राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में उत्पादन पर होगा जोर, शिवराज सिंह होंगे मुख्य अतिथि
खबर सार :-
किसानों की आय बढ़ाने के मकसद से कृषि क्षेत्र का उत्पादन और फसल विविधीकरण टिकाऊ बनाने के लिए रवि की फसल की तैयारी के दृष्टिगत एक विशेष आयोजन होने जा रहा है। इसमें राज्यों के कृषि विभागों को भी आमंत्रित किया गया है।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली, सरकारों से उम्मीद की गई है कि किसानों के संबंध में योजनाओं को सार्थक बनाने में पहल करें। नई दिल्ली में एक कार्यक्रम दो दिन के लिए आयोजित किया जा रहा है। सोमवार से इस सम्मेलन के मद्देनजर कहा जा रहा है कि केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने के उद्देश्य से योजनाओं को प्रभावी बनाने की दिशा में आयोजित किया जा रहा है।
खेत स्तर पर परिणाम सुनिश्चित करने पर कार्यक्रम में जोर रहेगा। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से 28 और 29 सितंबर को पूसा स्थित इन एएससी परिसर के भारत रत्न श्री शुभ्रमण्ययम सभागार में राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन में केंद्रीय कृषि मंत्री की मौजूदगी रहेगी और वह कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह केंद्रीय योजनाओं की जानकारी देगे।
राज्यों के कृषि विभाग के अधिकारियों की रहेगी मौजूदगी
इसमें राज्यों के कृषि मंत्री, केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद आईसीएआर तथा संबंधित पक्ष भी यहां पर शामिल रहेंगे। कार्यक्रम के अंतर्गत रवी फसल को लेकर मंथन किया जाएगा। इसमें विशेषज्ञों के जरिए सुझाव दिए जाएंगे और अपना पक्ष रखेंगे। रवी की फसल को कैसे बेहतर बनाया जाए और किसानों को ज्यादा लाभ पहुंचे, इस पर भी सुझाव मांगे जाएंगे। सम्मेलन के विषय के अंतर्गत राज्य और केंद्र सरकार में समन्वय को मजबूत करने तथा कृषि उत्पादन, उत्पादकता तथा किसानों की आय बढ़ाने के लिए समन्वित एवं परिणाम वाली रणनीति तैयार करने पर चर्चा होगी।
पिछले कुछ समय से लेकर अब तक विभिन्न राज्यों में कृषि सम्मेलनों के अंतर्गत आयोजित निष्कर्ष को इस आयोजन में सोमवार को साझा किया जाएगा। सम्मेलनों के जरिए लोगों ने क्या सीखा और कैसे हम बेहतर कर सकते हैं? इस दिशा में भी अपने सुझाव दिए जाएंगे। सम्मेलन के पहले दिन व्यापक विषयों पर चर्चा की जाएगी। इसमें किसानों के आत्मनिर्भर, विविधीकरण और उत्पादन के टिकाऊ होने पर चर्चा की जाएगी। जलवायु, अनुकूल कृषि, डिजिटल कृषि, बुनियादी ढांचा, वित्त पोषण और कृषि क्षेत्र में जोखिम के प्रबंधन पर भी लोग अपना पक्ष रखेंगे।
कृषि विशेषज्ञ और अधिकारी दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता के लिए विषम परिस्थितियों से निपटना बताएंगे। इसमें कृषि बागवानी कपास बीज की उपलब्धता और कृषि मूल्य श्रृंखला में सुधार के अंतर्गत अपना पक्ष रखेंगे। प्रकृतित खेती, मिट्टी का स्वास्थ्य, परीक्षण, कृषि मशीनीकरण, वित्त पोषण, उत्पादक संगठन, वित्त पोषण, बुनियादी ढांचे, विपणन में सुधार, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, डिजिटल कृषि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, पौध संरक्षण और कृषि सांख्यिकी जैसे अनेकों विषय हैं, जिसके अंतगर्त लोग अपना सुझाव देंगे।
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पूर्व के प्रयासों और परिणामों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा
इस दौरान सम्मेलन में रवी मौसम के दौरान क्रियान्वयन की प्रमुख चुनौतियों पर भी अपना पक्ष रखा जाएगा। इनसे निपटने के इंतजाम क्या हो सकते हैं? इस पर भी लोग अपनी राय देंगे। राज्यों की प्राथमिकताओं और ठोस रणनीतियों की पहचान बताई जाएगी। इसमें योजनाओं के बीच वितरण व्यवस्था मजबूत करने और खेत स्तर पर प्रभावी परिणाम सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह कुछ ऐसे विषय हैं जो चर्चाओं में भी शामिल किए जाएंगे।
सम्मेलन के दूसरे दिन क्षेत्रीय कृषि सम्मेलनों से मिले प्रमुख अनुभव साझा किए जाएंगे। कृषि विशेषज्ञों और विभिन्न विश्वविद्यालयों के अंतर्गत होने वाली गोष्ठियों से मिली सीख के आधार पर कार्यक्रम में लोग अपने विचार साझा करेंगे। चर्चाओं के निष्कर्ष पर भी यहां चर्चा की जाएगी। इस दौरान रवी मौसम में मौसम संबंधी पूर्वानुमान, उर्वरकों की उपलब्धता, उनके संतुलन, उपयोग, डिजिटल कृषि मिशन एग्री स्ट्राइक, डिजिटल फसल सॉल्यूशन पर भी पक्ष साझा किए जाएंगे।
इस दौरान ज्यादा से ज्यादा यह कोशिश की जाएगी कि किसानों की समस्याओं को दूर किया जाए। उन्नति तकनीकी को खेत तक पहुंचाया जाए और किसानों को ज्यादा उत्पादन मिल सके, ऐसी व्यवस्थाएं आत्मनिर्भर भारत योजना के अंतर्गत की जा रही हैं। दलहन में आत्मनिर्भरता बनाने के लिए सरकार की ओर से कई प्रयास किया जा रहे है।ं राज्यों के कृषि मंत्रालय को कृषि विकास और रवी मौसम की तैयारी से जुड़ी अपनी प्राथमिकताओं के बारे में बताना होगा।
वैज्ञानिकों के अनुभव को सम्मेलन में साझा किया जाएगा
उन्हें यह जानकारी देना होगा कि उनके राज्य के अंतर्गत किस प्रकार की तैयारी की जा रही हैं। किसानों को परेशानियों से उबारने के लिए उनकी कौन सी योजनाएं कारगर हो रही है? अनुभव और सुझावों को साझा करने की अवसर यहां मिलेंगे। प्राप्त सुझावों को विषयगत मंच से प्रस्तुत किया जाएगा। चर्चा के निष्कर्ष से रवी अभियान 2026 के लिए समन्वित परिणाम और रणनीति की तैयारी लोगों के सामने लाई जाएगी। समापन सत्र में पूरे विचार विमर्श का अनुभव यहां पर प्रस्तुत किया जाएगा।
रवी फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को सशक्त बनाने के लिए एक उचित रोड मैप बनाने की योजना बताई जा रही है। इसके लिए और क्या प्रयास किया जा सकते हैं? इसका उद्देश्य खाद एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की पूर्ति करना है। इसमें क्या सहयोग दिया जा सकता है? इसके बारे में लोग अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।
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