Happy Birthday जोगिंदर शर्मा: 2007 टी20 विश्व कप फाइनल के वो ऐतिहासिक पल और उनका क्रिकेट सफर

खबर सार :-

भारत को साल 2007 में पहला टी20 विश्व कप जिताने में अहम भूमिका निभाने वाले जोगिंदर शर्मा का अंतरराष्ट्रीय करियर सीमित रहा। घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करने वाले जोगिंदर ने भारत के लिए कुल आठ अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले।
जोगिंदर शर्मा का जीवन परिचय और 2007 टी20 विश्व कप का ऐतिहासिक सफर

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट इतिहास में साल 2007 के टी20 विश्व कप फाइनल का जिक्र आते ही जोगिंदर शर्मा का नाम सबसे पहले सामने आता है। उन्होंने टूर्नामेंट के खिताबी मुकाबले के आखिरी ओवर में पाकिस्तान के बल्लेबाज मिस्बाह उल हक को आउट कर भारत को पहली बार टी20 चैंपियन बनाया था। इस एक ओवर ने उन्हें भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के बीच अमर कर दिया, हालांकि इसके बावजूद उनका अंतरराष्ट्रीय करियर लंबा नहीं चल सका।

रोहतक से क्रिकेट के मैदान तक का संघर्ष

हरियाणा के रोहतक में 23 अक्टूबर 1983 को जन्मे जोगिंदर को बचपन से ही खेल में गहरी रुचि थी। सीमित संसाधन होने के बावजूद उन्होंने क्रिकेट में अपना मुकाम बनाने के लिए कड़ा परिश्रम किया। घरेलू क्रिकेट में उनका आगाज बेहद प्रभावशाली रहा था। उन्होंने मध्य प्रदेश के खिलाफ अपने पदार्पण मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए गेंदबाजी में ग्यारह विकेट झटके और साथ ही इक्यानवे रन का योगदान दिया। अपने पूरे प्रथम श्रेणी करियर के दौरान उन्होंने सतहत्तर मुकाबलों में दो सौ संतानवे विकेट हासिल किए और बल्लेबाजी में दो हजार आठ सौ चार रन बनाए।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण और सफर

उन्होंने भारत के लिए अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत साल 2004 में बांग्लादेश के खिलाफ एक दिवसीय मैच से की थी। इस मुकाबले में उन्होंने आठ ओवर गेंदबाजी करते हुए अट्ठाईस रन देकर एक विकेट अपने नाम किया। इसके बाद उन्होंने साल 2007 में इंग्लैंड के खिलाफ अपना पहला टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला। यह वही ऐतिहासिक मैच था जिसमें युवराज सिंह ने स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ही ओवर में लगातार छह छक्के जड़े थे। हालांकि, उस मैच में उनकी गेंदबाजी महंगी साबित हुई थी और उन्होंने चार ओवर में सत्तावन रन खर्च किए थे और कोई सफलता हासिल नहीं की थी।

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टी20 विश्व कप फाइनल का वह रोमांचक पल

विश्व कप के खिताबी मुकाबले में पाकिस्तान को जीत के लिए अंतिम ओवर में तेरह रनों की दरकार थी। भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने सभी को चौंकाते हुए गेंद जोगिंदर शर्मा के हाथों में थमा दी। जोगिंदर कप्तान के इस भरोसे पर पूरी तरह खरे उतरे। उन्होंने शुरुआती गेंदों पर दबाव झेलते हुए ओवर की तीसरी गेंद पर मिस्बाह उल हक का विकेट चटकाया और भारत की जीत सुनिश्चित कर दी।

सीमित रहा अंतरराष्ट्रीय करियर

इस ऐतिहासिक जीत के बाद भी वह भारतीय टीम में अपनी जगह स्थायी नहीं रख सके। उन्होंने भारत के लिए कुल चार एक दिवसीय और चार टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। एक दिवसीय मैचों में उनके नाम एक विकेट दर्ज है, जबकि टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में उन्होंने चार विकेट हासिल किए। उन्होंने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला चौबीस जनवरी 2007 को वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला था, जिसके बाद वह दोबारा राष्ट्रीय टीम में वापसी नहीं कर पाए।

साल 2007 में दक्षिण अफ्रीका में आयोजित पहले आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप में भारतीय टीम युवा खिलाड़ियों के साथ उतरी थी। इस टूर्नामेंट में कई रोमांचक मुकाबले देखने को मिले, लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ फाइनल मुकाबला सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। इस खिताबी जीत ने देश में टी20 फॉर्मेट की लोकप्रियता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया और आगे चलकर इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की शुरुआत का मार्ग प्रशस्त किया।

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