ऑपरेशन सिंदूर से दिखा भारत का आतंकवाद के प्रति दृष्टिकोण, आतंकवादियों के बुनियादी ढ़ांचे को किया तहस-नहस

खबर सार :-

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आपरेशन सिंदूर के समय दुनिया ने देखा कि भारत का आतंकवादियों के खिलाफ क्या दृष्टिकोण है। इस अभियान के समय भारत ने आतंकवादियों के बुनियादी ढ़ांचे को तहस-नहस कर दिया।
आपरेशन सिंदूर के समय दिखा भारत का आतंकवादियों के खिलाफ दृष्टिकोण

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: भारत का ऐसी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में भरोसा है जो विश्वास, सहयोग और सामूहिक जिम्मेदारी वाली हो।  सहयोगात्मक भावना की इच्छाशक्ति ही हमें शांति व्यवस्था के सामने आ रही चुनौतियों से पार पाने में सक्षम बनाएगी। फिलीपींस के सेबू में आयोजित 'आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक (एडीएमएम प्लस)' में यह बातें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कही। राजनाथ सिंह कहा कि एशियाई केंद्र की भूमिका को भारत ने हमेशा ही महत्वपूर्ण बताया है। भारत ने एक खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र की परिकल्पना हमेशा की है। साथ ही समावेशी और नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर आधारित होने की संकल्पना की है। आसियान के साथ भारत का लंबे समय से रणनीतिक जुड़ाव रहा है। यह जुड़ाव सामूहित हितों, आपसी सम्मान और व्यावहारिक सहयोग पर आधारित रहा है। 

आपरेशन सिंदूर से दिखा भारत का आतंकवाद के प्रति दृष्टिकोण 

रक्षा मंत्री ने कहा कि आपरेशन सिंदूर के समय भारत का आतंकवादियों के खिलाफ दृष्टिकोण साफ दिखायी पड़ा। उस दौरान हमने बड़े पैमाने पर आतंकवादियों के बुनियादी ढ़ांचे को तहस-नहस किया। उस समय आतंक खिलाफ भारत के नजरिए की घोषणा की गई थी। भारत का आतंकवाद-निरोध का अनुभव दशकों तक सीमा पार सुरक्षा की चुनौतियों से सामने आया है। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत अपने एडीएमएम-प्लस साझेदारों के साथ आतंकवाद विरोधी लड़ाई को साझा करने के लिए तैयार है। कंबाइंड सैन्य अभ्यास, बेहतर क्षमता निर्माण, मजबूत खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान कर एक-दूसरे की क्षमताओं को मजबूत बना सकते हैं।

भारत ऐसे इंडो-पैसिफिक का समर्थक है, जिसमें सुरक्षा हो, मजबूती हो और शांति व स्थिरता के साथ सामूहिक प्रयास का परिणाम भी सामने आए। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून को वैध मानने के साथ समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में दृढ़ता का पालन भी करता है। नेविगेशन की स्वतंत्रता और वैश्विक समुद्री संचार की सुरक्षा दशकों के निरंतर अनुभवों पर आधारित है। वर्ष 2008 से ही भारतीय नौसेना ने अदन की खाड़ी जैसे अत्यधिक अस्थिर समुद्री गलियारे में निरंतर सक्रिय उपस्थिति बनाए रखी है। इस दौरान भारत ने दूसरे देशों के हितों को कमजोर करने वाले किसी बल का भी प्रयोग नहीं किया। युद्धपोत की तैनाती के जरिए भारतीय नौसेना ने व्यापारी जहाजों को सुरक्षा भी प्रदान की। साथ ही समुद्र में जहाजों के अपहरण की कई कोशिशों को भी नाकाम किया। 

क्षेत्रीय हितधारकों के सामूहिक हितों की रक्षा करना मकसद 

रक्षा मंत्री ने कहा कि समुद्री सुरक्षा के प्रति ऐसे समय में सिर्फ बयान काफी नहीं है जब ग्लोबल व्यापार मार्गों को नए अंतरराष्ट्रीय मानकों का सामना करना पड़ रहा है। भारत का हिंद महासागर और व्यापक इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में विश्वसनीय सुरक्षा प्रदाता के रूप में कार्य करने का संकल्प है। भारत को इस क्षेत्र की शांति, सुरक्षा और समृद्धि से खोया हुआ संकेत मिलता है। समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन पर जोर देना भारत के कानून का नियम है। भारत का मकसद सभी क्षेत्रीय हितधारकों के सामूहिक हितों की रक्षा करना है, न कि नेविगेशन और ओवरफ्लाइट की स्वतंत्रता को अवैध बनाना। भारत समुद्री सुरक्षा, खोज-बचाव, मानवीय सहायता, व्यावसायिक संपर्क, क्षमता निर्माण और अंतर्राष्ट्रीय कानून का सम्मान करता है। भारत इन क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत बनाने, आसियान भागीदारों के साथ मिलकर काम करने के तैयार है। 

मजबूत रक्षा "यूथ ब्रिज" स्थापित करने का प्रस्ताव 

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का इन संभावनाओं को हकीकत में बदलने के लिए मजबूत रक्षा "यूथ ब्रिज" स्थापित करने का प्रस्ताव है। जिसका मकसद लोगों से लोगों को जोड़ना, डिजिटल नवाचार और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना है। उन्होंने एडीएमएम-प्लस के दोस्तों के साथ युवाओं को जोड़ने में मदद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि बैठक का संयुक्त वक्तव्य "युवा शांति और सुरक्षा" अगली पीढ़ी को अगली पीढ़ी के सशक्त बनाने के दृष्टिकोण को रेखांकित करता है। इस क्षेत्र के भविष्य के लिए ​विद्यार्थियों को तैयार किया जा रहा है। आज भारत की सबसे बड़ी ताकत युवा आबादी, उनकी ऊर्जा, गतिशीलता और आकांक्षाएं हैं। जिसके जरिए हम भारत और आसियान के सशक्तिकरण की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रहे हैं। जनसंख्या की बात करें तो भारत और आसियान देशों में अधिकतर युवा हैं। इस समानता के चलते हमें विशेष बढ़त मिलती है और भविष्य को एक-दूसरे से जोड़ती है।

ये भी पढ़ें- भारत और दक्षिण कोरिया के नौसैनिक करेंगे द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास, आपरेशनल अनुभव साझा करेंगी दोनों नौसेनाएं

अन्य प्रमुख खबरें