रक्षा मंत्रालय ने दी स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर को मंजूरी, हथियारों और रक्षा उपकरणों का परीक्षण होगा आसान
खबर सार :-
रक्षा मंत्रालय की प्रूफ रेंज, फील्ड फायरिंग रेंज और परीक्षण सुविधाओं के इस्तेमाल के संशोधित स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) को मंजूरी दी गई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय रक्षा उद्योग के लिए यह स्वीकृति प्रदान की है। नई व्यवस्था का मकसद है कि स्वदेशी रक्षा तकनीक को परीक्षण के लिए जरूरी सुविधाएं आसानी से मिलें और कागजी प्रक्रिया में कम समय लगे।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: रक्षा मंत्रालय ने हथियारों और रक्षा उपकरणों के परीक्षण के लिए नई एसओपी को मंजूरी दी है। रक्षा मंत्रालय की प्रूफ रेंज, फील्ड फायरिंग रेंज और परीक्षण सुविधाओं के इस्तेमाल के संशोधित स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) को मंजूरी दी गई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय रक्षा उद्योग के लिए यह स्वीकृति प्रदान की है। नई व्यवस्था का मकसद है कि स्वदेशी रक्षा तकनीक को परीक्षण के लिए जरूरी सुविधाएं आसानी से मिलें और कागजी प्रक्रिया में कम समय लगे। यानी देश में अगर कोई भारतीय कंपनी नया हथियार, रक्षा उपकरण या सैन्य तकनीक विकसित करती है, तो उसका परीक्षण सरलता से हो सकेगा।
हथियारों के परीक्षण के लिए उठाया बड़ा कदम
बता दें कि हथियारों का परीक्षण उसके सबसे जरूरी चरणों में से एक होता है। इसी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने यह बड़ा कदम उठाया है। सबसे बड़ी राहत आईडीईएक्स, टीडीएफ, मेक और रक्षा मंत्रालय की अन्य विकास परियोजनाओं को मिलेगी। इन परियोजनाओं के लिए प्रूफ और परीक्षण शुल्क माफ कर दिया गया है। यानी देश में नई रक्षा तकनीक विकसित करने वाली परियोजनाओं को परीक्षण के दौरान शुल्क की चिंता नहीं करनी होगी।
कंपनियों के लिए आसान होगी दस्तावेजी प्रक्रिया
संशोधित प्रक्रिया में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भारतीय रक्षा उद्योग किन-किन प्रूफ रेंज, फील्ड फायरिंग रेंज और प्रयोगशाला परीक्षण सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकता है। इनमें रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), सरकारी गुणवत्ता आश्वासन एजेंसियों और तीनों सेनाओं के पास उपलब्ध सुविधाएं शामिल हैं। जहां परीक्षण शुल्क लागू होगा, वहां उसके निर्धारण और भुगतान की प्रक्रिया भी स्पष्ट कर दी गई है। इससे कंपनियों के लिए दस्तावेजी प्रक्रिया आसान होगी और उन्हें पहले से पता रहेगा कि परीक्षण के लिए क्या प्रक्रिया अपनानी है।
नई व्यवस्था में बदला विवादों के समाधान का तरीका
नई व्यवस्था में विवादों के समाधान का तरीका भी बदला गया है। पहले मध्यस्थता का प्रावधान था, जिसे अब हटाकर सरल सुलह समझौते की व्यवस्था लाई गई है। इससे उद्योग और संबंधित सरकारी संस्थाओं के बीच किसी मुद्दे पर विवाद होने की स्थिति में उसका तेजी से समाधान किया जा सकेगा। संशोधित प्रक्रिया में एक खास प्रावधान किया गया है। हर तिमाही प्रूफ रेंज में तीन दिन का समय विकास परियोजनाओं की प्रूफ फायरिंग के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। इसमें आईडीईएक्स, टीडीएफ, मेक और रक्षा मंत्रालय की अन्य विकास परियोजनाओं के साथ-साथ भारतीय रक्षा उद्योग की अपनी पहल पर विकसित की जा रही परियोजनाएं भी शामिल होंगी।
स्वदेशीकरण-नवाचार के साथ रक्षा निर्यात को मिलेगी गति
इसके जरिए रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नई तकनीक बनाइए, परीक्षण के लिए आगे बढ़िए और उसके लिए जरूरी सुविधा तय समय पर पाइए। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि संशोधित प्रक्रिया से प्रूफ रेंज, फील्ड फायरिंग रेंज और परीक्षण सुविधाओं तक पहुंच सरल, पारदर्शी और उद्योग के अनुकूल बनेगी। इससे स्वदेशीकरण और नवाचार को बढ़ावा मिलने के साथ रक्षा निर्यात को भी गति देने में मदद मिलेगी। यानी भारत में रक्षा उपकरण बनाने वाली कंपनियों के लिए अब सिर्फ तकनीक विकसित करना ही नहीं, बल्कि उसे परखना और आगे बढ़ाना भी आसान होगा। यह कदम रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को जमीन पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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