि आपके घर के मीटर की रफ्तार को भी धीमा रखेगा।

Energy saving cooler tips :  मोटर का वॉट- जितनी शक्ति, उतनी बिजली की खपत

किसी भी कूलर का असली दिल उसकी मोटर होती है। मोटर की क्षमता को हमेशा 'वॉट' (Wattage) में मापा जाता है। सीधा सा गणित है। मोटर जितने अधिक वॉट की होगी, वह उतनी ही ज्यादा बिजली खींचेगी। उपभोक्ता अक्सर सोचते हैं कि ज्यादा वॉट की मोटर का मतलब है ज्यादा ठंडी हवा, जबकि ऐसा हमेशा सही नहीं होता। कूलिंग का सीधा संबंध कूलर के सही रखरखाव, वेंटिलेशन और कूलिंग पैड्स की गुणवत्ता से होता है।

एक सामान्य घरेलू कूलर की मोटर आमतौर पर 100 वॉट से लेकर 250 वॉट के बीच आती है। तकनीकी आंकड़ों की बात करें तो 100 से 250 वॉट की मोटर वाला कूलर औसतन केवल 0.1 से 0.2 यूनिट प्रति घंटा बिजली की खपत करता है। अगर इसकी तुलना डेढ़ टन के सामान्य एयर कंडीशनर से की जाए, तो कूलर करीब 5 से 7 गुना कम बिजली खाता है।

अब सवाल उठता है कि आपको कितने वॉट का कूलर चुनना चाहिए? अगर आप इसे एक छोटे या मध्यम आकार के कमरे (जैसे 10x10 या 12x12 फीट) के लिए ले रहे हैं, तो 100 से 150 वॉट की मोटर आपके लिए पूरी तरह पर्याप्त होगी। अनावश्यक रूप से बड़ी मोटर वाला कूलर खरीदना बिजली की बर्बादी के अलावा और कुछ नहीं है। हाँ, यदि आपका कमरा बहुत बड़ा है या आप इसे किसी बड़े हॉल के लिए खरीद रहे हैं, तभी 250 वॉट तक की मोटर वाले विकल्प पर जाएं। खरीदारी के वक्त मोटर पर लिखे इस आंकड़े को ध्यान से देखना एक कम बिजली खाने वाला Cooler चुनने की दिशा में आपका दूसरा सबसे बड़ा कदम होगा।

Energy saving cooler tips :  कॉपर वाइंडिंग- लंबी उम्र और कम बिजली का बेजोड़ संगम 

कूलर की मोटर के भीतर जो तारों का जाल होता है, उसे वाइंडिंग कहा जाता है। बाजार में आपको मुख्य रूप से दो तरह की वाइंडिंग वाली मोटर मिलेंगी, एल्युमिनियम वाइंडिंग और कॉपर (तांबा) वाइंडिंग। सस्ते के चक्कर में लोग अक्सर एल्युमिनियम वाइंडिंग वाले कूलर घर ले आते हैं, जो बाद में भारी नुकसान का सबब बनते हैं।

तकनीकी तौर पर कॉपर यानी तांबा विद्युत का एक बेहतरीन सुचालक है। कॉपर वाइंडिंग वाली मोटर में बिजली का प्रतिरोध (Resistance) बहुत कम होता है। इसका सीधा मतलब यह है कि बिजली बिना किसी रुकावट या बर्बादी के सीधे काम में आती है, जिससे मोटर गर्म नहीं होती और ऊर्जा का ह्रास कम से कम होता है। कम गर्म होने के कारण कॉपर वाइंडिंग वाली मोटर सालों-साल बिना किसी खराबी के चलती है और इसकी कार्यक्षमता भी बरकरार रहती है।

इसके विपरीत, एल्युमिनियम वाइंडिंग वाली मोटरें जल्दी गर्म हो जाती हैं। गर्मी के दिनों में जब कूलर लगातार कई घंटों तक चलता है, तो एल्युमिनियम की मोटर के जलने का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है। साथ ही, यह कॉपर की तुलना में अधिक बिजली की खपत भी करती है। इसलिए, जब भी दुकान पर जाएं, दुकानदार से स्पष्ट रूप से पूछें और सुनिश्चित करें कि मोटर 100% कॉपर वाइंडिंग की ही हो। यह निवेश शुरुआत में थोड़ा सा महंगा लग सकता है, लेकिन लंबे समय में यह आपके बिजली बिल को कम रखकर और बार-बार के मरम्मत के खर्च को बचाकर आपके पैसों की पूरी वसूली कर देता है। एक आदर्श कम बिजली खाने वाला Cooler हमेशा कॉपर वाइंडिंग मोटर के साथ ही आता है।

Energy saving cooler tips : हनीकॉम्ब पैड्स- आधुनिक तकनीक से पाएं बेहतरीन शीतलता 

कूलर की ठंडी हवा का पूरा दारोमदार इस बात पर निर्भर करता है कि उसकी खिड़कियों में कौन से कूलिंग पैड्स लगे हैं। पुराने समय में लकड़ी के छिलकों या घास (खस) से बने पैड्स का इस्तेमाल किया जाता था। हालांकि ये घास वाले पैड्स शुरुआती दिनों में अच्छी ठंडक देते हैं, लेकिन इनके साथ कई समस्याएं जुड़ी होती हैं। ये बहुत जल्दी सूख जाते हैं, इनमें धूल-मिट्टी जमा हो जाती है जिससे हवा का प्रवाह रुक जाता है, और ये सड़ने भी लगते हैं जिससे पानी से बदबू आने लगती है। इन्हें हर साल बदलना पड़ता है।

