देश की संप्रभुता, शांति और अखंडता का संदेश देता है ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’, जानें सरदार पटेल का योगदान

खबर सार :-

राष्ट्रीय एकता दिवस 31 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह दिवस राष्ट्र निर्माण में सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है।
31 अक्टूबर को क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय एकता दिवस? जानें महत्व

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के उपलक्ष्य में हर साल 31 अक्टूबर को 'राष्ट्रीय एकता दिवस' मनाया जाता है। यह दिन भारत में राष्ट्रीय और राजनीतिक एकीकरण तथा एकता को बढ़ावा देने में उनकी अहम भूमिका को सम्मान देता है। यह दिन देश की संप्रभुता, शांति और अखंडता को बनाए रखने के महत्व पर जोर देता है और नागरिकों को 'विविधता में एकता' के विचार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताने के लिए प्रोत्साहित करता है।

इस दिन की शुरुआत भारत सरकार द्वारा 2014 में की गई थी, ताकि राष्ट्र-निर्माण में सरदार पटेल के उल्लेखनीय योगदान को याद रखा जा सके। इसके बाद, 31 अक्टूबर 2015 को राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' पहल की घोषणा की। इसका उद्देश्य देश के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के बीच निरंतर और व्यवस्थित संवाद स्थापित करना है, जिससे आपसी समझ और जुड़ाव को बढ़ावा मिल सके।

एकता नगर में होता है भव्य कार्यक्रम

इस अवसर पर पूरे देश में 'रन फॉर यूनिटी' (एकता के लिए दौड़) जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें आम जनता पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लेती है। सरकारी कार्यालयों, स्कूलों और विभिन्न संस्थानों में 'राष्ट्रीय एकता शपथ' ली जाती है, जिसमें देश की एकता और सुरक्षा की रक्षा करने का संकल्प लिया जाता है। भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती मनाने के लिए, हर साल 31 अक्टूबर को गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में स्थित दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' पर एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम में शामिल होते हैं। इस वर्ष भी एक भव्य आयोजन किया जा रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री हिस्सा लेंगे।

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560 से अधिक रियासतों का विलय किया

गौरतलब है कि भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1947 में स्वतंत्रता मिलने के बाद, देश के एकीकरण की प्रक्रिया में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्हें 560 से अधिक रियासतों को भारतीय संघ में शामिल करने का कार्य सौंपा गया था—ये वे क्षेत्र थे जो भारत के कुल भू-भाग और जनसंख्या का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा थे। भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम के तहत, रियासतों के शासकों को यह विकल्प दिया गया था कि वे या तो भारत में शामिल हो जाएं, या पाकिस्तान में, या फिर दोनों से स्वतंत्र रहें। देश को टुकड़ों में बंटने से बचाने के लिए, सरदार पटेल ने कूटनीतिक बातचीत, समझाने-बुझाने के तरीकों और जहां जरूरी हुआ, वहां सख्त प्रशासनिक कदमों का सहारा लिया। अपने नेतृत्व वाले 'स्टेट्स डिपार्टमेंट' (रियासती विभाग) के माध्यम से, सरदार पटेल ने 15 अगस्त 1947 तक या उसके कुछ समय बाद तक इन रियासतों का सफलतापूर्वक विलय कर लिया, और इस तरह आधुनिक भारत की क्षेत्रीय अखंडता सुनिश्चित की। उनके प्रयासों ने देश को बिखरने से बचाया और एक एकजुट लोकतांत्रिक गणराज्य की नींव रखी। सरदार पटेल के इन्हीं योगदानों को याद करने के लिए 'राष्ट्रीय एकता दिवस' मनाया जाता है।

FAQ

1- राष्ट्रीय एकता दिवस क्यों मनाया जाता है?

सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के उपलक्ष्य में हर साल 31 अक्टूबर को 'राष्ट्रीय एकता दिवस' मनाया जाता है। यह दिवस राष्ट्र-निर्माण में सरदार पटेल के उल्लेखनीय योगदान को याद रखने के लिए मनाया जाता है।

2- राष्ट्रीय एकता दिवस मनाने की शुरुआत कब से हुई?

राष्ट्रीय एकता दिवस मनाने की शुरुआत भारत सरकार द्वारा 2014 में की गई थी। 

3- इस दिन क्या होता है?

इस दिन हर साल गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में स्थित दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' पर एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इसके अलावा पूरे देश में 'रन फॉर यूनिटी' (एकता के लिए दौड़) जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। 

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