दिवंगत अभिनेता राजेश खन्ना से कथित रिश्ते की मान्यता की मांग खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने बताया 'विलासितापूर्ण मुकदमेबाजी'

खबर सार :-

उच्चतम न्यायालय ने अनीता आडवाणी की याचिका खारिज करते हुए राजेश खन्ना से रिश्ते को मान्यता देने की मांग को विलासितापूर्ण मुकदमेबाजी बताया है।
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की राजेश खन्ना से रिश्ते को मान्यता की मांग

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में पूर्व अभिनेत्री अनीता आडवाणी की उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने दिवंगत अभिनेता राजेश खन्ना के साथ अपने कथित रिश्ते को विवाह के रूप में कानूनी मान्यता देने की मांग उठाई थी। जस्टिस एमएम सुंदरेश की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई के दौरान याचिका को खारिज करते हुए इसे विलासितापूर्ण मुकदमेबाजी की संज्ञा दी है। इस कानूनी मामले में अनीता आडवाणी (Anita Advani) लंबे समय से अपनी कानूनी लड़ाई लड़ रही थीं।

सुनवाई के दौरान वकीलों के तर्क

मामले की सुनवाई के दौरान अनीता आडवाणी की ओर से पेश हुए वकील ने अदालत के समक्ष पक्ष रखते हुए कहा कि याचिकाकर्ता केवल अपने सम्मान की मांग कर रही है। वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता को उसका उचित अधिकार मिलना चाहिए और इस पूरी कानूनी लड़ाई का मुख्य आधार मानवीय सम्मान की भावना है। हालांकि, अदालत ने इन सभी तर्कों को विस्तार से सुनने के बाद याचिका को खारिज करने का अंतिम निर्णय सुनाया।

कानूनी लड़ाई का लंबा इतिहास

यह पूरा विवाद जुलाई 2012 में अभिनेता राजेश खन्ना के निधन के बाद शुरू हुआ था। इसके तुरंत बाद, अनीता आडवाणी (Anita Advani) ने मुंबई के एक ट्रायल कोर्ट में दीवानी मुकदमा दायर किया था। ट्रायल कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए साल 2017 में इस मुकदमे को खारिज कर दिया था। इस फैसले से असंतुष्ट होकर आडवाणी ने बॉम्बे उच्च न्यायालय में अपील दायर की, जिसे उच्च न्यायालय ने भी बाद में खारिज कर दिया था। उच्च न्यायालय के इसी आदेश को अनीता आडवाणी (Anita Advani) ने अंततः उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी।

लिव-इन रिलेशनशिप और घरेलू हिंसा के दावे

अपनी याचिकाओं में आडवाणी ने दावा किया था कि वह अभिनेता राजेश खन्ना के साथ कई वर्षों तक लिव-इन रिलेशनशिप में रही थीं। उनके अनुसार, साल 2012 में राजेश खन्ना के निधन के बाद उनकी अलग रह रहीं पत्नी डिंपल कपाड़िया, बेटी ट्विंकल खन्ना और दामाद अक्षय कुमार ने उन्हें मुंबई स्थित राजेश खन्ना के प्रसिद्ध बंगले 'आशीर्वाद' से बाहर निकाल दिया था। इसके बाद साल 2013 में आडवाणी ने घरेलू हिंसा कानून के तहत डिंपल कपाड़िया और अन्य पारिवारिक सदस्यों के खिलाफ मजिस्ट्रेट के सामने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी।

फ्लैट और गुजारा भत्ते की मांग

कानूनी कार्यवाही के दौरान अनीता आडवाणी (Anita Advani) ने मासिक गुजारा भत्ता देने की मांग के साथ-साथ मुंबई के पॉश बांद्रा इलाके में तीन बेडरूम वाले एक फ्लैट की भी मांग की थी। हालांकि, साल 2015 में उच्च न्यायालय ने आडवाणी की इस शिकायत को पूरी तरह से खारिज कर दिया था। उच्च न्यायालय का स्पष्ट मत था कि खन्ना के साथ आडवाणी का रिश्ता पारंपरिक विवाह जैसा नहीं था, इसलिए वह घरेलू हिंसा कानून के प्रावधानों के अंतर्गत किसी भी प्रकार की कानूनी राहत की हकदार नहीं हैं।

परिवार के सदस्यों को घसीटने पर टिप्पणी

न्यायालय ने अपने पिछले आदेशों में यह भी स्पष्ट किया था कि दिवंगत राजेश खन्ना के परिवार के सभी सदस्यों को इस तरह की कानूनी कार्यवाही में बेवजह नहीं घसीटा जा सकता है, क्योंकि आडवाणी कभी भी उनके साथ एक ही घर में नहीं रहीं। अनीता आडवाणी (Anita Advani) ने अपने शुरुआती दौर में 'साजिश' और 'दासी' जैसी कुछ फिल्मों में अभिनय भी किया था, लेकिन यह कानूनी विवाद उनके निजी संबंधों और संपत्तियों के अधिकारों को लेकर लंबे समय से सुर्खियों में बना हुआ था।

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