आज की आधुनिक तकनीक ने इस समस्या का समाधान 'हनीकॉम्ब पैड्स' (Honeycomb Pads) के रूप में निकाला है। ये पैड्स दिखने में मधुमक्खी के छत्ते जैसे होते हैं और इन्हें खास सेल्यूलोज सामग्री से बनाया जाता है। अपनी विशिष्ट बनावट के कारण ये पानी को बहुत लंबे समय तक अपने भीतर सोखकर रखने की क्षमता रखते हैं। पानी के लगातार टिके रहने के कारण कूलर से निकलने वाली हवा हर वक्त ठंडी और सुखद बनी रहती है।

इसका बिजली की बचत से क्या संबंध है? दरअसल, जब पैड्स लंबे समय तक गीले रहेंगे, तो कमरे का तापमान जल्दी गिरेगा। कमरा एक बार ठंडा हो जाने के बाद आप कूलर के वॉटर पंप को बंद कर सकते हैं या कूलर को कम स्पीड पर भी चला सकते हैं। इससे मोटर पर लोड कम पड़ता है और बिजली की अतिरिक्त बचत होती है। साथ ही, हनीकॉम्ब पैड्स टिकाऊ होते हैं और इन्हें बार-बार बदलने की जरूरत नहीं पड़ती, बस सीजन में एक-दो बार साफ कर देना ही काफी होता है।

Energy saving cooler tips : वॉटर टैंक का आकार- कमरे के हिसाब से सही तालमेल 

कूलर खरीदते समय लोग अक्सर एक और बड़ी गलती करते हैं—कमरे के आकार के विपरीत बहुत छोटा या बहुत बड़ा वॉटर टैंक चुन लेना। लोगों को लगता है कि जितना बड़ा टैंक होगा, उतना ही अच्छा होगा, लेकिन यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। एक कम बिजली खाने वाला Cooler वही है जो आपके कमरे की जरूरत के हिसाब से बिल्कुल सटीक बैठता हो।

यदि आप एक छोटे कमरे के लिए 70 या 80 लीटर की विशाल टंकी वाला कूलर खरीद लेते हैं, तो उसकी बड़ी मोटर और भारी पंप बेवजह ज्यादा बिजली की खपत करेंगे। वहीं दूसरी ओर, यदि आप एक बड़े कमरे के लिए केवल 15 से 20 लीटर के टैंक वाला छोटा पर्सनल कूलर ले आते हैं, तो वह कमरे को ठंडा करने में नाकाम रहेगा। कमरा ठंडा न होने की स्थिति में आप कूलर को चौबीसों घंटे उच्चतम स्पीड (High Speed) पर चलाएंगे, जिससे पानी भी जल्दी खत्म होगा, मोटर पर दबाव बढ़ेगा और बिजली का मीटर तेजी से भागेगा।

नियम बिल्कुल सीधा और स्पष्ट होना चाहिए:

  • छोटे कमरों के लिए (Personal Spaces): 15 से 25 लीटर की क्षमता वाला वॉटर टैंक सबसे उत्तम और किफायती साबित होता है।
  • मध्यम आकार के कमरों के लिए (Bedrooms): 30 से 45 लीटर की क्षमता का चयन करें।
  • बड़े हॉल या लिविंग रूम के लिए (Commercial/Large Spaces): 50 से 70 लीटर या उससे अधिक क्षमता वाले डेजर्ट कूलर का चुनाव करें।

सही आकार की टंकी होने से पानी का संतुलन बना रहता है, बार-बार पानी भरने की झंझट से मुक्ति मिलती है और कूलर अपनी निर्धारित क्षमता पर सबसे कम बिजली खाकर सर्वश्रेष्ठ कूलिंग प्रदान करता है।

Energy saving cooler tips : अतिरिक्त स्मार्ट फीचर्स पर भी डालें एक नजर 

आधुनिक युग के कूलरों में कुछ ऐसे फीचर्स भी आने लगे हैं जो बिजली बचाने में अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी भूमिका निभाते हैं। उदाहरण के लिए, 'इन्वर्टर कम्पैटिबिलिटी' (Inverter Compatibility)। आज बाजार में ऐसे कई मॉडल उपलब्ध हैं जो आपके घर के छोटे इन्वर्टर पर भी आसानी से चल सकते हैं क्योंकि उनकी बिजली खपत बेहद न्यूनतम होती है। पावर कट होने पर भी ये आपके इन्वर्टर की बैटरी को जल्दी खत्म नहीं करते।

इसके अलावा, स्पीड कंट्रोल सेटिंग्स (High, Medium, Low) का बुद्धिमानी से उपयोग करें। रात के समय जब मौसम थोड़ा ठंडा हो जाता है, तो कूलर को हमेशा लो स्पीड पर चलाएं। कई कूलरों में 'इको मोड' या 'स्लीप मोड' भी आता है जो एक तय समय के बाद पंप को अपने आप बंद या चालू करता रहता है। इन छोटी-छोटी सजगताओं को अपनाकर और ऊपर बताई गई पांच तकनीकी बातों को गांठ बांधकर जब आप बाजार जाएंगे, तो निश्चित रूप से एक बेहतरीन, टिकाऊ और कम बिजली खाने वाला Cooler अपने घर लाएंगे, जो इस चिलचिलाती गर्मी में भी आपकी जेब को पूरी तरह ठंडा रखेगा।

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