Pradeep Rawat passes away : लगान और गजनी फेम दिग्गज अभिनेता का 74 वर्ष में निधन

खबर सार :-

Pradeep Rawat passes away : तीन दशकों से अधिक के अपने अभिनय सफर में प्रदीप रावत ने हिंदी समेत दक्षिण भारतीय भाषाओं की बहुचर्चित फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं।
Pradeep Rawat passes away : 74 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस, फिल्म जगत में शोक

खबर विस्तार : -

मुंबई: भारतीय फिल्म उद्योग के जाने-माने अभिनेता प्रदीप रावत का मुंबई में 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। सिनेमा जगत में अपनी विशिष्ट अभिनय शैली और सशक्त खलनायक की भूमिकाओं के लिए पहचाने जाने वाले रावत पिछले कुछ समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके परिवार में उनकी पत्नी और पुत्र विक्रमादित्य हैं। प्रदीप रावत निधन की इस दुखद खबर के सामने आने के बाद मनोरंजन जगत, सहयोगियों और प्रशंसकों के बीच शोक की लहर है।

इस दुखद समाचार की आधिकारिक पुष्टि उनके सह-कलाकार और लंबे समय के मित्र यशपाल शर्मा ने की। आशुतोष गोवारिकर की कालजयी फिल्म 'लगान' में प्रदीप रावत के साथ काम कर चुके यशपाल शर्मा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से श्रद्धांजलि व्यक्त की। उन्होंने अपने संदेश में रावत के साथ बिताए दिनों को याद करते हुए लिखा कि 'लगान' में उनके साथी और 'गजनी' फेम अभिनेता अब इस दुनिया में नहीं रहे। शर्मा की इस पोस्ट के बाद से ही फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग लगातार अपनी संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं।

कैंसर से लड़ाई और अंतिम दिन

उपलब्ध जानकारियों के अनुसार, वरिष्ठ अभिनेता प्रदीप रावत निधन से पहले पिछले कुछ समय से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से पीड़ित थे। स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण उन्हें मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ चिकित्सकों की देखरेख में उनका उपचार चल रहा था। हालांकि, तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका और अंततः उन्होंने दम तोड़ दिया। अस्पताल प्रशासन या परिवार की ओर से बीमारी के विस्तृत विवरण पर कोई पृथक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन उनके करीबी सहयोगियों ने उनके अस्वस्थ होने की पुष्टि की थी।

'महाभारत' के अश्वत्थामा से मिली घर-घर पहचान

चार दशक लंबे अपने अभिनय करियर में प्रदीप रावत ने भारतीय स्क्रीन पर कई अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1985 में निर्देशक सुभाष घई की फिल्म 'मेरी जंग' से की थी, जिसमें उन्होंने एक पुलिस इंस्पेक्टर का छोटा लेकिन प्रभावी किरदार निभाया था। इसके बाद उन्होंने 'समुंदर' (1986) में एक नौसेना अधिकारी की भूमिका निभाई। वर्ष 1990 में अमिताभ बच्चन स्टारर फिल्म 'अग्निपथ' में भी वे एक महत्वपूर्ण सहयोगी किरदार में नज़र आए। हालांकि, उन्हें देशव्यापी पहचान और लोकप्रियता बी.आर. चोपड़ा के ऐतिहासिक धारावाहिक 'महाभारत' से मिली, जिसमें उन्होंने गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा का जीवंत अभिनय किया था।

प्रदीप रावत के अभिनय जीवन से जुड़ी एक रोचक और तथ्यपरक बात यह भी है कि वे केवल पर्दे तक सीमित कलाकार नहीं थे, बल्कि अभिनय में आने से पहले वे बैंक ऑफ बड़ौदा में कार्यरत थे। इसके साथ ही, खेल के मैदान में भी उनकी गहरी रुचि थी और वे राष्ट्रीय स्तर के पावरलिफ्टर रह चुके थे। उनके इस शारीरिक सौष्ठव और खेल पृष्ठभूमि ने आगे चलकर फिल्मों में उनके द्वारा निभाए गए सख्त, रोबदार और खलनायक के किरदारों को एक स्वाभाविक मजबूती प्रदान की।

आमिर खान की फिल्मों में यादगार भूमिकाएं

फिल्म समीक्षकों के अनुसार, प्रदीप रावत निधन से भारतीय सिनेमा ने एक ऐसा कलाकार खो दिया है जो हर भाषा के दर्शक के बीच समान रूप से सहज था। नब्बे के दशक के उत्तरार्ध और 2000 के दशक की शुरुआत में उन्होंने आमिर खान की कई प्रमुख फिल्मों में निर्णायक भूमिकाएं निभाईं। 1999 में आई क्राइम-ड्रामा फिल्म 'सरफरोश' में उन्होंने 'सुल्तान' नाम के गुर्गे का किरदार निभाया, जो कहानी के मोड़ के लिए अहम था।

इसके ठीक बाद, 2001 में आई ऑस्कर-नामांकित फिल्म 'लगान' में उन्होंने 'देवा सिंह सोढ़ी' का किरदार निभाया। फिल्म में देवा का किरदार एक ऐसे सिख ग्रामीण का था जो शुरुआत में भुवन के क्रिकेट प्रस्ताव का विरोध करता है, लेकिन बाद में ब्रिटिश अधिकारियों के खिलाफ टीम का सबसे आक्रामक खिलाड़ी बनता है। इसके बाद वर्ष 2008 में आई ए.आर. मुरुगदॉस की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'गजनी' में उन्होंने मुख्य खलनायक 'गजनी धर्मात्मा' की भूमिका निभाई, जिसके नाम पर फिल्म का शीर्षक था। इस भूमिका ने उन्हें आधुनिक भारतीय सिनेमा के सबसे चर्चित खलनायकों की सूची में ला खड़ा किया।

दक्षिण भारतीय सिनेमा में अमिट छाप

हिंदी सिनेमा के अलावा, प्रदीप रावत ने दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योगों में भी एक बेहद सफल पारी खेली। तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम सिनेमा में उन्होंने कई बड़े बजट की फिल्मों में मुख्य विलेन और चरित्र भूमिकाएं निभाईं। एसएस राजामौली और ए.आर. मुरुगदॉस जैसे दिग्गजों के निर्देशन में काम करते हुए उन्होंने दक्षिण में अपनी एक अलग पहचान बनाई।

उनके प्रमुख प्रोजेक्ट्स में 'स्टालिन', 'वीरम', '1: नेनोक्कडिने', 'लौक्यम', 'नेनु शैलजा', 'सर्राइनोडु', 'नेने राजू नेने मंत्री', 'आयिरथिल इरुवर', 'मार्केट राजा एमबीबीएस' और 'मिस मैच' जैसी फिल्में शामिल हैं। उन्होंने अपने करियर में भाषाओं की सीमा को तोड़ते हुए हर भाषा के दर्शक वर्ग में अपना प्रभाव छोड़ा। प्रदीप रावत का जन्म महाराष्ट्र में हुआ था। बैंक की नौकरी और एथलेटिक्स के सफर के बाद उन्होंने 1980 के दशक के मध्य में अभिनय की दुनिया में कदम रखा था। 1985 की फिल्म 'मेरी जंग' से शुरू हुआ उनका सफर 'महाभारत', 'लगान' और 'गजनी' जैसी ऐतिहासिक कृतियों तक पहुंचा। तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने 100 से अधिक फिल्मों और धारावाहिकों में काम किया। उनका निधन भारतीय चरित्र अभिनय और खलनायकी के एक महत्वपूर्ण अध्याय का समापन माना जा रहा है।

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