महाराष्ट्र में सूखे का संकट, 10 प्रतिशत पानी कटौती का निर्देश
खबर सार :-
महाराष्ट्र में पानी की किल्लत अब घर-घर पहुंच चुकी है। यहां राज्य की 265 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित की गई हैं। पानी की किल्लत का नतीजा है कि 10 प्रतिशत पानी कटौती का निर्देश सरकार की ओर से जारी किया गया है।
खबर विस्तार : -
मुंबई, महाराष्ट्र में सुखे का संकट अब गहराने लगा है। घर-घर पिए जाने वाले पानी की किल्लत हो गई है। अब बाल्टियों में पानी बाहर से आने लगा है। उसके लिए भी मारामारी का सामना करना पड़ रहा है। राज्य की ओर से सरकार ने 10 फीसदी पानी कटौती का निर्णय भी लिया है। इसे अलनीनो का असर माना जा रहा है। इसकी वजह से ही महाराष्ट्र में बारिश की कमी बताई जा रही है।
अभी सरकार के पास कोई पुख्ता बंदोबस्त नहीं
सोमवार को जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन ने पानी की कमी के चलते कटौती के ऐलान की जानकारी दी है। आने वाले दिनों में सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए अभी सरकार के पास कोई पुख्ता बंदोबस्त नहीं हैं। झीलों में पानी नीचे पहुंच चुका है। तालाब सूख चुके हैं। नदियों का जलस्तर भी अब बहुत कम है। फिलहाल, जल प्रबंधन की योजना के लिए सरकार प्रयास कर रही है।
पानी की समस्या से निपटने के लिए सरकार की ओर से 31 अगस्त 2027 तक बांध और इस्तेमाल के लिए पानी की योजना बनाई है, लेकिन अभी मौजूदा समय में किस तरह से निपटा जाएगा? इसके लिए केवल तैयारी चल रही है। राज्य के लोगों को पीने के पानी की कमी नहीं होनी दी जाएगी, यह बात तो समझ में आ रही है, लेकिन 10 फ़ीसदी पानी की कटौती का मतलब क्या है?
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अलनीनो का असर अगले साल तक रहेगा
यह सवाल लोगों की समझ में नहीं आ रहा है। 16 अक्टूबर 2026 से सभी शहरी निकाय संस्थाओं में पानी कटौती का ऐलान करने के लिए कहा गया है। फिलहाल, अभी अगले साल तक पानी का संकट रह सकता है। मंत्री की ओर से बताया गया है कि 265 तहसीलों में सूखा ग्रस्त घोषित किया गया है। अलनीनो का असर अगले साल तक रहेगा। जल संसाधन विभाग ने सभी संबंधित एजेंसियों को पानी की बचत के लिए निर्देश दिए हैं।
साथ ही दुरुपयोग करने वालों पर एक्शन लेने की बात भी कहीं जा रही है। महाराष्ट्र में पानी का संकट इस कदर हावी है की जमीन की दरारें दूर से दिखने लगी हैं। फासले सूख चुकी है। तालाबों का पानी भी अब नहीं दिख रहा है। एक-एक बूंद पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। छत्रपति संभाजी नगर की वैजापुर तालुका में खड़ी मक्के की फसल सूख चुकी है। यहां की यह नगदी फसल है।
बड़े पैमाने पर भुट्टा की खपत की जाती रही है, लेकिन इस बार किसानों के हाथ खाली रह जाएंगे। फसल को पानी देने के लिए कुछ किसानों ने ड्रिप सिस्टम लागू किया था, लेकिन इनके लिए भी पानी नहीं मिल पा रहा है। सबसे ज्यादा मायूस किसान है, जिनके सामने फैसले सूख रही हैं और वह उनके बचने के लिए कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं।
कुएं की तलहटी में भी पानी नहीं मिल रहा
सरकार की ओर से पीने के लिए पानी की टंकियां घरों तक पहुंचाई जा रही हैं। इन पर भी बड़ी संख्या में लोग पहुंच जाते हैं। एक बाल्टी पानी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ जाती है। सरकार की खेत तालाब योजना का भी कहीं लाभ नहीं दिखाई पड़ रहा है। बड़े-बड़े तालाबों में पानी नहीं है। सूखे की आहट मिलते ही टैंकर तैयार किया जा रहे हैं। फूलगोभीद और टमाटर जैसी फैसले बाजारों से गायब होने लगी हैं। जहां कहीं भी यह दिखाई पड़ रही है, इनकी कीमत आसमान छू रही हैं।
लोणी गांव के भी किसान सूखे की मार झेल रहे हैं। यहां कुएं की तलहटी में भी पानी नहीं मिल रहा है। मवेशियों के लिए थोड़ा बहुत पानी मुश्किल से जुटाया जा रहा है। बारिश न होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। हर साल इन दिनों महाराष्ट्र में झील, झरने, तालाब और कुएं लबालब रहा करते थे। इस बार ऐसा नहीं है। इसीलिए कई स्थानों पर सरकारी टंकियां में पानी भेजा जा रहा है। यहां जरूर से ज्यादा पानी लोग भरने लगे हैं। इस कारण दूसरे लोगों में विवाद उत्पन्न होने लगा है।
मराठवाड़ा में किसान सूखे से निपटने के लिए लाचार
परिणाम यह है कि धक्का मुक्की और बहसबाजी के चलते टैंकर वालों ने भी यहां आना कम कर दिया है। माहौल खराब होने की स्थिति अब हमेशा बनी रहती है। जैसे ही टैंकर दिखाई पड़ता था, लोग अपनी बड़ी-बड़ी टंकियां लेकर दौड़ पढ़ते थे। इससे अब पानी का संकट और भी गहराने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके लिए यह भयानक और मंजर जैसा बन गया है। बारिश के मौसम में जहां खेत हरे होने चाहिए, वहीं मराठवाड़ा में किसान सूखे से निपटने के लिए लाचार हैं। फसल सूख रही है।
जिस पर साल भर के खर्च की उम्मीद लगाई जा थी, उसे बचा पाना मुश्किल हो रहा है। कुछ स्थानों में थोड़ा बहुत पानी दिखाई पड़ जाता है, यहां पर चरवाहे बड़ी मुश्किल से पहुंचकर अपने पशुओं के लिए पानी का बंदोबस्त कर पाते हैं। मौसम भी अभी इस स्थिति में नहीं है, जिससे लगे कि हां बारिश हो पाएगी। आने वाले दिनों में महाराष्ट्र में पानी का संकट और यदि गहरा हो गया तो लोग पीने के लिए तरस जाएंगे।
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